हिमाचल की गोद में बसा अल्मोड़ा, जो प्रकृति का एक ऐसा तोहफा है, जिसे आम इंसान सदियों तक याद रखेगा। चारों ओर से हिमालय से घिरी ये जगह अपने आप में कई रहस्य को समेटे हुए है। इसी में से एक है कसार देवी, जो अल्मोड़ा की शान माना जाता है। यह पूरे विश्व में प्रसिद्ध है और इसकी वजह है यहां मौजूद चुम्बकीय शक्ति, जिसे लोग मैग्नेटिक पावर के नाम से जानते हैं। यह मैग्नेटिक पावर यहां आने वालों को अनोखी शान्ति से सराबोर कर देती है। यही वजह है कि यहां उन लोगों का तांता लगा रहता है, जो काम के तनाव को दूर करना चाहते हैं। वहीं यहां विदेशी सैलानियों की आवाजाही भी ज़्यादा है। आइये जानते हैं अल्मोड़ा की शान कसार देवी के बारे में और भी खास बातें।

क्या है यहां का मैग्नेटिक पावर?

इसी शक्ति का असर हमारे शरीर पर सकारात्मक रूप से पड़ता है

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कहा जाता है कि यहां मौजूद मैग्नेटिक पावर वैन एलेन बेल्ट की वजह से है, जो धरती के अंदर मौजूद चुम्बकीय पिंड की तरह है। इसके चारों ओर विद्युत् से भरपूर परत तैयार हुई है, जिससे रेडिएशन भी निकलते हैं। इसी वजह से ये चुम्बकीय शक्ति इस शहर में पाई जाती है। कहा जाता है कि इसी शक्ति का असर हमारे शरीर पर सकारात्मक रूप से पड़ता है और ये हमें अंदरूनी शान्ति देता है।

क्या है कसार देवी?

यहां कसार देवी के अलावा आप चितइ देवता मंदिर और दूनागिरी मंदिर के दर्शन भी कर सकते हैं

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कसार गांव अल्मोड़ा से 8 किलोमीटर दूर कश्यप पहाड़ पर हवालबाघ की प्राचीन घाटी के पास बसा हुआ है। यहां आकर आपको न सिर्फ मन की शान्ति मिलेगी, बल्कि चारों ओर फैली हिमालय की पर्वत श्रंखला, ठंडी बयार, खूबसूरत वादियां आपका मन मोहने के लिए काफी है। यहां कसार देवी के अलावा आप चितइ देवता मंदिर और दूनागिरी मंदिर के दर्शन भी कर सकते हैं। यहां हर साल कार्तिक पूर्णिमा के दिन कसार देवी का मेला लगता है, जिसे देखने कई श्रद्धालु और सैलानी इक्कठा होते हैं। यह मेला नवम्बर से दिसंबर के बीच लगता है। यहां जाने के लिए आपको अल्मोड़ा- बागेश्वर हाइवे का सहारा लेना होगा।

ऐतिहासिक मान्यता के साथ-साथ वैज्ञानिक महत्त्व रखती है ये जगह

भारत की ये एकलौती ऐसी जगह है, जिस पर नासा के वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं

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आपको जान कर हैरानी होगी कि यह जगह एक ऐतिहासिक मान्यता रखती है। यहां स्वामी विवेकानंद ने 1890 में आकर तपस्या की थी। इसके अलावा बौद्ध गुरु लामा अंगरिका गोविंदा ने भी यहां कई सालों की कड़ी विशेष साधना की थी। वहीं 1960- 70 के दशक में यहां हिप्पी आंदोलन हुआ था। साथ ही कसार देवी मंदिर 1970- 80 में डच सन्यासियों का गढ़ हुआ करता था। पूरी दुनिया में ऐसी चुंबकीय ताकत कसार देवी के अलावा सिर्फ दो ही जगहों पर है, जिसमें से एक है अमेरिका के पेरू में स्थित माचू-पिच्चू और इंग्लैंड का स्टोन हेंग। ये तीन जगहें इस रहस्य्मयी चुम्बकीय ताकत से बंधी हुई है, जिसके पीछे का कारण नासा के वैज्ञानिक भी नहीं ढूंढ पाए। भारत की ये इकलौती ऐसी जगह है, जिस पर नासा के वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं।

क्या है यहां का धार्मिक महत्त्व?

कसार देवी मंदिर धर्म में विश्वास रखने वालों के लिए ख़ास जगहों में से एक है। कहा जाता है कि इस जगह देवी दुर्गा प्रकट हुई थी और उन्होंने कात्यायनी अवतार लेकर शुम्भ-निशुम्भ नामक राक्षसों का वध किया था। इसलिए ऐसी मान्यता प्रचलित है कि यहां आने वाले की हर मनोकामना पूर्ण होती है। इसे शक्ति पीठ के रूप में जाना जाता है।

यदि आप रोज़ाना के तनाव से बेहद परेशान हो चुके हैं और किसी ऐसी जगह की खोज कर रहे हैं, जो आपको अंदर से हील कर सके, तो अल्मोड़ा का कसार गांव सिर्फ आपके लिए बना है।

मेरी आवाज़ ही पहचान है! संगीत मेरी कल्पना को पंख देता है.. किताबी कीड़ा, अडिग, जिद्दी, मां की दुलारी.. प्राणी प्रेम ऐसा कि लोग मुझे लगभग पागल समझते हैं! खाने के लिए जीनेवाली और हद दर्जे की बातूनी.. लेकिन मेरा लेखन आपको बोर नहीं करेगा..