क्या आप अक्सर दफ्तर में देर तक रुक कर काम करते हैं? क्या आपको वाकई अपना काम इतना पसंद है कि आप घर ही नहीं जाना चाहते, या क्या आप ऐसा इसलिए कर रहे हैं ताकि बॉस को समझ आये कि आप कितने मेहनती और ज़िम्मेदार हैं? या क्या ये परेशानी इस वजह से आ रही है कि आप दफ्तर के वक़्त में अपना काम ख़त्म नहीं कर पा रहे हैं?

चाहे इनमें से जो भी वजह हो, एक बार आपने देर तक रुकना शुरू किया, तो वक़्त पे घर जाना आपके लिए बहुत मुश्किल साबित हो सकता है।

अगर आप इस मुश्किल में नहीं फंसना चाहते हैं, या अगर आप इस मुश्किल से निकलना चाहते हैं, तो इन दो बातों पर ध्यान दीजिये।

अपने काम और निजी ज़िन्दगी पर एक बार गौर करिये

माना कि दफ्तर में आपकी काफी ज़िम्मेदारियां हैं, पर घर में भी आपकी थोड़ी भूमिका तो ज़रूर होगी। कुछ वक़्त निकालकर खुद से पूछिए – क्या आप अपने परिवार वालों के साथ थोड़ा वक़्त बिताना चाहते हैं? क्या आपको खुद के लिए रोज़ थोड़ा वक़्त अच्छा लगता है? क्या आपके सर पर किसी कर्ज़े का बोझ है जो आप जल्द से जल्द चुकाना चाहते हैं? एक बार आपने इन बातों को समझ लिया, तो आप के लिए उस हिसाब से वक़्त बांटना थोड़ा आसान हो सकता है।

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हर रोज़ देर तक रुकने से मेरी अच्छी तरह काम करने की क्षमता कम हो जाएगी

अर्चना अईयर ए.सी. नीलसन एमर में कंज़्यूमर इनसाइट्स एक्ज़ेकेटिव के तौर पर काम करती हैं और कहती हैं कि वक़्त पर दफ्तर से निकलना ही समझदारी है। “मेरे हिसाब से वक़्त पर ही निकलना चाहिए। ये ज़रूरी है कि जब आप दफ्तर आएं तो आपको पता हो कि आपको कितनी देर में काम खत्म करना है। हां कभी कभार रुकना पड़ सकता है, पर ऐसा हर रोज़ नहीं होना चाहिए। अगर मुझे हर रोज़ देर तक रुकना पड़ा तो मैं उतनी लगन और मेहनत के साथ काम नहीं कर पाऊंगी।”

बॉस से बात कर सकते हैं

क्या आप इसलिए देर तक रुक रहे हैं ताकि बॉस आपकी मेहनत को समझे? ध्यान रहे, अगर ऐसा रोज़ रोज़ हुआ, तो जल्द ही आपकी सेहत पर भी असर पड़ सकता है। काम के साथ साथ आपको खुद के लिए भी वक़्त निकालना पड़ेगा ताकि आप खुश भी रह सकें। अपने बॉस से बात कीजिये और समझिये कि कैसे दफ्तर के घंटों में रहकर भी आप उसी काम को और अच्छे से पूरा कर सकते हैं।

कभी कभी देर होना तो स्वाभाविक है, पर अगर ये रोज़ की बात है, तो वक़्त है बॉस से और खुद से बात करने का।