हिंदू और मुसलमान दोनों ही अलग अलग तरह से ऊपरवाले को याद करते हैं। जहां हिंदू मंदिर में मूर्ति पूजन को मानते हैं, वहीं मुसलमान कलमा पढ़ते हैं। लेकिन हमारे भारत में अनेकता में एकता के कई ऐसे उदाहरण हैं, जिसे देखकर आप हैरान हो जाएंगे। आज हम आपको भारत के एक ऐसे गांव के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां हिंदू और मुस्लिम दोनों ही एक ही देवी की पूजा करते हैं। यह हिंदू-मुसलमान एकता की मिसाल की तरह लोगों के सामने खड़ा हुआ है। भारत से सटे बांग्लादेश की सीमा पर गंगा का डेल्टा भाग बना हुआ है। इस जगह को सुंदरवन का नाम दिया गया है।

कैसी है ये जगह?

रॉयल बंगाल टाइगर की, जो इन घने जंगलों में फल फूल रहे हैं

यह एक ऐसा दलदली जंगल है, जो दुनिया में कई अजीबोगरीब जगह में शामिल है। यह जगह बेहद ही खूबसूरत है। 10 हज़ार वर्ग किलोमीटर में फैले हुए सुंदरवन में सैकड़ों छोटे-छोटे द्वीप हैं, जहां अलग-अलग तरह के जंगली जानवर रहते हैं। यह जगह कई प्रवासी और अप्रवासी पक्षियों का भी घरौंदा है और वही सांपों की कई प्रजातियां भी यहां आपको मिल जाती है। लेकिन एक ऐसा जीव यहां रहता है, जो आज भी हमारे देश की शान माना जाता है। हम बात कर रहे हैं रॉयल बंगाल टाइगर की, जो इन घने जंगलों में फल फूल रहे हैं। इस इलाके में रहनेवालों को हमेशा डर बना रहता है कि यह बंगाल टाइगर उनकी जान ले लेंगे। इस इलाके में 35 लाख लोग अपने परिवार के साथ रहते हैं, जो जंगलों से सामान जुटाने के साथ-साथ मछली का उद्योग भी करते हैं।

सरकारी आंकड़ों की माने तो हर साल 60 से भी ज्यादा लोग रॉयल बंगाल टाइगर के शिकार बनते हैं, लेकिन इन सभी ख़तरों के बावजूद यहां लोग किसके आश्रय रहते हैं, यह जानना आपके लिए बेहद जरूरी है। हम बात कर रहे हैं सुंदरवन की देवी वनबीबी की। इस देवी को सुंदरवन की संरक्षिका कहा जाता है। यही वजह है कि हिंदू और मुसलमान दोनों ही वनबीबी के सामने अपना माथा टेकते हैं।

क्यों होती है वनबीबी की पूजा?

यहां के लोगों का मानना है की वनबीबी जानवरों से उनकी हिफ़ाज़त करती है

जैसा कि आप जानते हैं मुसलमान बुतपरस्ती के बिल्कुल खिलाफ होते हैं, इसके बाद भी अपने परिवार और घर को चलाने के लिए वे वनबीबी पर पूरा भरोसा करते हैं। यहां तक कि सुंदरवन में होने वाले कई धार्मिक कार्यक्रमों, पूजा पाठ में भी मुसलमानों को हिस्सा बनाया जाता है और मुसलमान पूरी श्रद्धा के साथ इन धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हैं। यहां के लोगों का मानना है की वनबीबी जानवरों से उनकी हिफ़ाज़त करती है और उन्हें यह सीख देती है की जंगल से उनकी सारी ज़रूरतें पूरी होगी लेकिन उन्हें लालच नहीं करना चाहिए। बाघ का डर होने पर दोनों ही समुदाय एक दूसरे का साथ निभाते हैं और इन बाघों को गांव से पकड़ कर वन विभाग की मदद से वापस जंगल में छोड़ दिया जाता है।

बाघों से बचने के लिए अपनाते हैं एक ख़ास ट्रिक

इस इलाके में 35 लाख लोग अपने परिवार के साथ रहते हैं

आपको जानकर हैरानी होगी कि बाघ से बचने के लिए यहां के लोग एक खास तरह की ट्रिक का इस्तेमाल करते हैं। क्योंकि बाघ बेहद अक्लमंद जानवर होता है, इसीलिए वह हमेशा शिकार के पीछे से हमला करता है। यही वजह है कि यहां के लोग सिर के पीछे मुखौटा पहनते हैं, जिससे बाघ यह ना पहचान पाए कि इंसान सीधा खड़ा है या उल्टा। क्योंकि दोनों समुदाय एक साथ मिलकर जंगलों से अपने रोज़गार के लिए चीज़ें लेते हैं और इसके लिए वनबीबी को धन्यवाद देते हैं, इसीलिए बाघ इन पर हमला नहीं करता। यही वजह है कि वह जंगल से इकट्ठा की हुई चीजों को सबसे पहले वनबीबी को चढ़ाया जाता है।

इस तरह इस गांव के हिन्दू और मुस्लिम लोग वनबीबी की शरण में आकर अपना जीवन व्यतीत करते हैं।

मेरी आवाज़ ही पहचान है! संगीत मेरी कल्पना को पंख देता है.. किताबी कीड़ा, अडिग, जिद्दी, मां की दुलारी.. प्राणी प्रेम ऐसा कि लोग मुझे लगभग पागल समझते हैं! खाने के लिए जीनेवाली और हद दर्जे की बातूनी.. लेकिन मेरा लेखन आपको बोर नहीं करेगा..