भगवान् श्री कृष्णा की असीम कृपा से ना केवल हमे यह बहुमूल्य मनुष्य जीवन प्राप्त हुआ है, जिसका एकमात्र लक्ष्य जीवन एवं मृत्यु के कुचक्र में से निकलना है, अपितु हमे भारत जैसे आध्यात्म में उत्कृष्ट देश में निवास प्राप्त हुआ है, जहां के वेद शास्त्रों में जीवन के लक्ष्य को प्राप्त करने का साधन बताया गया है और जहां सभी लोगो को यह ज्ञान है कि यदि कोई अपने वास्तविक ज्ञान का अभिलाषी है तो उसे योग्य गुरु की शरण लेने की आवश्यकता है, जिस प्रकार महाराज परीक्षित ने अपनी मृत्यु को निकट आता देख श्रील शुकदेव गोस्वामी के श्री चरणों में आश्रय लिया एवं उनसे जीवन के लक्ष्य के विषय में ज्ञान प्राप्त किया। उस समय श्रील शुकदेव गोस्वामी ने सात दिवस के लिए श्रीमद भागवतम की शिक्षा परीक्षित महाराज को दी। श्रीमद भागवतम को सभी वेदों का सार बताया गया है, जिसमे आत्मा, परमात्मा, भौतिक जगत, आध्यात्मिक जगत, जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति का मार्ग, ईश्वर के अनेक मार्ग, स्वयं भगवान् श्री कृष्ण की अद्भुत लीलाओं एवं अन्य कई विषयों का विस्तार से वर्णन किया गया है। इसी श्रीमद भागवतम का विस्तार रूप से देश विदेश में प्रचार प्रसार किया श्री कृष्ण भावनामृत संध के संस्थापक आचार्य श्रील भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद ने। अपनी शिक्षाओं को भागवत पे आधारित करके उन्होंने अनेक जीवों को कृष्ण भक्ति की ओर आकर्षित किया एवं विश्व भर में अनेक मंदिरों की स्थापना की जहां भक्तगण श्री कृष्ण की अपने जीवन को धन्य कर सकते हैं। उनकी आज्ञा से श्री कृष्ण भावनामृत संध के सभी मंदिरों में प्रातः, प्रातः कालिय कार्यक्रम के पश्चात, प्रतिदिन श्रीमद भागवतम का अध्ययन होता है। श्री वृन्दावन धाम में स्वयं भगवान् की लीला स्थली, के इस्कॉन मंदिर में भी यह कार्यक्रम प्रचलित है। प्रतिदिन कई एक विद्वान् भक्त श्रीमद भगवत के एक विस्तार रूप से वर्णन करते हैं जिसका श्रवण करके सभी भक्तगण अति लाभान्वित होते हैं। अब आपके मंगल की कामना करते हुए, क्योंकि इस कलियुग में हरिनाम संकीर्तन एवं भागवत श्रवण ही वास्तव में कल्याणकारी है, सभी प्रवचन आपकी सुविधा के लिए aawaz.com पर प्रस्तुत कर रहे हैं। हम आशा करते हैं कि आप इन कथाओं का श्रवण करके लाभान्वित होंगे एवं अपने आध्यात्मिक जीवन में प्रगति करेंगे। हरे कृष्ण!!