भारत के मंदिरों की बात करें तो यहां कई ऐसे मंदिर है, जो अपनी मान्यताओं के चलते लोगों के बीच चर्चित हुए हैं। आज हम आपको ऐसे पांच मंदिरों के बारे में बताए जा रहे हैं, जो कौरवों के राज्य में पांडवों ने बनाए थे। लेकिन इन मंदिरों को लेकर भी एक दिलचस्प कहानी है।

कहा जाता है की अज्ञातवास के दौरान पांडवों की माता कुंती, रेत का शिवलिंग बनाकर उसकी पूजा करती थी। जब पांडवों ने उनसे पूछा कि किसी मंदिर में जाकर वे शिवलिंग की क्यों नहीं पूजती? तो उन्होंने इसके जवाब में कहा कि सारे मंदिर कौरवों द्वारा बनाए गए हैं, जहां जाने की हमें अनुमति नहीं है। कुंती के उत्तर को सुन कर पांडवों को चिंता हुई और उन्होंने रातों-रात पांच प्रमुख मंदिरों के द्वार की दिशा बदल दी, जिसकी वजह से ये मंदिर पांडव निर्मित कहलाए और बाद में पांडवों के नाम पर चर्चित हो गए। आज हम इन्हीं पांच मंदिरों के बारे में जानेंगे।

ममलेश्वर महादेव: मध्यप्रदेश में नर्मदा नदी के तट पर स्थित ओमकारेश्वर मंदिर के ज्योतिर्लिंग के दो अलग-अलग स्वरूप हैं, जिसमें से एक को ममलेश्वर का नाम दिया गया है। यह ओमकारेश्वर के प्रमुख मंदिर से थोड़ी दूरी पर बसा है। इस मंदिर का निर्माण पांडवों ने किया था। कहा जाता है कि यहां पर शंकर जी खुद प्रकट हुए थे, इसीलिए इस मंदिर की मान्यता लोगों के बीच है।

कर्णेश्वर मंदिर: यह मंदिर राजस्थान के कोटा में स्थित है। इस मंदिर की भव्यता इसकी पहचान है। कहा जाता है कि इस मंदिर में जो गुफाएं बनाई गई हैं, वह उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर से जुड़ी हुई हैं। कहा जाता है कि इस मंदिर को राजा कर्ण ने बनाया था, जहां बैठकर वे गांव वालों को दान दिया करते थे। इसीलिए इस मंदिर का नाम कर्णेश्वर मंदिर पड़ा। इस मंदिर का द्वार पांडवों ने रातों-रात बदल दिया था। कहा जाता है कि यहां कर्ण रोज़ाना बैठ कर देवी की कठिन तपस्या करते थे, जिससे खुश होकर देवी उन्हें रोज सवा मन सोना देती थी, जिसे वे गांव वालों को दान दे दिया करते थे।

इस मंदिर का द्वार पांडवों ने रातों-रात बदल दिया था

महाकालेश्वर मंदिर: इस कर्म में तीसरा मंदिर है महाकालेश्वर। मध्यप्रदेश में शिप्रा नदी के तट पर बसा यह मंदिर, 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। इस मंदिर का उल्लेख महाभारत, शिव पुराण और स्कंद पुराण में भी किया गया है। इस शिवलिंग को त्रेता युग में स्थापित किया गया था। हालांकि इस मंदिर का निर्माण कौरवों ने किया था लेकिन पांडवों ने अपनी माता कुंती की बात सुन कर इस मंदिर के द्वार की दिशा रातों-रात बदल दी थी। कहा जाता है कि एक बार ध्वस्त होने के बाद इसका पुनर्निर्माण राजा विक्रमादित्य ने करवाया था।

सिद्धनाथ महादेव: सूरत में नर्मदा नाथ नदी के तट पर बसा नेमावर नगर का एक प्राचीन महादेव मंदिर है सिद्धनाथ मंदिर। यह मंदिर सिद्धनाथ महादेव के नाम से जाना जाता है। यह एक छोटी सी पहाड़ी पर बना है। द्वापर युग में कौरवों ने इस मंदिर को पूर्व मुखी बनाया था, जिसके बाद माता कुंती की बात सुन कर पांडव पुत्र भीम ने अपने बल से इसे पश्चिम मुखी बना दिया था। इसके बाद दसवीं शताब्दी में चंदेल के परमार घराने के राजाओं ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार किया।

इस मंदिर को बनवाते समय कौरवों ने इसका मुख्य द्वार पूर्व मुखी रखा था

विजेश्वर महादेव: मध्य प्रदेश के देवास जिले में पानी गांव के पास बसा है विजेश्वर महादेव का ये मंदिर। यह मंदिर बिजवाड़ में स्थित है, जिसे पांडवकालीन मंदिर माना जाना जाता है। इस मंदिर का निर्माण कौरवों ने करवाया था। इस मंदिर को बनवाते समय कौरवों ने इसका मुख्य द्वार पूर्व मुखी रखा था, लेकिन माता कुंती की दुविधा के बाद पांडवों ने इसे पश्चिम मुखी बना दिया था।

इस तरह त्रेता युग में बने ये पांच मंदिर पांडवों की वजह से चर्चित हो गए।

मेरी आवाज़ ही पहचान है! संगीत मेरी कल्पना को पंख देता है.. किताबी कीड़ा, अडिग, जिद्दी, मां की दुलारी.. प्राणी प्रेम ऐसा कि लोग मुझे लगभग पागल समझते हैं! खाने के लिए जीनेवाली और हद दर्जे की बातूनी.. लेकिन मेरा लेखन आपको बोर नहीं करेगा..