स्टैंड अप कॉमेडी का चलन विदेशों में कई सालों से है, लेकिन हाल ही में इसने हमारे देश में एक खास जगह बनाई है। खास तौर पर आज का यूथ स्टैंड अप कॉमेडी से राबता रखता है। स्टैंड अप कॉमेडी आज हर व्यक्ति को देखना पसंद है। जहां एक ओर कॉर्पोरेट कल्चर में काम का स्ट्रेस और पैसे कमाने की दौड़ ख़त्म होने का नाम नहीं ले रही, वहीं आज के युवा स्ट्रेस से भरपूर दिन से कुछ लम्हे अपने लिए चुरा कर स्टैंड अप कॉमेडी के ज़रिये दिल खोल कर हंस लेते हैं। ज़ाहिर है स्टैंड अप कॉमेडी से लोग खुद से रूबरू हो पाते हैं।

आज वर्ल्ड लाफ्टर डे पर हम आपको मिलवाने जा रहे हैं एक ऐसे स्टैंड अप कॉमेडियन से, जो आम ज़िन्दगी में आपके साथ होनेवाली घटनाओं को ना सिर्फ कॉमेडी के गुलदस्ते में सजाते हैं, बल्कि इसकी सुगंध बिखेरने में भी पीछे नहीं हटते। आज हम स्टैंड अप कॉमेडी के करियर ऑप्शन होने के बारे में बात करेंगे जसप्रीत सिंह से, जो सोशल मीडिया पर अपने कई कॉमेडी वीडियोज़ की वजह से फेमस हैं।

स्टैंडअप कॉमेडी को चुनने से पहले खुद से ज़रूर करें ये सवाल

आपको कम से कम 40 से 50 बार लोगों के सामने अपना एक्ट रखना होगा

जसप्रीत कहते हैं,”यदि आप सोचते हैं कि आप फनी हैं और आपको स्टैंड अप कॉमेडी को करियर बनाना चाहिए, तो सबसे पहले ध्यान रखें कि आपको कई लोगों के सामने खुद को पेश करना है। अब तक आप सिर्फ अपने घरवालों और दोस्तों को हंसाते आ रहे थे, लेकिन अब स्टैंड अप कॉमेडी के दौरान कुछ ऐसे लोगों को हंसाना है, जो आपको पर्सनली नहीं जानते। साथ ही आपको यह भी ध्यान रखना चाहिए कि कोई भी व्यक्ति किसी फिल्ड में तुरंत परफेक्ट नहीं बनता, उसे बार-बार लोगों के सामने अपना एक्ट रखना होता है। जिसके बाद ही आप इस फिल्ड को पूरी तरह से करियर में बदल सकते हैं। इसलिए इस फिल्ड में आने से पहले लोगों के सामने प्रैक्टिस ज़रूरी है। आपको कम से कम 40 से 50 बार लोगों के सामने अपना एक्ट रखना होगा, उसके बाद ही आप उस एक्ट को लेकर श्योर हो सकते हैं। यदि आप किसी जॉब में है, तो इस फिल्ड में आते ही उसे ना छोड़ें, बल्कि थोड़ा समय निकाल कर पहले लोगों के सामने प्रैक्टिस करें, छोटे शोज़ लें और इसके बाद इसे पूरी तरह से करियर में ढालें।”

एक एक्ट को बनाने में लगता है समय

यदि आपको ऐसा लगता है कि कोई भी कॉमेडियन बेहद आसानी से कंटेंट लिख लेता है, तो ये आपकी गलती है। जसप्रीत की मानें तो, “मुझे 1 से डेढ़ घंटे का कंटेंट लिखने में करीब 1 से 2 साल लग जाते हैं। आप का कोई भी कंटेंट तब लोगों को हंसाने में मददगार होता है, जब आप उस कंटेंट पर पूरी तरह से रिसर्च करते हैं। आपको रोज़मर्रा की बातों पर ध्यान देकर, उसमें से ह्यूमर निकालना होता है, जो कुछ दिनों का काम नहीं। इसके लिए आपको कंटेंट को कई बार लोगों के सामने रखना पड़ता है और उसके बाद ही आप इसे एक परफेक्ट कंटेंट मान सकते हैं। मैं अपने सोशल मीडिया चैनल पर जो भी कंटेंट डालता हूं, उसके लिए मैं कम से कम 1 से 2 साल का वक्त देता हूं।”

