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हरिशंकर परसाई की कहानियाँ

हरिशंकर परसाई की कहानियाँ

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7hr 54m

Language

Hindi

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Stories

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"दोस्तों, आवाज़ हिंदी आपके लिए लाया है एक नया शो। जिसका नाम है ''निठल्ले की डायरी'' जो हरिशंकर परसाई जी के व्यंगों का एक संग्रह है। इसमें उनके 26 व्यंग शामिल है, जिसमें समाज में फैले भ्रष्टाचार,दिखावा, दोगलापन और अफसरशाही को उन्होंने अपनी कलम से निशाना बनाया है। परसाई जी ने ये व्यंग एक ऐसे व्यक्ति के माध्यम से कहे हैं, जो की निठल्ला कहलाता है। और उसी के डायरी में दर्ज उसके अनुभव ही इस पुस्तक की शक्ल लेते हैं। यह व्यक्ति कोई आम निठल्ला नहीं था। यह निठल्ला कुछ भिन्न किस्म का था। पूरी डायरी पढने के बाद मालूम होता है कि वह 'निठल्ला' के नाम से इसलिए बदनाम था कि वो लगातार काम नहीं करता था । वो एक दिन फैसला करता है वो अब दूसरों की मदद करेगा। अब ये मदद उसे किधर और किन किन लोगों से मिलाएगी ये पुस्तक को पढ़िएगा तो पता चलेगा। और क्या वो लोगों का भला कर भी पायेगा ? तो चलिए दोस्तों, सुनते हैं हरिशंकर परसाई की कहानियाँ.। "

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स्वस्थ सामजिक हलचल और अराजकता

41 - स्वस्थ सामजिक हलचल और अराजकता

11 min 47 sec

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सिद्धांतों की व्यर्थता

40 - सिद्धांतों की व्यर्थता

11 min 28 sec

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उद्घाटन शिलान्यास रोग

39 - उद्घाटन शिलान्यास रोग

14 min 40 sec

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विधायकों की बिक्री

38 - विधायकों की बिक्री

10 min 48 sec

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ये क्या नमरूद की खुदाई थी

37 - ये क्या नमरूद की खुदाई थी

09 min 53 sec

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प्रवचन और कथा

36 - प्रवचन और कथा

09 min 29 sec

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टेलीविज़न का निजी यथार्थ होता है

35 - टेलीविज़न का निजी यथार्थ होता है

14 min 59 sec

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मेरी प्रिय कहानियाँ

34 - मेरी प्रिय कहानियाँ

08 min 22 sec

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साहित्य में प्रसिद्ध कुछ नारियाँ

33 - साहित्य में प्रसिद्ध कुछ नारियाँ

24 min 07 sec

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टॉमस हार्डी और प्रेमचन्द

32 - टॉमस हार्डी और प्रेमचन्द

09 min 38 sec

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हरिशंकर परसाई की कहानियाँ

Stories|Hindi|41 Episodes
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"दोस्तों, आवाज़ हिंदी आपके लिए लाया है एक नया शो। जिसका नाम है ''निठल्ले की डायरी'' जो हरिशंकर परसाई जी के व्यंगों का एक संग्रह है। इसमें उनके 26 व्यंग शामिल है, जिसमें समाज में फैले भ्रष्टाचार,दिखावा, दोगलापन और अफसरशाही को उन्होंने अपनी कलम से निशाना बनाया है। परसाई जी ने ये व्यंग एक ऐसे व्यक्ति के माध्यम से कहे हैं, जो की निठल्ला कहलाता है। और उसी के डायरी में दर्ज उसके अनुभव ही इस पुस्तक की शक्ल लेते हैं। यह व्यक्ति कोई आम निठल्ला नहीं था। यह निठल्ला कुछ भिन्न किस्म का था। पूरी डायरी पढने के बाद मालूम होता है कि वह 'निठल्ला' के नाम से इसलिए बदनाम था कि वो लगातार काम नहीं करता था । वो एक दिन फैसला करता है वो अब दूसरों की मदद करेगा। अब ये मदद उसे किधर और किन किन लोगों से मिलाएगी ये पुस्तक को पढ़िएगा तो पता चलेगा। और क्या वो लोगों का भला कर भी पायेगा ? तो चलिए दोस्तों, सुनते हैं हरिशंकर परसाई की कहानियाँ.। "

