‘मंजिल मिले न मिले, अपना तो सफर जन्नत है यारो…’ इसी तर्ज पर चलते हुए लाखों लोग दुनिया के कोने-कोने में घूम रहे हैं, हर पल कुछ नया अनुभव करते हुए। कभी हम काम के सिलसिले मेंघूमते है तो कभी खुद घूमने जाना पसंद करते है और ऐसे में हम जहां भी जाए हमें बस , ट्रैन और हवाईजहाज जैसी ही यातायात का साधन का ही सहारा लेना पड़ता है। हमारी यात्रा हमेशा सुखमय हो जाती है जब हमारे साथ यात्रा करने वाले सहयात्री यानि फेलो ट्रैवलर अच्छे हो। लेकिन यही यात्रा दुखमय भी बदल जाती है, जब आपको कोई इरिटेटिंग फेलो ट्रैवलर मिल जाए। अक्सर यात्रा के दौरान कोई ऐसा मिल ही जाता है जो आपको अकेला देख आपसे दोस्ती करने और जानपहचान करने की कोशिश करते है। जानपहचान तक तो ठीक है लेकिन यही फेलो ट्रैवलर जब आपको इर्रिटेट करने लगे तब क्या करेंगे आप। इन्ही अहम बातों को बता रहे है जाने माने पत्रकार जीतेन्द्र दीक्षित।

कुछ हद तक मेलमिलाप करना अच्छा होता है

अकेले घूमने जाने से पहले इंटरनेट या गाइड बुक्स की मदद से खूब जानकारी इकट्ठी करें।

जीतेन्द्र दीक्षित एक पत्रकार है उन्हें अपनी स्टोरी के लिए कई बार अकेले एक शहर से दूसरे शहर घूमना पड़ता है। जीतेन्द्र सिर्फ काम के सिलसिले में ही नहीं घूमते। उन्हें जब भी वक़्त मिलता है वो अकेले घूमने निकल जाते हैं। जीतेन्द्र को लोग जानते हैं इस लिए जब भी वो ट्रैन या हवाई जहाज से ट्रैवल करते हैं तो कई लोग उनसे मिलने, जानपहचान करने की कोशिश करते रहते हैं। जीतेन्द्र कहते हैं कि ” मैं जब भी ट्रैन या फ्लाइट में ट्रैवल करता हूं, तो मेरे आस पास बैठे लोग मुझे पहचान जाते हैं और मुझसे मेरे द्वारा की गई स्टोरी के बारे में बात करते हैं। कई लोगों को मीडिया में बहुत इंटरेस्ट भी होता है और जिसके चलते वो मुझसे कई तरह के सवाल पूछते रहते है। मुझे उनके सभी सवालों के जवाब देने में बहुत आनंद आता है। कई लोग तो मुझे मेरी स्टोरी के लिए बहुत सुझाव भी देते हैं। और तो और कई लोग मुझे ऐसी कई जानकारी देते है, जो शायद मुझे गूगल से भी ना मिले। इस लिए मैं ट्रैवलिंग करते वक़्त अपने फेलो ट्रैवलर से खूब बात करता हूं। जान पहचान बढ़ाता हूं ऐसा करने से मुझे और मेरी स्टोरी को बहुत मदद मिल जाती है।”

उनसे बहस करने से बचे

ट्रैवलिंग करने के जहां अपने मज़े है वही इसके कुछ नुक्सान भी है। जीतेन्द्र कहते हैं ,”कभी कभी ट्रैन में मेरे साथ ट्रैवल करने वाले फेलो ट्रैवलर मुझे ऐसे मिल जाते है जो बात करते करते बहस करने लगते है और अक्सर ये बहस शुरू होती है तब जब आप सामने वाले की बात से सहमत ना हो। मेरे साथ अक्सर ऐसा ही हुआ है। कई लोग अपनी बात मनवाने के लिए घंटो आपसे ज़बरदस्ती बात करते रहेंगे। ऐसे में आप उनकी बातों को नज़रअंदाज़ भी नहीं कर सकते हैं। मैं ऐसी बहसवाद से बचने के लिए उनकी बातों में हां में हां मिलता हूं। जिसका नतीजा ये होता है कि सामने वाला जल्दी चुप हो जाता और आपका समय भी बच जाता है।

