हाल ही में बॉलीवुड में लैला-मजनू पर एक फिल्म बनाई गई थी। डायरेक्टर इम्तियाज अली के भाई साजिद अली के निर्देशन में बनी यह फिल्म लोगों को बेहद पसंद आ रही है। लेकिन इसकी स्टोरी की सच्चाई बेहद कम लोग जानते हैं। लैला मजनू जिन्हें प्यार की मूरत माना जाता है, उनकी असली कब्र श्रीगंगानगर में है। हर साल 15 जून को लैला मजनू की याद में अनूपगढ़ जो राजस्थान में स्थित है, इसके बिंजौर गांव में सालाना मेला लगता है। पूरे देश के हजारों प्रेमी जोड़े यहां का चादर चढ़ाते हैं और मन्नतें मांगते हैं।

देश के हजारों प्रेमी जोड़े यहां का चादर चढ़ाते हैं

कैसे हुई इस मेले की शुरुआत?

भारत पाक सीमा पर बसे बिंजौर गांव में इसकी शुरुआत हुई। लैला मजनू का इस गांव से रिश्ता क्या था, दोनों की मज़ार कैसे बनी, लैला मजनू हिंदुस्तान कैसे आए, इसके पीछे भी कई कहानियां हैं। बिंजौर गांव के निवासियों की माने तो पाकिस्तान में जन्मे लैला मजनू अंतिम समय में अनूपगढ़ के गांव में आए थे। लैला के भाई दोनों को मारने के लिए उनके पीछे पड़े हुए थे। दोनों छिपते-छिपाते पानी की तलाश में यहां पहुंचे और दोनों की ही प्यास की वजह से मौत हो गई। दोनों को एक साथ दफना दिया गया।

इस प्रेम कहानी का राज़ आजादी के बाद खुला, जिसके बाद 1960 से यहां पर मेला लगने लगा। आपको जानकर हैरानी होगी कि राजस्थान के इस गांव में हिंदू मुसलमान दोनों ही अपनी-अपनी आस्था से लैला मजनू को पूजते हैं। दोनों समुदाय के लोग यहां आकर सिर झुकाते हैं और मन्नत मानकर धागा बांधते हैं। गौर करने वाली बात यह है कि दोनों समुदायों ने यहां का नाम अलग रखा हुआ है। मुस्लिम इससे लैला मजनू की मजार कहते हैं, तो हिंदू लैला मजनू की समाधि कह कर पूजते हैं।

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बीएसएफ की चौकी ने भी लैला मजनू को इज्जत बक्शी है

5 दिन के इस मेले में राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार समेत कई राज्यों से प्रेमी जोड़े यहां आकर मन्नत मांगते हैं। आपको जानकर यकीन नहीं होगा कि अनूपगढ़ जो पाकिस्तान बॉर्डर पर आता है, यहां बीएसएफ की चौकी ने भी लैला मजनू को इज्जत बक्शी है।

पहले इस गांव में बीएसएफ की सीमा चौकी का नाम लैला मजनू था। बाद में इसे बदलकर मजनू कर दिया गया। पहले यहां पाकिस्तान से बड़ी संख्या में प्रेमी आया करते थे, लेकिन बाद में भारत-पाक के बीच बड़े मतभेद की वजह से यहां तारबंदी कर दी गई और वहां से प्रेमियों का आना इस मजार पर रुक गया।

यदि आप भी राजस्थान जाएं, तो प्रेमियों की इस मजार पर माथा टेक सकते हैं।