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स्वस्थ सामजिक हलचल और अराजकता

41 . स्वस्थ सामजिक हलचल और अराजकता

"परसाई जी ने इस कहानी में बताया कि समाज में हलचल होना जरूरी है। जब समाज में हलचल होती है तो पता लगता है कि समाज पुरानी कुरीति से बाहर आकर कुछ अच्छा कर रहा है। ऐसी अगर हलचल होती है तो उसका स्वागत होना चाहिए। परन्तु हमेशा ही ऐसा नहीं होता। कई बार जब धर्म और राजनीति का मिश्रण होता है तो वो भी एक तरह की हलचल पैदा करती है जो समाज को तोड़ती है और विध्वंस फैलाती है। ऐसे हलचलों को उन्होंने उदाहरण से समझाया है। इन्हें पहचान कर इनसे न जुड़ना ही एक समझदार व्यक्ति की निशानी है।"

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सिद्धांतों की व्यर्थता

40 . सिद्धांतों की व्यर्थता

"यह कहानी 1988 की है तो उस समय के विभिन्न राजनीतिक समीकरणों और मुख्य सिद्धांतों जैसे गांधीवाद और समाजवाद और इन सिद्धांतों के प्रति विभिन्न पार्टियों और उनके नेताओं के भावों का भी जिक्र इस कहानी में होता है। किस तरह केवल नाम के लिए पार्टी सिद्धांतों को उठा लेते हैं और फिर ऐसी दुशाला के तरह इन सिद्धांतों को ओढ़कर चलते हैं जिससे वो विशिष्ट तो दिखते हैं लेकिन इसके अलावा सिद्धांत का उनके ज़िन्दगी में कोई मोल नहीं होता है। आज की राजनीति में भी ज्यादा कुछ बदला नहीं है। यही हाल आज भी है और इस कारण कहानी प्रासंगिक है।"

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11 min 28 sec

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उद्घाटन शिलान्यास रोग

39 . उद्घाटन शिलान्यास रोग

"इस कहानी के माध्यम से वो लेख में यह दर्शाया जा रहा है कि कैसे नेता अपना नाम चमकाने के भूखे होते हैं। कैसे कई चीजें तैयार होती है, लेकिन आम जनता को उसका उपयोग नहीं करने दिया जाता है क्योंकि नेताजी ने उद्घाटन नहीं किया, तो उन्हें बुरा न लगे। भले ही यह लेख जुलाई 1991 का है, लेकिन आज भी नेताओं की हालत में सुधार नही हुआ है। यह उद्घाटन करने और अपने नाम चमकाने का रोग उन्हें लगा ही हुआ है। तो चलिए दोस्तों, सुनते हैं, हरिशंकर परसाई द्वारा लिखीं कहानी ''उद्घाटन शिलान्यास रोग ''।"

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14 min 40 sec

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विधायकों की बिक्री

38 . विधायकों की बिक्री

"यह कहानी परसाई जी ने अप्रैल 1994 में लिखा है। उन दिनों विधायकों की बिक्री की बात मशहूर रही होगी जिसके ऐवज में यह लेख लिखा गया था। इस कहानी में परसाई व्यंगात्मक रूप से ये दिखा रहे हैं कि विधायक का इलेक्शन लड़ने वाले लोगों के पास क्या क्या कारण होते हैं। विधायकी पाकर उन लोगों का सबसे महत्वपूर्ण काम कैसे खुद के कार्य करना होता है, उसे लेकर एक काला मुर्गा वाला प्रसंग बताया है। तो चलिए दोस्तों, सुनते हैं, हरिशंकर परसाई द्वारा लिखीं कहानी ''विधयाकों की बिक्री ''।"