ऐसे समय में ईमेल और बाकि काम करें

हमेशा अलर्ट रहना बहुत ज़रूरी है, वरना आप मुसीबत में भी फंस सकते हैं।

आप जब फेलो ट्रैवलर के साथ ट्रैवल करते हैं , तो कभी कभार आपको ऐसे बातूनी लोग भी मिल जाते है, जो थोड़ी देर के लिए भी चुप बैठना पसंद नहीं करते। खास कर की फ्लाइट और ट्रैन में जहां आपके पास और कोई ऑप्शन नहीं होता और आपको ऐसे लोगों को झेलना ही पड़ता है। तब मेरी कोशिश रहती हैं उन्हें नज़रअंदाज़ करने की। उसके लिए मैं अपने मोबाइल को देखना शुरू कर देता हूं। ऐसे कई मेल होते है जो आपने पढ़े नहीं होते हैं ऐसे समय पर में उन मेल को देखना और उनको रिप्लाई करना शुरू करता हूं। ऐसा करते वक़्त सामने वाला समझ जाता हैं कि ये अभी काफी वियस्त है और इसे मेरी बातें सुनने में कोई इंटरेस्ट नहीं है।

फ़ोन को फ्लाइट मोड़ रख बात करने का नाटक करें

तीसरी अहम बात जो मैं अपने फेलो ट्रैवलर पर ज़रूर अपनाता हूं और आपको भी यही कहूंगा की अगर आप भी मेरी तरह किसी ऐसी जगह फंस जाए जहां आप अकेले हो और आपके आस पास कई लोग हैं जो आपके बारे में जानना चाहते हैं और आप के ना चाहते हुए भी आपसे ज़बरदस्ती की दोस्ती करना चाहते है। मुझे बार बार इरिटेट करते हैं ये कह कर की मेरी स्टोरी आप छापिए। ऐसा कहकर मुझे बहुत परेशान भी करते हैं लोग। अगर आपको भी ऐसे लोग मिल जाए और आप उनके बीच उठना बैठना नहीं चाहते, तो आप भी मेरी तरह अपने फ़ोन को फ्लाइट मोड़ में रख फ़ोन पर बात करने का नाटक कर सकते हैं। फ़ोन पर बात करते हुए उन लोगों के बीच से बहार आ सकते हैं।

फ़ोन पर सुने गाने

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ट्रैन में ट्रैवल करते वक़्त आप अपना फ़ोन अच्छे से चार्ज कर रखें।

सुनीता त्रिपाठी को भी जिंतेंद्र दीक्षित की तरह घूमना पसंद है और वो भी जब ट्रैवलिंग करती हैं, तो जीतेन्द्र की तरह ही इर्रिटेट करने वाले लोगों को नज़र अंदाज़ करती हैं।सुनीता कहती हैं कि ” मैं जब ट्रैन और फ्लाइट से ट्रैवल करती हूं तो कभी कभी मुझे ऐसे फॉलो ट्रैवल मिल जाते हैं जिनके बच्चे बहुत शोर शराबा करते हैं। उनकी बदमाशियां देख हम उन्हें डाट भी नहीं सकते। ऐसे में मेरी कोशिश रहती है कि मैं अपने मोबाइल में ईयर फ़ोन लगाकर अपने मनपसंद गाने सुनूं। ऐसा करने से मुझे उनकी आवाज़ सुनाई नहीं देती और मैं मज़े से अपने मनपसंद गानों का आनंद लेती हूं।

ये थी वो टिप्स जो आपको इर्रिटेट लोगों से बचाने में मदद करेगी। अगली बार अगर आपको मिल जाए ऐसे फेलो ट्रैवलर तो परेशान ना हो आप उनपर वो सभी तकनीक अपना सकते हैं जो आपको हमने बताई है। हमें उम्मीद हैं कि इन सुझावों से आप इर्रिटेट करने वालों से आसानी से छुटकारा पा सकेंगे।

पहचान छोटी ही सही लेकिन अपनी खुद की होनी चाहिए। इसी सोच के साथ जीती हूँ।अपने सपनों को साकार करने की हिम्मत रखती हूं और ज़िन्दगी का स्वागत बड़े ही खुले दिल से करती हूँ। बाते और खाने की शौकीन हूँ । मेरी इस एनर्जी को चार्ज करती है, मेरे नन्ने बच्चे की खिलखिलाती मुस्कुराहट।