जब हमारी पहली जॉब लगती है तो हममें से कई लोग नई जॉब फाइनल हो जाने के बाद उस कंपनी के एचआर डिपार्टमेंट से इस बात का नेगोसिएशन करने से घबराते हैं कि सैलरी क्या होगी। कई बार हम सैलरी को लेकर डिस्कस करने से इसलिए भी डरते है कि कहीं इसके बारे में चर्चा करने से हमारे हाथ आया ऑफर निकल ना जाए या हमें ये समझ नहीं आता कि हम सही सैलरी की बात आख़िरकार रखें कैसे? मन में यह डर रहता है कि कहीं सैलरी पर नेगोसिएशन करने से मौका हाथ से ना निकल जाए। आपकी इस दुविधा को हम आज दूर करने का प्रयास करते हुए आपको बताते हैं कि सैलरी की बात कैसे रखें और कैसे स्मार्टली जो एनुअल पैकेज आप डिजर्व करते हैं वो पायें?

सैलरी के बारे में पूछें: कई बार हम सोचते हैं कि हम कॉलेज से पास होने के बाद पहली जॉब करने जा रहे हैं। ऐसे में कंपनी जितना भी ऑफर करे हमें स्वीकार कर लेना चाहिए जिससे हमारे करियर को कम से कम स्टार्ट तो मिल ही जाए लेकिन ऐसा सही नहीं है। कुछ पोजीशंस के लिए कंपनी का सैलरी स्ट्रक्चर भी फिक्स होता है और अगर आप एचआर से सैलरी का डिस्कशन ही नहीं करेंगे तो हो सकता है कंपनी भी आपको तय पैकेज से कम में ही हायर कर अपना बजट बचा ले। इसलिए अगर नेगोशियेशन करने से हिचकिचा रहे हैं तो कम से कम ये तो ज़रूर पूछें कि आपको कितनी सैलरी मिलने वाली है।

पहले से जानकारी जुटाएं : जब भी एचआर से इस बारे में बात करने जाएं तो ध्यान रखें कि पहले अपना होमवर्क अच्छे से कर लें। ऐसे लोगों से संपर्क बनाएं जो पहले से उस संस्थान से जुड़े हों या वहां काम कर रहे हों। उन लोगों से बात कर इस चीज़ की जानकारी हो जाएगी कि जिस पोजीशन के लिए आप वहां जॉब करने जा रहे हैं,उस पद के लिए वहां भी सैलरी स्ट्रक्चर क्या है। इसके अलावा वहां एनुअल अप्रेजल में कितना परसेंट तक इन्क्रीमेंट दिया जाता है और अन्य बेनेफिट्स जैसे मेडिकल इंश्योरेंस, परफॉरमेंस बोनस,रिइम्बर्स्मेंट, पीएफ आदि का क्या प्रावधान है? सैलरी के लिए बात करते वक्त बाकी सुविधाओं के बारे में भी जान लेना ज़रुरी है जैसे कितनी पेड लीव्स मिलेंगी, कितने घंटे काम करना होगा, हफ्ते में पांच दिन काम पर जाना है या फिर उससे ज्यादा भी हो सकते हैं? कई बार सैलरी पैकेज के चक्कर में इन मूल सुविधाओं पर ध्यान नहीं जाता और मनमुताबिक पैसे मिलने के बावजूद आप जॉब पर खुश नहीं रह पाते। इसलिए सैलरी के अलावा अन्य पक्षों का भी ध्यान रखें।

पहली नौकरी है तो सैलरी नेगोसिएशन के दौरान ध्यान रखें ये बातें

ओवर कॉन्फिडेंट न हों
ओवर कॉन्फिडेंट न हों

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अपना होमवर्क कर पर्याप्त मात्रा में जानकारी जुटा लेने के बाद आपको ओवर कॉन्फिडेंट भी नहीं होना है। अगर नेगोसिएशन के दौरान ज़रा भी ओवर कॉन्फिडेंट दिखाई देते हैं तो एचआर आप पर हावी होने में सफल हो जाएगा और आपको मन मुताबिक पैकेज नहीं मिल पायेगा।

लॉजिक के साथ कहें बात: बातचीत में एचआर को यह विश्वास दिलाते रहें कि आप उस जॉब प्रोफाइल के लिए परफेक्ट हैं। लेकिन एचआर की दलीलों को भी नज़रअंदाज़ ना करें। हो सकता है जिस सैलरी के लिए आप नेगोसिएशन करने पर उतारू हैं, कंपनी में उस जॉब प्रोफाइल पर उतनी सैलरी ही न हो, ऐसे में आपको स्थिति में सोच-समझकर बोलने की बहुत ज़्यादा ज़रुरत होगी।

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