केरल अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है, ख़ास तौर पर केरल के टूरिस्ट प्लेस मुन्नार की बात करें, तो ये लोगों के बीच बेहद फेमस है। वैसे तो मुन्नार घूमने के लिए कोई भी मौसम अच्छा साबित होगा, लेकिन अगर आप हरियाली और मन मोहने वाली प्राकृतिक छटा देखना चाहते हैं, तो मुन्नार का रुख करें। इस साल मुन्नार एक और खास बात के लिए लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। हम बात कर रहे हैं मुनार के उस नज़ारे की, जो सिर्फ 12 साल में एक बार दिखाई देता है।

इस खूबसूरत दृश्य का अनुभव यदि आप समेटना चाहते हैं, तो केरल जाने के लिए सबसे बढ़िया समय है

जुलाई के दूसरे पखवाड़े में केरल के मुन्नार में अन्नामलाई पहाड़ियां नीले-बैंगनी रंग के फूलों से लद जाती है । यहां की पहाड़ियां 12 साल में एक बार खिलने वाले नीलकुरिंजी फूलों से की चादर ओढ़ लेती है और अक्टूबर के अंत तक देशी विदेशी पर्यटकों का जमावड़ा यहां लगा रहता है। इस खूबसूरत दृश्य का अनुभव यदि आप समेटना चाहते हैं, तो केरल जाने के लिए सबसे बढ़िया समय है। मुन्नार में पूरे देश भर में सबसे ज़्यादा नीलकुरिंजी के पौधे पाए जाते हैं। फूलों से भरी यह पहाड़िया 3000 हेक्टर क्षेत्र में फैली हुई है।

क्या है इस पौधे की खासियत?
इसकी दुनिया में 450 प्रजातियां पाई जाती हैं

यह पौधा अपने जीवनकाल में सिर्फ एक बार खिलता है और खिलने के बाद खत्म हो जाता है ।इसके बीज को फिर से पौधा बनने में और 30 से 70 सेंटीमीटर तक बड़ा होने में करीब 12 वर्षों का समय लग जाता है।इससे पहले ये फूल 2006 में खिले थे। नीलकुरिंजी भारत के अलावा सिर्फ ऑस्ट्रेलिया में पाया जाता है और इसकी दुनिया में 450 प्रजातियां पाई जाती हैं। इसमें से 146 भारत में मिलती है।आपको जानकार हैरानी होगी कि अकेले केरल में इसकी 43 प्रजातियां मौजूद है।

इसके साथ साथ पहाड़ी ढलानों पर बसा ये शहर चाय के बागानों के लिए फेमस हैं। यहां के बागान लगभग 80,000 मील की दूरी तक पहाड़ियों को ढके हुए दिखाई देते हैं। मुन्नार में आमतौर पर ठंड होती है, जो मानसून में आप को एक अलग एहसास देगी।

मेरी आवाज़ ही पहचान है! संगीत मेरी कल्पना को पंख देता है.. किताबी कीड़ा, अडिग, जिद्दी, मां की दुलारी.. प्राणी प्रेम ऐसा कि लोग मुझे लगभग पागल समझते हैं! खाने के लिए जीनेवाली और हद दर्जे की बातूनी.. लेकिन मेरा लेखन आपको बोर नहीं करेगा..