हर कंपनी में कुछ ऐसे इंटेलीजेंट इम्प्लॉई होते हैं जो दूसरे कलीग्स से अलग होते हैं और कंपनी उनसे बेहद प्रभावित रहती है। साथ ही कंपनी उन्हें हर बड़े डिसीज़न और प्रोजेक्ट में शामिल करती है ताकि उनके स्किल्स का ज्यादा से ज्यादा उपयोग कर सके लेकिन कई बार यही स्मार्ट इम्प्लॉई भी कुछ गलतियां कर बैठते हैं जिनसे वह सक्सेसफुल होने का मौका खो बैठते हैं। आइए जानते हैं कैसे…

एचआर मैनेजर प्रीति चौहान के मुताबिक, स्मार्ट इम्प्लॉई कई बार परफेक्शन की चाह में कंपनी द्वारा दिए गए प्रोजेक्ट्स को अकेले ही करने में सहज महसूस करते हैं। उन्हें डर लगता है कि कंपनी ने जिस विश्वास के साथ उन्हें किसी प्रोजेक्ट में लगाया है तो ऐसा न हो कि दूसरे मेंबर्स के साथ ज़िम्मेदारी बांटने पर कहीं काम ढंग से न हो पाए। वह अपने अन्य टीम मेंबर्स के साथ काम करने से बचते हैं जिससे वह लर्निंग हासिल करने से चूक जाते हैं जो उन्हें अन्य कलीग्स के साथ काम करने का दौरान हासिल हो सकती थी।

स्मार्ट इम्प्लॉई इन गलतियों के कारण खो बैठते हैं बड़े मौके

वर्कप्लेस पर ओवर स्मार्टनेस से भी होता है नुकसान

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कंपनी के बेस्ट इम्प्लॉई माने जाने वाले लोग अपने प्रोजेक्ट्स से बहुत जल्दी बोर भी हो जाते हैं। दरअसल, एक बार उन्हें जब यह मालूम चल जाता है कि टास्क कैसे पूरी होनी है और वह उस प्रोजेक्ट से क्या सीख सकते हैं तो उनका इंटरेस्ट एक हद के बाद प्रोजेक्ट में कम होने लगता है और वह किसी दूसरे प्रोजेक्ट को करने में ज्यादा रूचि दिखाने लगते हैं।

इस तरह के लोग कई बार काम करने से ज्यादा सोचने में अधिक वक्त बिताने लगते हैं जिससे एग्जीक्यूशन का टाइम बीतता जाता है। परफेक्शन की चाह में वह यह सोचना भूल जाते हैं कि किसी प्रोजेक्ट को समय पर करना ज़रुरी है ना कि उसके लिए इतनी अधिक डिटेल खोज लेना जिसकी प्रोजेक्ट में जरुरत ही नहीं है।

कई बार स्मार्ट इम्प्लॉई अपने लिए इतने ऊंचे बेंचमार्क स्थापित कर लेते हैं कि उन्हें अपनी टीम के बाकी मेंबर्स की प्रतिभा कमतर लगने लगती है। इस वजह से वह किसी प्रोजेक्ट में उन कलीग्स का इस्तेमाल ठीक ढंग से नहीं कर सकते जो उनके लिए उपयोगी भी साबित हो सकते हैं। ऐसे इम्प्लॉई में एक और दिक्कत ये होने लगती है कि वह स्मार्ट से ओवर स्मार्ट बनने लगते हैं। उन्हें किसी की सलाह पसंद नहीं आती जो जब उन्हें कोई सलाह देता है तो वो अपने ईगो पर लेकर बुरा मान जाते हैं। वह अपनी गलतियां स्वीकार करने में घबराते हैं और क्रिटिकल फीडबैक उन्हें बिल्कुल नहीं सुहाता है।

दरअसल, इसलिए किसी भी इम्पलॉई के लिए यह बेहद ज़रुरी है कि जहां वह अपनी कम्पनी में अपने काम वी वजह से जाना जाता है, वहीं उसे दूसरे सहकर्मियों के साथ मिलकर भी उतना ही बेहतर काम करना आना चाहिए। ऐसा करने से आप कंम्पनी के लिए एक परफेक्ट इम्पलॉई साबित होंगे।

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