आपकी प्रोफेशनल लाइफ में कई बार ऐसे मौके आते हैं, जिसमें आपको रिस्क लेने की ज़रूरत पड़ती है। कुछ लोग यह रिस्क नहीं लेते हैं ,जिसकी वजह से उनकी प्रगति में रूकावट हो सकती है। लेकिन वहीं कुछ लोग कैलकुलेटेड रिस्क लेते हैं, जिसकी वजह से उनके लिए आगे बढ़ने के रास्ते खुल जाते हैं। रिस्क लेने के लिए आप में हुनर की ज़रूरत होती है और यह हुनर मेहनत से ही आता है। जब आप अपने करियर में आगे बढ़ते हैं और किसी बड़ी कंपनी में जाते हैं, तो बॉस आपसे उम्मीद करते हैं कि आप काम में रिस्क लें और रिस्क लेना सीखें। अगर कोई रिस्क नहीं लेता, तो यह माना जाता है कि वह अपने पूरे पोटेंशियल के साथ काम नहीं कर रहा।इसलिए आज हम आपको बताएंगे कि रिस्क लेना आपके लिए कितना जरूरी है।

खुद लें इनिशिएटिव

एम्प्लोयी के लिए ज़रूरी है कि अपने काम के साथ एक्सपेरिमेंट करते रहे

कुछ लोग सिर्फ बॉस के बोलने पर ही काम करते हैं, जिसे स्पून फीड करना कहा जाता है ।यदि कोई आगे आकर काम मांगे या अपने काम में रिस्क लेकर कंपनी को फायदा पहुंचाए, तो ऐसे एम्प्लोयी को कंपनी हमेशा सराहना देती है। एम्प्लोयी के लिए ज़रूरी है कि अपने काम के साथ एक्सपेरिमेंट करते रहे, इससे उनके विचारों को दिशा मिलती है। आपके लिए बेहद ज़रूरी है कि इनिशिएटिव लें और आगे आकर काम संभालें।

रिजेक्शन को पॉज़िटिवली लें

मुंबई में सीनियर एचआर के पद पर कार्यरत शीतल पवार कहती हैं कि किसी एम्प्लोयी के विचारों को यदि अप्रूव ना किया जाए, तो वह डिमोटिवेट हो जाता है। यदि आपका कोई आईडिया अप्रूव नहीं किया गया है, तो इस रिजेक्शन के पीछे किसी ठोस वजह के होने की आशंका रहती है। इस बात से बुरा ना मानते हुए, उस वजह को जानना आपके लिए बेहद जरूरी है। इसे आपको एक चैलेंज की तरह लेना चाहिए और अपने आइडियाज़ के बल पर बॉस को फिर एक बार अप्रोच करना चाहिए। जब आप किसी रिजेक्शन को पॉज़िटिवली लेते हैं, तो आप दुगनी मेहनत से काम करते हैं और रिस्क लेने से नहीं कतराते हैं।

जूनियर्स को भी करें प्रोत्साहित

अपने दिमाग को खुला रखें और हर व्यक्ति के नज़रिए को समझते हुए उनके आईडियाज़ को सुनें

किसी भी काम को करने से पहले ज़रूरी है कि उस बारे में आप अच्छी तरह से सोच-विचार कर लें। जब आप बड़े लेवल पर काम कर रहे हों, तो जरूरी नहीं कि आपको सिर्फ सीनियर्स की ही बात सुननी है। हो सकता है कि आपके जूनियर्स के पास बेहतर आइडियाज़ हो, जिससे आप आगे बढ़ सकें। यदि आप टीम हैंडल कर रहे हैं, तो अपने दिमाग को खुला रखें और हर व्यक्ति के नज़रिए को समझते हुए उनके आईडियाज़ को सुनें।साथ ही अपनी टीम को रिस्क लेने के लिए और एक्सपेरिमेंट करने के लिए कहें। साथ ही इन आइडियाज़ और एक्सपेरिमेंट पर काम करें। बतौर सीनियर आपके लिए भी ये रिस्क की तरह ही है। यदि आप इसमें सफल होते हैं, तो आपके साथ-साथ आपकी टीम भी कॉन्फिडेंस महसूस करेगी।

ज़ाहिर है अपने काम में एक्सपेरिमेंट और रिस्क लेकर ही आप आगे बढ़ सकते हैं।