काम में तरक्की किसे पसंद नहीं और जब आपको लीडरशिप करने या बॉस बनने का मौका मिले तो कहने ही क्या! लेकिन बॉस बनना कोई आसान काम नहीं है। यह पोजीशन कई ज़िम्मेदारियां लेकर भी आती है। आज हम आपको बताते हैं कुछ ऐसी ही बातों के बारे में जो अगर आप पहली बार बॉस बने हैं तो आपको ध्यान रखनी चाहिए।

सीखने की ललक रखिये: एचआर मैनेजर प्रीति चौहान के मुताबिक, कई बार हमें लगता है कि बॉस बन गए तो हमें कुछ सीखने की जरुरत नहीं,हमने सब सीख लिया और अब हम सीनियर बन चुके हैं लेकिन यह सबसे बड़ी गलती है और आप ऐसा न करें तो बेहतर है। आप प्रमोट होकर बॉस की पोजीशन पर आएं हैं तो आपको कम्पनी के हर पहलू को जानना ज़रुरी है। पहले आप एक टास्क में रहकर अपना बेस्ट देते थे लेकिन बॉस बनने के बाद आपको कम्पनी की हर छोटी बड़ी जानकारी होना ज़रुरी है क्योंकि आपकी टीम में कई जॉब प्रोफाइल के लोग काम करेंगे। इसलिए इस ज़िम्मेदारी को संभालने से पहले स्टडी कर लें ताकि कोई कन्फ्यूज़न न रहे। साथ ही अपने टीम मेंबर्स के बारे में जानकारी जुटा लें। उनकी पर्सनल फाइल्स,रिज्यूम,परफॉरमेंस रिव्यूज और कम्पनी को लेकर उनके गोल्स की जानकारी भी रखना आपके काम को आसान बनाएगा। समय निकालकर उनसे छोटी-छोटी मीटिंग कर उन्हें जानें और उनसे जुड़ें। इसके अलावा कई कम्पनियां सुपरवाइजर ट्रेनिंग भी देती हैं। मौका मिले तो उसमें हिस्सा लेना ना भूलें क्योंकि इससे आपको कॉन्फिडेंस के साथ शुरुआत करने में मदद मिलेगी।

इन बातों को ध्यान रखेंगे तो अच्छे बॉस बनेंगे


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मेंटर बनाएं तो मिलेगी मदद

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बॉस बनने के बाद कई सारी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। कौन सा टीम मेंबर परफॉर्म नहीं कर रहा?कौन ओवर परफॉर्म कर रहा है?अगर रेवेन्यू कम आ रहे हैं तो क्या कदम उठाने हैं,प्रोबेशन पीरियड के बाद किसे टीम में रखना है और किसे नहीं,ऐसे कई सारे महत्त्वपूर्ण काम आपको हर दिन निपटाने होते हैं,नए बॉस बनने पर कुछ समय तक यह काम आपको चुनौती ॉपूर्ण लग सकते हैं लेकिन ऐसे में कोई ऐसा व्यक्ति मददगार हो सकता है जो पहले से ही बॉस की भूमिका में हो या यह ज़िम्मेदारी निभाता आया हो। उसे अपना मेंटर बना लीजिये,इसमें आप अपने बॉस की भी मदद ले सकते हैं लेकिन वो हेल्पफुल न हो तो आप किसी और व्यक्ति की मदद ले सकते हैं जो यह काम करने में माहिर हो।

कई बार बॉस की भूमिका में आते ही लोग बोल्ड डिसीजन लेकर यह दिखाना चाहते हैं कि वो इंचार्ज बन चुके हैं और उन्हें अपने काम का आइडिया हो गया है लेकिन यह एक गलत फैसला है। किसी भी परिस्थिति को जांचें-परखे बिना,ऐसा कोई फैसला ना लें जिससे बाद में आपकी छवि ख़राब हो। इसके अलावा एक टीम को साथ लेकर चलने के लिए सबसे ज़रुरी है कि आप कम्युनिकेशन ओपन रखें। ऐसा न हो कि जो आपने कह दिया कर्मचारी बस आंख बंद करके उसे ही फॉलो करने लग जाएं। उन्हें भी अपनी बात रखने का स्पेस दीजिए,उन्हें भी सुनिए और फिर कम्पनी के हित के लिए मिल-जुलकर फैसला लीजिये। इससे टीम मेंबर्स का आप में विश्वास पैदा होगा और छवि भी अच्छी बनेगी।

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