बोमडिला और तवांग की पहाड़ियों के बीचों-बीच, यह सफ़ेद किला ऊंचे पत्थरों की चट्टान पर स्थित है। डायरिंग डिज़ोंग नामक यह किला 17वीं शताब्दी में पड़ोसी राज्यों के आक्रमणों से बचने के लिए बनाया गया था। वियतनाम युद्ध के दौरान, इसका उपयोग एक जेल के रूप में किया गया था। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान इस किले का उपयोग शेल्टर के रूप में यानी लोगों को आश्रय देने के लिए किया गया था।

अब यहां मोनपा आदिवासी अपने अनोखे तरीकों और रीति-रिवाज़ों का पालन करते हुए रहते हैं। इन आदिवासियों के साथ कुछ वियतनामी लोग भी यहां रहते हैं। यहां के घर ईंट से बने हुए हैं और इन घर की खिड़कियां, दरवाज़े और खम्भे लकड़ियों से बने हुए हैं। हिमालय की ठंड और सर्दी में आराम से रहने के लिए इसी प्रकार के घर बनाए जाते हैं। किले के पास स्थित ये खूबसूरत घर इस किले की शोभा बढ़ाते हैं।

मोनपा ट्राइब के अनोखे घर, डिज़ोंग की शोभा बढ़ाते हैं।
मोनपा ट्राइब के अनोखे घर, डिज़ोंग की शोभा बढ़ाते हैं।

यहां के कुछ घर 500 साल से भी ज़्यादा पुराने हैं। डिज़ोंग किले का आर्किटेक्चर बौद्ध राज्य के आर्किटेक्चर से प्रेरित होकर बनाया गया था। हालांकि यह किला अब एक खंडहर में बदल चुका है, लेकिन इस खंडहर को देखकर भी आपको उस पुराने शानदार आर्किटेक्चर की याद आती है।

यह किला एक पहाड़ी पर स्थित है जो गढ़वाली पत्थर की पट्टियों पर टिका हुआ है। किले का दरवाज़ा लकड़ियों से बना है और इस पर खूबसूरत स्थानीय आर्किटेक्चर किया गया है।

दीरंग मठ इस क्षेत्र का सबसे सुन्दर स्थल है
दीरंग मठ इस क्षेत्र का सबसे सुन्दर स्थल है

किले के चारों ओर हरी-भरी पहाड़ियों है, जहां आप हाइकिंग के लिए जा सकते हैं। एक तरफ खूबसूरत झरना भी है। यह झरना अपनी रोगनिवारक शक्तियों और भारी मात्रा में सल्फर होने के कारण जाना जाता है।

इस क्षेत्र की दूसरी आकर्षक जगह है संगति घाटी। यह घाटी पूर्वी हिमालयी पहाड़ियों पर स्थित है और हरे-भरे इलाकों, घने जंगलों और नदियों से घिरी हुई है। नवंबर और दिसंबर के महीनों में हर साल इस घाटी पर चाइना से काली गर्दन वाले सारस उड़कर आते हैं। ये माइग्रेटरी बर्ड्स होते हैं, जो अप्रैल और मई तक यहां रहते हैं और फिर वापस चले जाते हैं। संगति घाटी के लोग इन पक्षियों को ‘तुंग तुंग का उक’ बुलाते हैं।

संगति घाटी में आप एक रोमांचक हाईकिंग का आनंद ले सकते हैं
संगति घाटी में आप एक रोमांचक हाईकिंग का आनंद ले सकते हैं

यदि आप कभी डिज़ोंग आएं, तो एक दिन निकालकर कालचक्र गोम्पा ज़रूर जाएं। यह मठ 500 साल से भी ज़्यादा पुराना है। यहां पर बौद्ध धर्म के लोग अक्सर आते हैं। साथ ही, वे लोग भी यहां आते हैं जिन्हे शांत वातावरण में समय बिताना अच्छा लगता है।

डिज़ोंग तक पहुंचने के लिए आपको बाय रोड ही निकलना चाहिए। डिज़ोंग से 43 किलोमीटर की दूरी पर बोमडिला है, जहां से आप एक गाड़ी किराए पर ले सकते हैं। 200 किलोमीटर दूर स्थित तेज़पुर एयरपोर्ट यहां का सबसे नज़दीकी एयरपोर्ट है।

तो अब आप भी डिज़ोंग में मोनपा ट्राइब के बीच एक शानदार और अनोखी छुट्टी मनाने के लिए तैयार हो जाएं।