आप में से ज़्यादातर लोग अपने करियर को ही अपनी पहचान बना लेते हैं। जबकि सच्चाई यह है कि आपकी पहचान आपकी नौकरी से कई बढ़कर है। नौकरी आपकी ज़िन्दगी का बस एक छोटा सा हिस्सा है। असल में जब आपकी नौकरी आपकी पहचान बन जाती है, तो ज़िन्दगी ज़्यादा मुश्किल हो जाती है। आपकी वर्क लाइफ और पर्सनल लाइफ के बीच का संतुलन बिगड़ जाता है। आपको अपनी सभी सफलताओं और असफलताओं से ज़रुरत से ज्यादा फर्क पड़ने लगता है। इसलिए यह बहुत ज़रूरी है कि अपनी नौकरी को अपने आप से पूरी तरह से ना जोड़ें और यह समझें आपकी नौकरी करने का मतलब यह नहीं है कि वह नौकरी आपकी पहचान बन जाएगी।

नौकरी में आपका योगदान आपकी कंपनी के लिए होता है उपयोगी

आज आप एक नौकरी कर रहे हैं, कल दूसरी करेंगे और फिर तीसरी। अब क्या इसका मतलब यह है कि हर बदलती नौकरी के साथ आपकी पहचान भी बदल रही है?

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आप जिस काम को अपनी पहचान बनाने की गलती करते हैं, वह काम असल में सबसे ज़्यादा आपकी कंपनी के लिए उपयोगी होता है। आप जो काम करते हैं, उससे कई लोगों की उम्मीदें और कई इनाम जुड़े होते हैं। अब आपका उन उम्मीदों पर तो कोई नियंत्रण नहीं है, क्योंकि उन उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए ही आपको वेतन दिया जाता है। लेकिन क्या निजी जीवन में आप ऐसा करते हैं? तो फिर आप इसे अपनी पहचान क्यों बनाते हैं। ध्यान रहें कि नौकरी आपके लिए सिर्फ पैसे कमाने का एक ज़रिया है और कुछ भी नहीं।

जीवन में सफलता पाने का रास्ता केवल करियर नहीं है

जीवन में एक अच्छी और फायदेमंद नौकरी मिलना किसी सफलता से कम नहीं होता है। लेकिन यह आपके जीवन की इकलौती सफलता नहीं है। आपको समझना चाहिए कि सफलता का मतलब ज़्यादा पैसे कमाना या कंपनी में किसी ऊंचे पद पर काम करना नहीं होता है। सफलता का मतलब एक सुखी और संतोषजनक जीवन जीने में है। सफलता का सही अर्थ है कि आप जीवन में कुछ ऐसा करें जिसमे आपको सबसे ज़्यादा ख़ुशी मिलती है और जिसमें आपका प्रदर्शन सबसे अच्छा हो सकता है। अब हर व्यक्ति के लिए सफलता के मायने अलग होते हैं। लेकिन इतना याद रखें कि सिर्फ एक अच्छी जॉब होने का मतलब सफल होना नहीं होता है।

आपकी पहचान क्या है?

जीवन में इस सवाल का उत्तर देना बहुत ज़रूरी होता है।

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आपने इस लेख में बार-बार पढ़ा होगा कि केवल आपकी नौकरी आपकी पहचान नहीं होती है। लेकिन यह समझना भी ज़रूरी है कि अगर आपका काम सिर्फ आपके जीवन का एक हिस्सा है, तो आपकी असली पहचान आखिर क्या है। सच्चाई तो यह है कि बहुत सी चीज़ें एक साथ मिलकर एक व्यक्ति की पहचान बनाती है। जैसे आपके मूल्यों, सिद्धांतों, दूसरों के प्रति आपकी दया, प्रेम और आपके जूनून जैसी चीज़ों के आधार पर आपकी पहचान बनती है। हमेशा याद रखें कि लोग आपको कभी भी इस बात के लिए याद नहीं रखेंगे कि आपने कहां काम किया था या आपने कितने पैसे कमाए हैं, मगर इस बात के लिए याद करेंगे कि आप किस प्रकार के व्यक्ति हैं।

हमे आशा है कि अब आप जान गए होंगे कि आपकी पहचान आपकी नौकरी से कई ज़्यादा बढ़कर है।