हॉलिडे पर जाना सभी को अच्छा लगता है, खास तौर पर जब कोई जगह भीड़भाड़ से दूर ऑफबीट हो। ऐसी हो जगहों के लिए कर्नाटक एक ऐसा गंतव्य है, जहां आप चैन से समय व्यतीत कर सकते हैं। ऐसी ही एक खूबसूरत और रमणीय हॉलिडे डेस्टिनेशन है कुंती बेट्टा। कर्नाटक के मांड्या जिले की ये खूबसूरत जगह आपका मन मोहने के लिए काफी है। पांडवपुरा तालुका में स्थित ये जगह ट्रेकिंग के लिए खास मानी जाती है। जिन लोगों को ट्रेकिंग करना पसंद है, उनके लिए ये जगह रोमांचक मानी जाती है। आइए जानते हैं कुंती बेट्टा के बारे में खास बातें।

नाइट ट्रेक का इंतज़ाम

आप लोकल ट्रेकिंग क्लब में शामिल हो सकते हैं

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आपने अक्सर लोगों को दिन के उजाले में ट्रेकिंग पर जाते हुए देखा होगा। लेकिन कुंती बेट्टा एक ऐसी जगह है, जहां आप चांदनी रात में ट्रेकिंग का मज़ा ले सकते हैं। यहां जाने के लिए आप लोकल ट्रेकिंग क्लब में शामिल हो सकते हैं, जिसके बाद आप रात के अंधेरे में पहाड़ी की चढ़ाई का आनंद ले सकते हैं और रोमांच महसूस कर सकते हैं।

कुंती बेट्टा की ख़ासियत

कुंती बेट्टा की ख़ासियत है यहां की पहाड़ी, जो बेहद पथरीली है। इसलिए इस पर चढ़ाई करना आपको रोमांच से भर देती है। इसके अलावा पहाड़ी पर हवाई के दौरान आपको लहलहलाते धान और गन्ने के खेत दिखाई देंगे। चारों ओर खूबसूरत और आसमान छूते पेड़ आपकी आंखों को सुकून देते हैं।

झील में डुबकी का आनंद

इस झील के किनारे कैम्पिंग का मज़ा भी आप ले सकते हैं

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पहाड़ी के मुहाने पर है कुंती कुंड नामक झील, जो पर्यटकों को गर्मी से राहत देने का काम करती है। खास तौर पर सूर्योदय और सूर्यास्त के दौरान झील की खूबसूरती तिगुनी हो जाती है। इस झील के किनारे कैम्पिंग का मज़ा भी आप ले सकते हैं।

क्या है कुंटी बेट्टा की कहानी?

इस जगह से जुड़ी है एक ऐतिहासिक गाथा, जिसके अनुसार इस जगह का आध्यात्मिक महत्व है। द्वापर युग में पांडव जब महल से निष्कासित हुए थे, तब इस जगह पर कुछ दिनों के लिए रुके थे। जिसकी वजह से इस जगह का विकास हुआ। इसलिए पहाड़ी के नीचे आज भी कुंती का मंदिर है। यही वजह है कि इस जगह का नाम कुंती बेट्टा पड़ा है।

कैसे पहुंचे कुंती बेट्टा?

कुंती बेट्टा पहुंचने के लिए आपको बैंगलोर हाइवे की मदद लेनी होगी। बैंगलोर से 130 किलोमीटर की दूरी पर बसा है कुंती बेट्टा, जहां जाने के लिए आप बस भी ले सकते हैं। आप चाहें तो खुद की गाड़ी का इस्तेमाल कर भी यहां पहुंच सकते हैं।

मेरी आवाज़ ही पहचान है! संगीत मेरी कल्पना को पंख देता है.. किताबी कीड़ा, अडिग, जिद्दी, मां की दुलारी.. प्राणी प्रेम ऐसा कि लोग मुझे लगभग पागल समझते हैं! खाने के लिए जीनेवाली और हद दर्जे की बातूनी.. लेकिन मेरा लेखन आपको बोर नहीं करेगा..