“सेल्फी ”, एक ऐसा फीवर जो आज के दौर में हर किसी पर छाया हुआ है।अगर हम कही घूमने जाते है, तो दोस्तों के साथ अपनी सेल्फी क्लिक कर सोशल मीडिया पर पोस्ट करना नहीं भूलते। अगर आप प्लान बना रहे है कही बाहर देश घूमने का, जहां आपको स्कूबा ड्राइविंग और ऊचाई का भी आनंद लेने का मौका मिलेगा, तो सेल्फी लेने से पहले ध्यान रखें कुछ अहम बातों का।

दुनिया भर में शायद ही कोई मोबाइल फोन यूज़र होगा, जिसने सेल्फी का नाम ना सुना हो, युवा तो सेल्फी के पीछे पागल हैं, ये ऐसा दौर है जब सेल्फी के लिये स्‍पेशल कैमरा फोन बनाये जा रहे हैं, तो क्‍या आप जानना नहीं चाहेगें कि ये सेल्फी शब्‍द अचानक से कहां से आया ?

सेल्फी का अर्थ

दुनिया की पहली सेल्फी सन 1850 के दशक की है।

सेल्फी का अर्थ है एक ऐसी तस्‍वीर जो आपने, अपने कैमरे, स्‍मार्टफोन या वेबकैम से खुद ही खींची हो,लेकिन आज सोशल मीडिया पर खुद की खींची तस्वीर को अपलोड और शेयर करने का चलन ‘सेल्फी ‘ नाम से जाना जाने लगा है।

आत्म निर्भर बनाता है ये सेल्फी

सेल्फी की वजह से चेहरे की अच्छी कसरत हो जाती है।

आजकल सेल्फी लेना लोगों की पहली पसंद है, लेकिन शायद ही किसी ने ध्यान दिया होगा कि सेल्फी आपको बनाता है आत्म निर्भर। जो लोग तस्वीरों के लिए दूसरों का मुंह ताकते रहते हैं, उनके लिए सेल्फी वरदान बनकर आया है। अब जहां मन किया, फोन उठाया और सेल्फी ले ली। खुद की तस्वीर लेकर लोगों का सेल्फ कॉन्फिडेंस बढ़ता है।

सेल्फी के फायदे

पहली सेल्फी स्वीडिश आर्ट फोटोग्राफर ऑस्कर गुस्तेव रेजलेंडर अपनी कैमरे से खींची थी।

अगर आप सोलो ट्रवेलेर है और कही घूमने जा रहे है और आप चाहते है कि आप अपने खूबसूरत अनुभव को अपने फोन में कैद कर सके, तो आप ले सकते है अपनी सेल्फी और इसके लिये आपको किसी और की कोई ज़रूरत नहीं होगी। आप खुद ही अपना फोटो खींच सकते हैं।

आप पहाड़ों में घूमने गए हो और आप वहां सेल्फी लेते हैं, तो आप उस समय तस्‍वीर की गुणवत्‍ता काे ठीक कर सकते हैं, आप कैसे दिख रहे है आपके पीछे का बैकग्राउंड कैसा है खुद देख सकते हैं।

आप अगर ग्रुप फोटो खींच रहें हैं, तो आप भी उसमें शामिल हो सकते हैं। अक्सर पहले तस्‍वीर खींचने वाला व्‍यक्ति फोटो से गायब रहता था।

आप फोटो के साथ कोई भी फिल्‍टर बड़े आराम से जोड़ सकते है।

खतरनाक जगह पर जाना मृत्यु को निमंत्रण

70 लाख में पहली सेल्फी की हुई थी नीलामी

कई लोगों के जीवन में ऐसा भी समय आया है जब वो अपने दोस्तों के साथ घूमने गए हो और उन्हें सेल्फी का ये शौक काफी भारी पड़ा हो। सेल्फी के चक्कर में तो कई लोगों को अपनी जान भी गंवानी पड़ी। एक न्यूज चैनल नें एक शो कर दावा किया था कि साल 2014 से सितंबर 2016 के बीच दुनिया भर में सेल्फी लेने के दौरान 127 लोगों ने जान गंवाई, जिनमें से लगभग 60% यानि 76 मौतें भारत में हुई हैं, ये आंकड़ा चौंकाने वाला है।

मानसिक रूप से बीमार बनाता है

ज़्यादा सेल्फी लेने का शौक। कई सारी मनोवैज्ञानिक बीमारियों को जन्‍म दे रही है।

सेल्फी की आदत आपको मानसिक रूप से बीमार भी कर सकती है। यह सुनने में थोड़ा अजीब ज़रूर है, लेकिन यह एकदम सच है। एक सर्वे के अनुसार अस्पतालों में सेल्फीसाइड के जिन मरीज़ों का इलाज़ किया गया, वो सब ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर से ही पीड़ित थे । ये मरीज़ सोशल मीडिया पर बार बार अपनी सेल्फी अपलोड करते थे और फिर उस पर आने वाले लाइक्स का इंतज़ार करने लगते थे । अगर किसी ने सेल्फी लाइक नहींं की या कुछ अच्छा कमेंट नहीं किया तो इन्हें बुरा लगता और फिर से नयी सेल्फी अपलोड कर देते। ऐसा दिन में एक दो बार हो तो कोई बात नहीं पर एक दिन में 50 – 100 सेल्फी लेना मानसिक बीमारी को दर्शाता है।

सेल्फी लेते वक़्त इन बातों का रखें ध्यान

चेहरे पर हल्का मेकअप होना बेहद ज़रूरी है सेल्फी के लिए

आप अपने दोस्तों के साथ घूमने जाए तो हमेशा याद रखे एक अच्छी सेल्फी लेने के लिए सिर्फ अच्छा कैमरा ही काफी नहीं है। परफेक्ट लाइटिंग, परफेक्ट लोकेशन और सही एंगल के साथ चाहिए परफेक्ट मेकअप भी। यूं तो अच्छी सेल्फी के लिए कई सारे ऐप्स भी आ चुके हैं, लेकिन कुछ लोग ही ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं। अगर आप बिना ऐप के ही अच्छी सेल्फी लेना चाहती हैं, तो लाइटिंग, लोकेशन और एंगल के साथ मेकअप पर भी ध्यान दें। दूसरी अहम बात जो सभी को ध्यान रखनी चाहिए कि खतरनाक जगहों पर सेल्फी लेने से बचे। ऐसी कोई भी जगह जहां जान का खतरा हो वहां भूल कर भी अपने बैग से मोबाईल ना निकाले।

घूमने जाए और सेल्फी ना निकाले ये कैसे हो सकता है,लेकिन सेल्फी को अपना शौक बनाए आदत नहीं। कोई भी चीज़ हद से ज़्यादा खतरनाक हो सकती हैं, फिर वो चाहे सेल्फी ही क्यों ना हो।

पहचान छोटी ही सही लेकिन अपनी खुद की होनी चाहिए। इसी सोच के साथ जीती हूँ।अपने सपनों को साकार करने की हिम्मत रखती हूं और ज़िन्दगी का स्वागत बड़े ही खुले दिल से करती हूँ। बाते और खाने की शौकीन हूँ । मेरी इस एनर्जी को चार्ज करती है, मेरे नन्ने बच्चे की खिलखिलाती मुस्कुराहट।