किसी भी ऑफिस में कई तरह के एम्प्लोयी होते हैं। कुछ ऐसे होते हैं जो बहुत अच्छा परफॉर्म करते हैं और हमेशा अपने काम से सबकी तारीफें पाते हैं और कुछ ऐसे होते हैं जो अपने काम से चाहकर भी दूसरों को, बॉस को या मैनेजमेंट को प्रभावित नहीं कर पाते। ऐसे एम्प्लोयी के साथ डील करना किसी भी बॉस के लिए काफी ट्रिकी हो सकता है क्योंकि कई बार किसी से ये कहना कि तुम अच्छा काम नहीं कर रहे या करते हो थोड़ा दुखदायी साबित हो सकता है और सामने वाले को इस कथन से चोट भी पहुंच सकती है। एक बॉस द्वारा ऐसे एम्प्लोयी से डील करने की नौबत करियर में कभी न कभी तो आती ही है क्योंकि हर टीम में कुछ बेहतरीन तो कुछ ना परफॉर्म करने वाले एम्प्लोयी तो मिलते ही हैं। ऐसे में नॉन परफॉर्मर एम्प्लोयी से बात करते समय एक बॉस को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, ये आज हम आपको बताते हैं।

अकेले में करें बात: माना कोई एम्प्लोयी जरुरत के मुताबिक, परफॉरमेंस नहीं दे पा रहा लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि एक बॉस होने के नाते आप उसे बाकी कलीग्स के सामने खरी-खोटी सुनाएं।उसके परफॉरमेंस रिव्यू से जुड़े पॉइंट्स उसे अकेले में शांत वातावरण में समझाएं। उसे बताएं कि आपकी उससे अपेक्षा क्या हैं और इन्हें पूरा करने में उसे जो भी मदद चाहिए होगी आप करेंगे। हो सकता है जो बात वो सबके सामने आपसे न कह पाए वो अकेले बातचीत में आपसे कह दे कि उसे ऐसी क्या परेशानी आ रही है जिसकी वजह से वह काम पर फोकस नहीं कर पा रहा।

इसके साथ अप्रेजल के समय पर किसी एम्प्लोयी को यह ना बताएं कि उसने खराब काम किया है इसलिए उसे ख़राब रेटिंग दी जा रही है, बल्कि कुछ महीनों के अन्तराल में उससे वन टू वन चर्चा कर उसे अवगत कराएं कि उसके परफॉरमेंस में क्या खामियां हैं, जिससे वह समय रहते सुधार कर सके ताकि अप्रेजल के टाइम पर उसे भी अच्छी रेटिंग मिल सके। अगर सीधा एचआर के सामने किसी की परफॉरमेंस को खराब कहकर उसे कम रेटिंग देंगे तो इससे एम्प्लोयी का मनोबल टूट जाएगा और वो एक बॉस होने के नाते आप पर कभी भरोसा नहीं कर पाएगा।

खराब परफॉर्म करने वाले एम्प्लोयी से बात करते समय बॉस ध्यान में रखें ये बातें

द्वेषपूर्ण व्यवहार न करें

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बातचीत में आरोप ना लगाएं: एक बॉस होने के नाते कभी भी अगर एम्प्लोयी से बातचीत करें और उसकी परफॉरमेंस डिस्कस करें तो उस पर आरोप ना लगाएं। तुम ये नहीं कर सकते, तुमसे कुछ नहीं होगा जैसे वाक्य कभी न बोलें और न ही किसी अन्य व्यक्ति से उसकी तुलना करें। ध्यान रहे बातचीत में कभी भी ऐसा न झलके की आप द्वेषपूर्ण कोई कार्यवाही कर रहे हैं और एम्प्लोयी को बेइज्जत करने के लिहाज से उससे बातचीत कर रहे हैं। उसे उदाहरण के जरिए समझाएं कि आप उससे क्या चाहते हैं लेकिन कभी भी आरोप लगाकर उसे नीचा दिखाने का प्रयास न करें।

अपने रोल पर नज़र डालें: एक बॉस होने के नाते ये आपकी भी ज़िम्मेदारी है कि आपके अंडर में काम करने वाले एम्प्लोयी का परफॉरमेंस वाइज विकास कैसे हो रहा है। खराब परफॉरमेंस का सारा दोष एम्प्लोयी पर ही मड़ने से बेहतर है कि अपने अंदर झांककर देखें कि आपने बतौर मेंटर उसका ज्ञान बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाए।

मॉनिटरिंग करें: एक बार खराब परफॉरमेंस पर बात करने के बाद एम्प्लोयी की समय-समय पर मॉनिटरिंग करें। उसे ना फील होने दें कि चूकिं वो अच्छा परफॉर्म नहीं कर रहा इसलिए आप उसपर फोकस नहीं करके उसे साइडलाइन कर रहे हैं। अगर वह थोड़ा भी सुधार दिखाए तो उसकी टीम के सामने सराहना करें जिससे उसमें कॉन्फिडेंस आएगा।

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