भारत एक ऐसा देश है जिसे सुनने का शौक हमेशा से रहा है। फिर चाहे वह रेडियो पर खबरें, दादी माँ से कहानियाँ, दोस्तों की बातें, वॉक-मैन और फिर फ़ोन से गाने, या क्रिकेट की कमेंटरी, भारत के लोगो को हर ज़रिये से सुनना पसंद है। अब इस सुनने की प्रथा में एक नया नाम जुड़ गया है, पॉडकास्ट का। पॉडकास्ट एक तरह का श्रव्य कार्यक्रम (audio show) होता है, जिसमें समाचार, साक्षात्कार, चर्चा, गानें, कहानियाँ और विभिन्न प्रकार के प्रारूप सुनने के लियें उपलब्ध होते हैं। भारत के लियें यह मनोरंजन और ज्ञान का एक नया स्रोत है। इसी लोकप्रियता को बढ़ाने के लियें, १३ फरवरी २०२० को, विश्व रेडियो दिवस के उपलक्ष में, रेडियो फेस्टिवल नामक एक कार्यक्रम, नई दिल्ली में आयोजित किया गया था, जिसमें aawaz.com (आवाज़) के सह-संस्थापक (co-founder) ‘श्रीरमण थिआगराजन’, JioSaavn (जियो सावन) के ‘अमन गोखलानी’, Hubhopper (हबहॉपर) के ‘निशांत कुमार’, O2POD (ओ २ पॉड) के ‘नागा सुब्रमण्यम’ और Maed in India (मेड इन इंडिया) की ‘मे मरियम थॉमस’ ने ‘Podcast Revolution’ (पॉडकास्ट शेत्र में क्रांति) के विषय पर चर्चा की, जिसका संचालन The Indian Express (द इंडियन एक्सप्रेस) की ‘नेहा मैथूस’ ने किआ।
इस संवाद में बहुत सी बातें हुईं, जिसमें खासतौर पर पॉडकास्ट सम्बन्धी संभावनाओं और समस्याओं को लेकर सवाल-जवाब हुए। भारत में पॉडकास्ट की कितनी माँग है, इस विषय पर सभी ने अपने अनुभव के हिसाब से अनुमान लगाते हुए अपने-अपने विचार सामने रखे। जहाँ एक तरफ PwC (पी डब्लू सी) नामक अनुसन्धान संस्थान (research institution) के आकड़ों के मुताबिक २०१८ के अंत तक ४ करोड़ भारतियों ने पॉडकास्ट का आनंद लिया था जो २०२३ के अंत तक ७.६ करोड़ तक पहुँचने की उम्मीद में है, वहीं माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी प्रसारित ‘मन की बात’ कार्यकर्म तक़रीबन ६६ करोड़ भारतियों द्वारा सुना जा चुका है। और क्योंकि इन दोनों संख्याओं के बीच का अंतर काफी अधिक है, हमारे वक्ताओं ने माना की अभी भी पॉडकास्ट सुननें वालों की क्षमता का अनुमान ठीक से नहीं लगाया जा सकता।
वर्तमान समय में पॉडकास्ट से ज्यादा कमाई कैसे हो ये एक समस्या है, परन्तु पॉडकास्ट बनाने वाले बिना इस बात की परवाह किए, अपनी उर्जा और जुनून से नए और मनोरंजक कार्यक्रम बना रहे हैं। इसी जुनून के भरोसे जो प्रसिद्धि हासिल होती है, वह उनके समर्पण को कायम रखती है और पॉडकास्ट की दुनिया को आगे बढ़ाती रहती है। पर अब धीरे-धीरे कंपनियाँ इसकी क्षमता को समझ रही हैं और इसमें निवेश करने के लियें उत्सुक हो रही हैं। aawaz.com पर TATA Mutual Fund (टाटा म्यूच्यूअल फंड) जैसी कंपनी ने हिन्दी में एक दस-भाग की कहानी का पॉडकास्ट बनाया है जिसमें निवेशकों के लियें ज्ञान और शिक्षण सम्बन्धी जानकारियाँ भी हैं। और दूसरी कंपनियों में भी इस नए श्रव्य माध्यम की ओर जागरूकता बढ़ी है।
दूसरी ओर अंग्रेज़ी भाषी उच्च स्तर के कार्यक्रमों को प्राथमिकता (preference) देते हैं, और वह विशेष विषयों की गहन जानकारी पाना पसंद करते हैं। परन्तु पसंद का यह विभाजन अन्य भाषा भाषियों के साथ कम होता जा रहा है जब हम हुनमान चालीसा की गिनती एक श्रव्य कार्यक्रम में करें और ना कि गानों की फ़ेहरिस्त में।
भारत में हर उम्र और विभिन्न रुचियों के लोगों के बीच पॉडकास्ट उत्सुकता जगा रहा है। गाड़ी चलाते समय, सफ़र के दौरान, फुर्सत में, कसरत करते हुए, और कई अन्य पलों में पॉडकास्ट का आनंद उठाया जा रहा है। रेडियो की तरह ही, पॉडकास्ट का भविष्य भी स्वर्णिम है, क्योंकि भारत में इसकी लोकप्रियता बहुत तेज़ी से बढ़ती जा रही है। और इसी सुविचार के साथ, यह चर्चा समाप्त हुई।