ज़रा सोचिये – आपने अपने सहकर्मी से कुछ बात की और अगले ही दिन वो पूरे दफ्तर में फैल गई। आपका सहकर्मी आपसे कुछ कहता है और आपको पता चलता कि ऑफ़िस में चल रही अफवाह तो आपके बारे में ही है।

इससे पहले की आप अफवाहों के इस जाल में फंस जाएं, इन बातों का रखिये ख्याल:

अगर अफवाह किसी और के बारे में है

  • अगर दफ्तर के लोग आपस में खड़े होकर बात कर रहे हैं तो वहां से हट जाइये
  • अफवाह के बारे में कोई सवाल मत कीजिये
  • जिसके बारे में अफवाह है उससे जाके इस बारे में कुछ मत पूछिए
  • चाहे आपने अफवाह का यकीन किया या नहीं, उसे अपने सहकर्मी से जुड़े काम के बीच में ना आने दें
  • अगर आप बॉस हैं तो ये साफ़ कर दीजिये कि ऑफिस में अफवाह फैलाना नहीं सहा जाएगा
  • अफवाह के बारे में मिले किसी भी मेसेज पर जवाब ना दें
  • अगर आप को लगता है कि इस अफवाह से किसी के चरित्र पर सवाल उठ सकता है तो उसी वक़्त अपने बॉस से बात कीजिये

अगर अफवाह आप के बारे में है

  • जिन्होंने आपको अफवाह के बारे में बताया है उनसे तुरंत पूछिए कि उन्हें ये किसने बताया
  • ये बात सबके सामने साफ़ कर दीजिये कि आप इस तरह की बातों का बिलकुल समर्थन नहीं करते और आप इस बारे में बॉस से बात करेंगे
  • गुस्से में गलत शब्दों या अनुचित बातों का प्रयोग मत कीजिये
  • जिन्होंने आपके बारे में अफवाह फैलाई है, उनसे बदला लेने के लिए उनके खिलाफ अफवाह मत फैलाइये
“जब तक इन अफवाहों से आपके काम पर असर नहीं हो रहा, उसे जाने दें”

तितली चैटर्जी मार्केट रिसर्च में काम करती हैं और ये मानती हैं कि अफवाहों को शुरू होने के साथ ही ख़तम कर देना चाहिए, बजाये इसके की उसे ज़्यादा ध्यान और वक़्त दिया जाए। अफवाहें फ़िज़ूल की बातें होती हैं और आम तौर पर इनका आपके काम से कोई लेना देना नहीं होता है, ना ही इनका आप के काम पर कोई असर होता है। अगर आप अफवाह पर ज़्यादा बात ना करें तो लोग उसके बारे में खुद ही भूल जाते हैं। जब तक इन अफवाहों की वजह से आपके काम पर असर नहीं हो रहा है, इसपे ध्यान देने की कोई ज़रुरत नहीं है। ऐसी फ़िज़ूल बातों पे वक़्त ज़ाया करने से आपके काम में कोई तरक्की नहीं होने वाली है, तो बेहतर है कि खुद को इससे दूर रखिये और अपना वक़्त बचाइए।”

अफवाहें अक्सर छोटी छोटी बातों से शुरू होती हैं। अच्छा है अगर आप अपने काम और अपने निजी ज़िन्दगी से जुड़ी बातों को अलग रखें।