अगर आपने कोई जॉब या वर्क कॉन्ट्रैक्ट देखा है, तो आपको पता होगा कि उसे पढ़ने में कितनी दिक्कत आ सकती है। इतने शब्द और ऐसी चीज़ें जिसके बारे में शायद आपको पता ना हो, लेकिन ध्यान रखिए ये सब आपके लिए काफी ज़रूरी हो सकती हैं।

आम तौर हम कॉन्ट्रैक्ट में सिर्फ अपनी तनख्वाह पर नज़र फेरते है, लेकिन कुछ और भी चीज़ें हैं, जो आपको अपने वर्क कॉन्ट्रैक्ट में ज़रूर देख लेनी चाहिए।

रोड़ कम्यूनिकेशंज़ के स्थापक राजीव बहादुर कुछ ऐसे आसान तरीकों के बारे में बात कर रहे हैं, जिससे वर्क कॉन्ट्रैक्ट को पढ़ना आसान हो जाएगा। साथ ही आप अपने काम के बारे में और कम्पनी में अपनी जगह और रोल के बारे में बेहतर तरीके से समझ पाएंगे।

रोड़ कम्यूनिकेशंज़ के स्थापक राजीव बहादुर कुछ ऐसे आसान तरीकों के बारे में बात कर रहे हैं

कभी कभी ऐसा होता है कि आपने कम्पनी से बात की और कॉन्ट्रैक्ट को काफी बार बदला गया। ऐसे में आपके ई-मेल में कई सारे कॉन्ट्रैक्ट्स हो सकते हैं, जबकि आपको उन सब में से एक को ही चुनना है। इस काम को आसान बनाने के लिए आप सबसे पहले पुराने कॉन्ट्रैक्ट्स को हटा दीजिये और जिस कॉन्ट्रैक्ट पर आपने और कम्पनी ने सहमती जताई थी, उसकी कॉपी बना लीजिये। इससे आपको गलत कॉन्ट्रैक्ट पढ़ने की ज़रुरत नहीं होगी।

एक बार आपके पास फाइनल कॉन्ट्रैक्ट आ गया, तो आप ये देखिये कि आपसे कम्पनी क्या उम्मीद करती है। इससे आप को समझ में आएगा कि हर रोज़ के काम में आपको क्या क्या करना है और कैसे। “ये ज़रूरी है कि आप इसे अच्छे से पढ़ लें क्योंकि इसमे आपकी सहमति होना भी बेहद ज़रुरी है। इसके बाद जो चीज़ ज़रुरी है, वह है आपकी तनख्वाह, जिससे आपको इसे लेकर कोई भी कोई शंका ना रहे। ये भी देखिये कि आपका कम्पनी के साथ काम का कॉन्ट्रैक्ट कब तक का है। आपको ये पता होना बहुत ही ज़रूरी है।”

एक बार आप ये सब देख लेते हैं, तो दुबारा अपने वर्क कॉन्ट्रैक्ट को ध्यान से पढ़िए, कहीं आपसे कुछ छूट ना गया हो। अगर आपको कुछ समझने में दिक्कत आ रही है, तो कम्पनी के एच.आर. से बात कीजिए और ठीक से समझिए।