सिद्धटेक का सिद्धिविनायक मंदिर , 200 साल पुराना यह मंदिर पहाड़ो की चोटी पर स्थित है। इसे अष्टविनायक का दूसरा पड़ाव माना जाता है। अहमदनगर जिले में भीमा नदी के किनारे एक छोटा सा गांव है सिद्धटेक, इस गांव की दक्षिण की ओर बहती भीमा नदी की खास बात है कि इस नदी में पानी का बहाव कितना भी तेज क्यों ना हो, लेकिन इस नदी में पानी की आवाज़ कभी भी सुनाई नही देती। नदी के पास ही के पर्वत पर विराजमान यह सिद्धिविनायक का मंदिर बेहद खूबसूरत और चारों ओर से बाबुल के पेड़ों से घिरा हुआ है और इस मंदिर की गिनती जागृत मंदिरों में होती हैं।

मनमोह लेने वाली है मूर्ति

सभी अष्टविनायक में सिर्फ यही एक मूर्ति दाई सूंड वाली हैं
सभी अष्टविनायक में सिर्फ यही एक मूर्ति दाई सूंड वाली हैं

सिद्धटेक की 3 फीट लंबी और ढाई फीट चौड़ी सिद्धिविनायक की यह मूर्ति स्वयंभू है। 15 फीट लंबे और 10 फीट चौड़े गृभगृह में स्थापित यह गणपति देखने में एकदम शांत और कोमल दिखाई देते है। श्री विष्णु के रक्षक जया और विजया की मूर्ति यहां सिद्धिविनायक मूर्ति के पास ही बनी हुई है। इस गणपति की सबसे खास बात है कि इस गणपति की सूंड दाहिनी ओर है। अष्टविनायक में से सिर्फ यही एक गणपति है, जिनकी सूंड दाहिनी तरफ है। दरअसल, दाहिनी ओर सूंड वाले गणपति को सिद्धिविनायक कहा जाता है। सिद्धी का अर्थ है उपलब्धि और सफलता । मान्यता है कि ऐसे गणपति बहुत ही शक्तिशाली होते है और उन्हें प्रसन्न करना सबसे मुश्किल होता है। शायद इसलिए ही इस देवता की परिक्रमा काफी मुश्किल है। पहाड़ पर बने इस मंदिर की प्रदक्षिणा का अपना महत्व है। पहाड़ पर कच्चा रास्ता, पत्थर और कंकड़ होने के बावजूद यहां श्रद्धालु लगभग 5 किलोमीटर की परिक्रमा करते हैं, जिसे करने में आधे घंटे का समय लगता है। भक्त इस मंदिर की 7 बार परिक्रमा किए जाने में विश्वास रखते हैं।

इसी जगह पर भगवान विष्णु को सिद्धि प्राप्त हुई थी

यहां कई उत्सवों का आयोजन किया जाता है
यहां कई उत्सवों का आयोजन किया जाता है

इस मंदिर में गणेशोत्सव के दौरान मनाया जाता गणेश प्रकटोत्सव काफी प्रसिद्ध है। दरअसल, यह उत्सव हिन्दू माह भाद्रपद के पहले दिन से सांतवे दिन तक मनाया जाता है, जिनमें से चौथे दिन गणेश चतुर्थी आती है। इस उत्सव पर मेले का भी आयोजन किया जाता है। इसके बाद भगवान गणेश के जन्मदिन को समर्पित माघोत्सव (गणेश जयंती) को भी काफी जोरशोर से मनाया जाता है, जो हिंदी माघ महीने के चौथे दिन मनाया जाता है। इस उत्सव को महीने के पहले से आंठवे दिन तक मनाया जाता है। खास बात है कि इन उत्सवों के समय भगवान गणेश की पालकी भी निकाली जाती है। सोमवती अमावस्या और विजयादशमी के दिन यहाँ मेले का भी आयोजन किया जाता है।

अष्टविनायक सिद्धिविनायक के दर्शन के लिए यह मंदिर सुबह 5 से रात 9.30 बजे तक खुला रहता है। सुबह की आरती 4 बजे और धूप आरती रात 9 बजे होती हैं। कुछ श्रद्धालु इस मंदिर को मोरगांव के मयुरेश्वर और थेउर के बाद तीसरे नम्बर का अष्टविनायक भी मानते हैं।

कैसे पहुंचे इस मंदिर तक

हवाई मार्द से क्षी सिद्धिविनायक, सिद्धटेक पहुंचने के लिए सबसे नज़दीक का हवाई अड्डा मुंबई और पुणे है। रेल मार्ग से सिद्धटेक जाने का नज़दीकी रेल्वे स्टेशन है मुंबई, अहमदनगर और पुणे। पुणे-सोलापुर रेल मार्ग पर डांड स्टेशन से सिद्धटेक 18 किलोमीटर, पुणे से सिद्धटेक की दूरी 100 किमी और मुंबई से 275 किमी है। पुणे से डांस जानेवाली बस शिरापुर गांव से आती है। जहां से सिद्धटेक मात्र एक किमी दूर है। यहां आकर बोट के माध्यम से सिद्धटेक पहुंचा जा सकता है।

तो अपना यह पर्व मंगलमय करने के लिए आप इस मंदिर के साथ-साथ बाकी अष्टविनायक की यात्रा कर सकते हैं। इस मंदिर के बारे में और जानकारी के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें

अष्टविनायक

HFT हिन्दी की एडिटर, मनमौजी, हठी लेकिन मेहनती..उड़ नही सकती लेकिन मेरी कल्पनाशक्ति को उड़ने से कोई नहीं रोक सकता। अपने महिला होने पर मुझे सबसे ज्यादा गर्व है। लिखना मेरा शौक है। लिखने के अलावा बेटे के साथ गप्पे मारना और खेलना मुझे बेहद पसंद है।