नाना पाटेकर और तनुश्री दत्ता के विवाद के बाद बॉलीवुड में कई बड़े नामों पर मी टू मूवमेंट का साया है। कई बॉलीवुड हस्तियों पर आरोप लगे हैं कि उन्होंने महिलाओं का सेक्शुअल हैरेसमेंट किया है। यही मूवमेंट अब भारत में जोर पकड़ चुका है और बड़ी संख्या में महिलाएं सेक्शुअल हरासमेंट की घटनाओं पर खुलकर बोल रही है। देखा जाए तो यह एक सकारात्मक बदलाव लेकर आया है। इससे पहले महिलाएं अपने साथ हुए सेक्शुअल हैरेसमेंट के बारे में बोलना पसंद नहीं करती थी, पर मी टू मूवमेंट की वजह से कई चेहरों पर से नकाब उठ गए हैं। भारत में वर्क प्लेस पर सेक्शुअल हरासमेंट आम बात हो गई है। कई महिलाएं ऑफिस मेंसेक्शुअल हरासमेंट के शिकार होती हैं, लेकिन यह केस कभी फाइल नहीं होते। जाहिर है कि इसी वजह से लोग खुले घूमते हैं। यदि महिलाएं इस बारे में खुलकर बोलने लगे तो कोई भी व्यक्ति दूसरी बार ऐसा काम करने की हिमायत नहीं करेगा।

सेक्शुअल हरासमेंट एक्ट 2013 के तहत आप आपके साथ होने वाले हैरेसमेंट के खिलाफ आवाज़ उठा सकती हैं। इस एक्ट में सभी लोग शामिल होते हैं। चाहे वह कंपनी का परमानेंट एम्प्लोयी या स्थाई कर्मचारी हो, या फिर कंपनी में काम करने वाला इंटर्न। साथ ही किसी भी संस्था के लिए बेहद अहम है कि जिस कंपनी में 10 से ज्यादा एम्प्लॉई हो, वहां इंटरनल कंप्लेंट कमिटी बनाएं।

 

जिस कंपनी में 10 से ज्यादा एम्प्लॉई हो, वहां इंटरनल कंप्लेंट कमिटी बनाएं

 

ऐसे पहचाने सेक्शुअल हरासमेंट को
दिल्ली की एक कंपनी में एचआर पद पर कार्यरत दीपिका सोनी कहती हैं कि अक्सर महिलाएं सेक्शुअल हरासमेंट के केस को पहचान नहीं पाती, क्योंकि महिलाओं को इसके बारे में पता नहीं होता। लिहाजा ये बेहद अहम बात है कि हर महिला को अपने अधिकारों के बारे में पता हो और वे जान सकें कि कौन सी घटना सेक्शुअल हरासमेंट के अंतर्गत आती है।
यदि कोई व्यक्ति आपकी मर्जी के बिना  आपको छू रहा है या आपका फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है, तो इसे सेक्शुअल हरासमेंट के अंतर्गत माना जाता है। सेक्शुअल फेवर के लिए किसी तरह की मांग रखना भी हरासमेंट का एक भाग है। साथ ही यदि कोई आप पर ऐसी टिप्पणियां कर रहा है, जिससे आप कंफर्टेबल नहीं है या जो आपकी सेक्शुअल बातों से जुड़ी हो, तो यह भी सेक्शुअल हरासमेंट के अंतर्गत आता है।
यदि कोई कर्मचारी पॉर्न वीडियोज़ या अश्लील तस्वीरें आपको भेजता है, तो यह भी हरासमेंट एक्ट के अंदर आता है। किसी तरह के गंदे इशारे करना, चाहे वह फिजिकल हो या मौखिक यह भी सेक्शुअल हरासमेंट के अंतर्गत आता है। यदि आप इन बातों को पहचान सकती हैं तो आप अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर इसके खिलाफ खड़ी हो सकती हैं।
पीड़िता को 3 महीने तक छुट्टी लेने का अधिकार है।
क्या करें जब सामना हो सेक्शुअल हरासमेंट से?
यदि आपको एहसास हो कि किसी वर्कप्लेस पर कोई व्यक्ति आपको सेक्शुअली हैरेस कर रहा है, तो आप अपनी कंपनी के इंटरनल कंप्लेंट कमिटी के पास जाकर 3 महीने के अंदर शिकायत दर्ज करवा सकती हैं। अगर कंपनी में आईसीसी की व्यवस्था नहीं है, तो लोकल कमेटी के पास जाकर शिकायत दर्ज करवा सकती हैं। मामले की जांच के दौरान यदि महिला उस व्यक्ति के सामने जाने में असहज महसूस करती है, तो वह सेक्शुअल हरासमेंट एक्ट 2013 के सेक्शन 12 के तहत छुट्टियां ले सकती है। इस एक्ट के तहत पीड़िता को 3 महीने तक छुट्टी लेने का अधिकार है।
इस तरह सही जानकारी के चलते आप वर्कप्लेस पर ज्यादा सुरक्षित रह सकती हैं और किसी भी प्रकार के सेक्शुअल हरासमेंट से बच सकती हैं।
मेरी आवाज़ ही पहचान है! संगीत मेरी कल्पना को पंख देता है.. किताबी कीड़ा, अडिग, जिद्दी, मां की दुलारी.. प्राणी प्रेम ऐसा कि लोग मुझे लगभग पागल समझते हैं! खाने के लिए जीनेवाली और हद दर्जे की बातूनी.. लेकिन मेरा लेखन आपको बोर नहीं करेगा..