दफ़्तर के माहौल में अक्सर ऐसा हो ही सकता है कि आपके कुछ सहकर्मी आपसे उम्र में काफी बड़े हों, लेकिन अगर आप उनके बॉस हैं या अगर आप उनका काम देखते हैं, तो कई बार दिक्कत पैदा हो सकती है। ख़ास तौर पर अगर उन्हें ऐसा लगे कि आप ये जताने की कोशिश कर रहे हैं कि आपको उनसे ज़्यादा पता है।

अगर आपको दफ़्तर में ये दिक्कत आ चुकी है, या अगर आप नए दफ़्तर में जाने से पहले इसका हल ढूंढ रहे हैं, तो नीचे दी गई बातों से आपको थोड़ी मदद मिल सकती है।

  • उनकी बातों पर ध्यान दें, जिससे उन्हें ऐसा ना लगे कि आप उनको तवज्जो नहीं दे रहे हैं, या उनके काम की कद्र नहीं कर रहे हैं।
  • जहां ज़रुरत हो वहां उनकी सलाह भी ज़रूर लें क्योंकि इससे उन्हें लगेगा कि आप उन्हें काम में अहमियत दे रहे हैं।
  • अगर आपके सहकर्मी के पास एक ही काम को करने का कोई दूसरा तरीका है, तो कभी उनके तरीके को भी आज़मा कर देख लीजिए। हो सकता है कि आपको वैसा ही नतीजा मिले जैसा आप चाह रहे हैं।
अगर पेशेवर तरीक़े से समझाया जाए तो उम्र में बड़े सहकर्मियों को बुरा नहीं लगेगा

कुनाल एम्. शाह कास्ट इन टाइम में कास्टिंग डायरेक्टर हैं। वह बता रहे हैं कि कैसे वह ऐसे हालातों को संभालते हैं।

“कास्टिंग की दुनिया में मैं कई तरह के कलाकारों से मिलता रहता हूं। इनमें ऐसे कलाकार भी होते हैं, जो उम्र में मुझसे बड़े हैं या फिर जो अपने काम के दम पर सीनियर हैं। ऐसे में जब मैं उन्हें स्क्रीन टेस्ट के लिए बुलाता हूं, तो कई दफा वो मुझसे नाराज़ हो जाते हैं और आने के लिए साफ साफ मना कर देते हैं। ये एक ऐसा काम है जो मुझे काफी सोच समझ कर करना पड़ता है। इस बात का ध्यान रखना पड़ता है कि उनके आत्मसम्मान को ठेस ना पहुंचे। एक ऐसे ही एक्टर को मुझ पर गुस्सा आ गया और उन्हें लगा शायद मुझे उनकी काबिलियत पर शक है। मैंने उन्हें समझाया कि ऐसा बिल्कुल नहीं है और स्क्रीन टेस्ट के लिए सिर्फ उन्हें ही नहीं, बल्कि हर एक्टर को बुलाया जाता है। ज़ाहिर है कि अगर आप पेशेवर तरीके से लोगों को समझाएं, तो आपसे उम्र में बड़े सहकर्मी भी बिना बुरा माने आपकी बात को समझ सकते हैं।”

हो सकता है कि आपको काम के नए तौर तरीकों के बारे में इन सहकर्मियों से ज़्यादा पता है, लेकिन कभी कभार उनकी सोच और तरीकों को भी अहमियत दें, जिससे दफ़्तर में तालमेल बना रहे।