भारत में रेल यातायात हर जगह फैला हुआ है। रेल ट्रेवल करना का एक ज़रिया बन चुका है, जिसके बिना भारतियों का गुज़ारा नहीं हो सकता। आज भारत में छोटे से छोटे स्थान पर भी रेलवे स्टेशन बनाए गए हैं, जिससे आम लोग आसानी से यात्रा कर सकें। लेकिन क्या कभी आपने भारतीय स्टेशनों के बारे में कुछ ख़ास बातें देखी हैं? जैसे कि रेलवे स्टेशन में जब ट्रेन दाखिल होती है, तो शहर के नाम के साथ टाइटल का इस्तेमाल किया जाता है। इनमें जंक्शन, सेन्ट्रल और टर्मिनस जैसे टाइटल का इस्तेमाल होता है। क्या आपने कभी सोचा है कि स्टेशनों के नाम के पीछे इन्हे क्यों लगाया जाता है और इसका मतलब क्या होता है? आइये हम इस गुत्थी को सुलझाते हैं और आपको देते हैं इसके बारे में जानकारी।

क्या होता है जंक्शन?

भारत में 300 जंक्शन है

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जंक्शन स्टेशन का एक ऐसा प्रकार है, जहां रेलवे लाइन के कम से कम तीन रुट हों। जंक्शन पर तीन या तीन से ज़्यादा अलग-अलग दिशाओं से ट्रेने आ सकती हैं। तीन दिशाओं के रेलवे ट्रैक्स का जहां संगम होता है, उस स्टेशन को जंक्शन कहा जाता है। आपको जानकार हैरानी होगी कि भारत में 300 जंक्शन है। जिसमें मथुरा जंक्शन का नाम पहले आता है, क्योंकि यहां सबसे ज़्यादा दिशाओं से यानी कि करीब 7 दिशाओं से ट्रेनें आती है।

क्या होता है सेन्ट्रल स्टेशन?

बाकी स्टेशनों के मुकाबले इस स्टेशन में ज़्यादा ट्रेनों की आवाजाही होती है

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भारत में 5 स्टेशन सेन्ट्रल स्टेशन हैं, जिसमें मुंबई सेन्ट्रल, चेन्नई सेन्ट्रल, त्रिवेंद्रम सेन्ट्रल, मैंगलोर सेन्ट्रल और कानपूर सेन्ट्रल का समावेश होता है। सेन्ट्रल स्टेशन उस शहर का सबसे पुराना लेकिन महत्वपूर्ण स्टेशन माना जाता है। यदि किसी शहर में एक से अधिक स्टेशन होते हैं, तो बाकी स्टेशनों के मुकाबले इस स्टेशन में ज़्यादा ट्रेनों की आवाजाही होती है। ये बात भी आपको जाननी चाहिए कि किसी शहर में एक से अधिक स्टेशन होने के बाद वहां सेन्ट्रल स्टेशन होना ज़रूरी नहीं है।

क्या है टर्मिनस?

मुख्य टर्मिनस में बांद्रा, हावड़ा, भावनगर और कोचीन हार्बर एक हैं।

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टर्मिनस उस स्टेशन को कहा जाता है, जो उस रुट का आखिरी स्टेशन हो। इस स्टेशन के बाद कोई स्टेशन नहीं होता। इसका अर्थ है कि यहां उस ट्रैक का अंत हो जाता है। यहां से ट्रेन केवल दूसरी दिशा की ओर जा सकती है। भारत में 27 टर्मिनस बने हैं, जिसमें से सबसे बड़े टर्मिनस लोकमान्य तिलक टर्मिनस और छत्रपति शिवजी टर्मिनस एक हैं। इसके अलावा मुख्य टर्मिनस में बांद्रा, हावड़ा, भावनगर और कोचीन हार्बर एक हैं।

क्या है स्टेशन?

इन सबके बाद नंबर आता है स्टेशन का, जहां से केवल एक रुट की गाड़ियां रूकती हैं और कुछ देर में चली जाती है। यहां से केवल गाड़ियां पास होती हैं। आपको जानकार हैरानी होगी कि भारत में करीब 8 हज़ार से भी ज़्यादा रेलवे स्टेशन हैं।

तो अब जब भी आप रेलवे स्टेशन के आगे इन टाइटल पढ़ें, तो कन्फूज़ मत होइएगा।

मेरी आवाज़ ही पहचान है! संगीत मेरी कल्पना को पंख देता है.. किताबी कीड़ा, अडिग, जिद्दी, मां की दुलारी.. प्राणीप्रेम ऐसा कि लोग मुझे लगभग पागल समझते हैं! खाने के लिए जीनेवाली और हद दर्जे की बातूनी.. लेकिन मेरा लेखन आपको बोर नहीं करेगा..