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10 min 48 sec

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ये क्या नमरूद की खुदाई थी

37 . ये क्या नमरूद की खुदाई थी

"इस कहानी का शीर्षक ग़ालिब के एक शेर से आता है जो कि कुछ इस तरह है: ''ये क्या नमरूद की खुदाई थी, बन्दगी में भी मेरा भला न हुआ।'' कहानी की शुरुआत में लेखक होली के त्यौहार की बात करते हैं, इसके बाद कहानी में परसाई जी कहते हैं कि किस तरह दुनिया भर में कृषि के त्यौहार मनाये जाते रहे हैं और फिर उनके साथ धर्म के प्रचार के लिए कुछ कथाएँ, मिथक इत्यादि जोड़ दिये जाते हैं। लेख में लेख नमरूद की कहानी, इब्राहिम की कहानी और हिरण्यकश्यप की कहानी की चर्चा भी करते हैं। वहीं नास्तिकों के ईश्वर में न विश्वास करने और उनका आस्तिकों से टकराव के विषय में भी लेखक कहते हैं। "

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09 min 53 sec

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प्रवचन और कथा

36 . प्रवचन और कथा

"यह कहानी 1993 की है। इस कहानी में परसाई जी कहते हैं, कि उन्होने देखा है पिछले कुछ वर्षों में प्रवचनों और उपदेशों की झड़ी सी लग गई है। इसके बाद वो पहले किस तरह की कथाएँ कही जाती थी और उस वक्त कथावाचकों का क्या उद्देश्य होता था इस पर वो बात करते हैं। तो चलिए दोस्तों, सुनते हैं, हरिशंकर परसाई द्वारा लिखी कहानी ''प्रवचन और कथा ''।"

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09 min 29 sec

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टेलीविज़न का निजी यथार्थ होता है

35 . टेलीविज़न का निजी यथार्थ होता है

"'टेलीविज़न से लोगों को बहुत शिकायतें हैं।'' यह कहानी टीवी में दर्शाए जाने वाले धारावाहिकों पर एक तगड़ा कटाक्ष है। इस कहानी में टीवी में किस तरह से जटिल समस्याओं का आतार्किक साधारिकरण किया जाता है उस पर टिप्पणी की गई है। तो चलिए दोस्तों, सुनते हैं, हरिशंकर परसाई द्वारा लिखीं कहानी ''टेलीविज़न का निजी यथार्थ होता है''।"

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मेरी प्रिय कहानियाँ

34 . मेरी प्रिय कहानियाँ

"इस लेख में परसाई जी अपनी प्रिय कहानियों के विषय में बात कर रहे हैं। वो ऐसी कहानियों की बात कर रहे हैं जिसे पढ़ने से मन सोचने को मजबूर हो जाये। मन को कुछ खटका हो जाये। लेख में प्रेमचंद, एन्टन चेखव, मैक्सिम गोर्की, ओ हेनरी की कहानियों का जिक्र है। तो चलिए दोस्तों, सुनते हैं, हरिशंकर परसाई द्वारा लिखीं कहानी ''मेरी प्रिय कहानियाँ ''। "

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साहित्य में प्रसिद्ध कुछ नारियाँ

33 . साहित्य में प्रसिद्ध कुछ नारियाँ

"इस कहानी में हरिशंकर परसाई जी ने अब्राहम लिंकन की पत्नी मैरी टॉड, केनेडी की पत्नी जैकलिन, मेरी एंटाईनेट, एनी बेसेंट, विनी मंडेला के विषय में लिखा है। उनके जीवन, उनके संघर्षों, उनकी गलतियों के विषय में लिखा है। तो चलिए दोस्तों, सुनते हैं, हरिशंकर परसाई द्वारा लिखीं कहानी ''साहित्य में प्रसिद्ध कुछ नारियाँ''। "

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24 min 07 sec

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टॉमस हार्डी और प्रेमचन्द

32 . टॉमस हार्डी और प्रेमचन्द

"यह कहानी टॉमस हार्डी और प्रेमचंद की तुलना कर यह दर्शाता है कि कैसे प्रेम चंद का लेखन टॉमस हार्डी से भिन्न है। और इस तरह यह कहना कि प्रेमचन्द भारत के टॉमस हार्डी हैं, एक गलत वक्तव्य है। दोनों ने ही ग्रामीण पात्रों के विषय में लिखा है लेकिन प्रेमचंद के विषय में परसाई जी कहते हैं कि वो एक व्यापक दृष्टि के क्रांतिकारी लेखक हैं। तो चलिए दोस्तों, सुनते हैं, हरिशंकर परसाई द्वारा लिखीं कहानी ''टॉमस हार्डी और प्रेमचन्द''। "

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09 min 38 sec

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