सिर्फ पैसा नहीं, मेहनत भी

कई बार लोग सोचते हैं कि इस फिल्ड में बेहद पैसा है, लेकिन जसप्रीत कहते हैं, “अक्सर लोग ये सोच कर स्टैंड अप कॉमेडी की फिल्ड में आने की कोशिश करते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि इसमें भरपूर पैसा है, इसलिए वे सिर्फ पैसे की ओर आकर्षित होकर इस फिल्ड में आने की कोशिश करते हैं। कई बार उन्हें स्टैंडअप कॉमेडी की ओर आकर्षण भी नहीं होता, लेकिन उसके बाद भी वे इसमें करियर बनाना चाहते हैं। लेकिन वे इस बात को भूल जाते हैं कि किसी भी करियर को बनाने के लिए पूरा डेडिकेशन, मेहनत और चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। किसी भी आर्ट फॉर्म को अपनाने के लिए पैसा वजह नहीं हो सकता। साथ ही आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हर महीने लोग इस फिल्ड में अपनी किस्मत आज़माते हैं और यहां सिर्फ उन्हें सफलता मिलती है जो मेहनत करना जानते हैं। इस फिल्ड में ग्रोथ ग्रैजुअलि होती है। आपको अचानक कुछ ही दिनों में लोगों से प्रशंसा नहीं मिलेगी, बल्कि इसके लिए आपको भरपूर मेहनत और धीरज रखने की ज़रुरत होगी।”

मेरा कंटेंट ही लोगों को लुभाता है!

जसप्रीत मानते हैं कि यदि उनका कंटेंट अच्छा है, तो लोग उनसे जुड़ाव ज़रूर महसूस करेंगे। जसप्रीत कहते हैं, “मैं वर्तमान में हो रही बातों पर कंटेंट बनाना पसंद करता हूं। इस वक्त जो हो रहा है, जो लोग कर रहे हैं और जैसे मैं अब चीज़ों को देख रहा हूं यही मुझे प्रेरित करते हैं। यदि लोग मेरे लिखे हुए कंटेंट से जुड़ाव महसूस करते हैं, तो वो इसलिए, क्योंकि ये सब उनके साथ भी हो रहा होता है। मैं कल्पना करके कंटेंट नहीं बनाता, बल्कि उन बातों पर लिखता हूं, जो मेरे साथ, आपके साथ हो रही हैं। शायद इसलिए लोगों को मेरा कंटेंट लुभाता है।”

क्यों लोगों का मुस्कुराना हो गया है कम?

कोर्पोरेट कल्चर से कॉमेडी कल्चर तक का सफर देख चुके जसप्रीत का मानना है कि आज लोगों के पास मनोरंजन के कई ज़रिये हैं, जिसकी वजह से लोग आपस में बात करने की बजाय अकेले रहना पसंद करने लगे हैं। “जैसा कि आप सभी ने उस ज़माने को देखा होगा, जब टीवी पर रामायण शुरू होने के बाद मोहल्ले की गलियां सूनी हो जाती थीं और इस शो को देखने के लिए लोग एक छत के नीचे साथ आ जाते थे। यही वजह थी कि लोग एक-दूसरे से ज़्यादा मिलते थे। लेकिन अब लोगों के पास कई ऑप्शन हैं और शायद इसलिए लोग खुद के साथ ज़्यादा और लोगों के साथ कम समय बिताते हैं। वहीं लोग खुद में बेहद रिज़र्व हो चुके हैं। कॉर्पोरेट ऑफिस में शो के दौरान मैं किसी भी बॉस को इसलिए कम मुस्कुराते हुए देखता हूं, क्योंकि वे सोचते हैं कि यदि वे छोटी-छोटी बातों पर हसेंगे, तो उनके जूनियर्स उन्हें जज करेंगे। यही बात हमें खुल के जीने से रोक रही है।”

तो क्यों न हम खुद से निकलकर अपने आस-पास हो रही बातों पर अधिक ध्यान दें और खुद को ज़िन्दगी जीने से ना रोकें! आज वर्ल्ड लाफ्टर डे पर स्टैंड अप कॉमडी पर ये चर्चा आपके लिए कितनी फायदेमंद रही, हमें ज़रूर बताइये। हंसते रहिये और हंसाते रहिये।

मेरी आवाज़ ही पहचान है! संगीत मेरी कल्पना को पंख देता है.. किताबी कीड़ा, अडिग, जिद्दी, मां की दुलारी.. प्राणी प्रेम ऐसा कि लोग मुझे लगभग पागल समझते हैं! खाने के लिए जीनेवाली और हद दर्जे की बातूनी.. लेकिन मेरा लेखन आपको बोर नहीं करेगा..