पिछले एक दशक में कार्यस्थल मौलिक रूप से बदल गया है। आजकल यंगस्टर्स तयशुदा उम्र से पहले ही काम करना शुरू कर देते हैं और यही वजह है की आजकल ऑफिस में यंग जनरेशन के वर्कर्स की संख्या लगातार बढती जा रही है। कम्पनियाँ यंग और कम एज के लोगों को इसलिए तवज्जो दे रही है क्योंकि वो उन्हें जैसे ढालना चाहे शुरुआत से वैसे ही ढाल सकती है। उन्हें कम समय में ज्यादा तरक्की हासिल करने का जुनून है। प्यू रिसर्च सेंटर के 2018 के विश्लेषण के अनुसार,अमेरिका में इस वक्त 35% वर्कफ़ोर्स यंग एज वर्कर्स की है और यह अभी और तेजी से बढ़ेगी। लेकिन ऐसा नहीं कि मिड एज वाले लोग जॉब से बाहर होते जाएंगे। हां, उन्हें भी समय के साथ खुद को अपडेट कर नई पीढ़ी के साथ कदम से कदम मिलाकर चलना ही होगा, ऐसे में यदि आप पुरानी जनरेशन के हैं और ऑफ़िस में आपको कई सारे यंग सहकर्मी मिल रहे हैं तो असहज मत होइए। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आप अपने से यंग को-वर्कर्स के साथ ऑफिस में काम को कैसे मैनेज करें ताकि आपको भी परेशानी न हो और ही उन्हें।

यंग को-वर्कर्स के साथ तालमेल बिठाना होगा आसान, याद आएंगी ये टिप्स

कम्युनिकेशन के डिफ़रेंस को कम करें

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माना कि बीस साल के व्यक्ति और चालीस साल के व्यक्ति की सोच में अंतर हो सकता है लेकिन इस गैप को और न बढ़ने दें। कम्युनिकेशन गैप जितना कम होगा, चीजें उतनी ही आसान होंगी और काम में प्रोडक्टिविटी भी होगी। ज्यादातर यंग सहकर्मी कम्युनिकेशन के तय शुदा साधन जैसे इमेल आदि को उतनी तवज्जो नहीं देते और उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे ट्विटर, व्हाट्सएप के ज़रिये भी अपने ऑफिस के काम निपटाने में आसानी होती है, ऐसे में यदि कोई यंग सहकर्मी ऐसा करे तो उसे बुरा न मानें और न ही उसे ये जताएं कि कम्युनिकेशन के लिए केवल ईमेल ही सही साधन हो सकता है। इसके अलावा यंगस्टर्स की टाइपिंग हैबिट्स भी अलग होती हैं वो अपने ईमेल में इमोजी का ज्यादा उपयोग करते हैं, ऐसे में उसे बार-बार न टोकें कि वो मेल में ऐसे न लिखे, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता अगर आप गोल को लेकर फोकस्ड है तो ये छोटी-छोटी बातें नज़रअंदाज़ कर दें तो अच्छी बॉन्डिंग बन जाएगी।

सीखने में पीछे न हटें: कई बार हम ये मान लेते हैं कि हमारे पास काम का बरसों पुराना अनुभव है तो हमें नए नवेले आए हुए लोग क्या सिखाएंगे? अगर आपकी टीम में कोई सहकर्मी कम उम्र का है और वो कुछ नया बताने या आपको उसे अपनाने की सलाह दे तो कभी बुरा न मानें, बल्कि आगे बढ़कर सीखें, इससे आपका ही फायदा होगा और आप अपने काम को बेहतर ढंग से कर पाएंगे।कभी भी यह मानकर न चलें कि मैंने जो बोल दिया वो सही है और सामने वाला अगर कम अनुभवी है तो वो गलत इसलिए सीखने में जितना आगे रहेंगे, नयी जनरेशन से आप उसका भी फायदा ले पाएंगे और काम में भी मज़ा आयेगा।

अपने आपको कमतर न दिखाएं: नयी जनरेशन में तकनीक को लेकर काफी उत्साह रहता है। यही वजह है कि वो अपने काम आसान बनाने के लिए फोन में हर दिन नए एप डाउनलोड करते हैं, उन्हें फिक्स पैटर्न पर काम करना पसंद नहीं होता। उनकी इस आदत को भी अपनाएं, जितना हो सकें उनसे नयी तकनीक के बारे में डिस्कस कीजिये, हो सकता है इससे आपका ही काम आसान हो जायेगा और जिस काम को करने में आप घंटों ऑफिस में बिता दिया करते थे उसे कुछ समय में पूरा करने में कामयाब हो जाएं। एक और बात कभी भी अपने सहकर्मी के सामने अपने आपको नींचा ना समझें, ना ही ये जताएं कि आप आउटडेटेड हैं और आपको यह सब तकनीक इस्तेमाल करने में कोई दिलचस्पी नहीं,इससे आप उनसे उनकी अच्छी चीजों को सीखने से चूक जायेंगे। और जब आपको अपने आपको ही कमतर आंकेंगे तो सामने वाला भी आपको कोई खास तवज्जो नहीं देगा।

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