ऐसा कितनी बार हुआ होगा कि आप सुब्ह अलार्म सुनकर बिस्तर से कूद कर निकलते हैं, और उसके बाद यूं ही भागते दौड़ते ऑफिस के लिए भी निकल पड़ते हैं? क्या शाम को जब आप वापस आते हैं तो ऐसा लगता है कि पूरा दिन थकान और इधर उधर ही निकल गया?

अगर आपका ऑफिस का हर रोज़ कुछ ऐसा ही दिखता है, तो हो सकता है इसकी वजह आपकी सुब्ह में छुपी हो।

हम में से ज़्यादातर लोगों को दफ्तर की सुब्ह कुछ ख़ास पसंद नहीं आती है, पर कैसा हो अगर हम आपको कहें कि आप अपना हर ऑफिस का दिन ज़्यादा बेहतर और प्रोडक्टिव बना सकते हैं, बस अपनी सुब्ह में थोड़ी तबदीली लाकर?

दिन की शुरुवात मुस्कुरा कर

anamika mishra
शुरुवात अच्छी तो दिन अच्छा

अनामिका मिश्रा एक ब्लॉगर हैं जिन्होनें ३ किताबें भी लिखी हैं। इतना सब करने के साथ ही उनके हर दिन में भाग दौड़ लगा ही रहता है। मैं दिन की शुरुवात संगीत से करती हूं। चाहे वो कोई भी संगीत हो, बस अगर मुझे अच्छा लगा तो उस वक़्त मेरे लिए वही सही है। इसके बाद मैं पौधों में पानी डालती हूं। जो भी आपको ख़ुशी दे ऐसे किसी काम से दिन की शुरुवात करें।

२ घंटे का समय रखें

बिस्तर से कूद कर जब आप निकलते हैं, तब हो सकता है आपको ठीक से खाने का मौका भी ना मिले। पर सुब्ह सुब्ह खुद के लिए थोड़ा वक़्त निकालने से आपका दिन वाकई अच्छा हो सकता है।

कोशिश कीजिये कि आप घर से निकलने के करीब २ घंटे पहले उठ जाएं। इससे आपको अपने लिए भी थोड़ा अलग वक़्त मिल जाएगा, अनामिका बताती हैं।

फोन को कर दीजिये दूर

आप शायद अभी हमारी बातें फोन पर ही पढ़ रहे हैं, और जबकि ये सच है कि हमें ये जानकर अच्छा लगेगा कि आप सुब्ह सुब्ह हमारी बातें पढ़ते हैं, हो सके तो ये थोड़ी देर बाद कीजिये,मसलन ऑफिस जाते वक़्त रास्ते में, या बाद में। सुब्ह जो आपको थोड़ा वक़्त मिलता है उसे कुछ और में लगाइये। अगर आप अभी फोन पर लग गए तो वक़्त कब निकल जायेगा आपको पता भी नहीं चलेगा।

दिन की शुरुवात एक अच्छी सी सुब्ह से हो तो आपका पूरा दिन अच्छा ही जाएगा।