गुंडिचा यात्रा और घोषा यात्रा के नाम से भी पहचानी जानेवाली विश्वप्रसिद्ध जगन्नाथ पुरी की रथ यात्रा की शुरुआत आज से हो चुकी है। यह रथ यात्रा हर साल आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को निकलती है। इस पावन यात्रा में भगवान विष्णु के अवतार भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलराम और बहन सुभद्रा रथ पर सवार होकर निकलते हैं। भारतीय मान्यताओं के अनुसार भगवान जगन्नाथ इस दिन अपनी मौसी के घर जाने के लिए शानदार रथों पर सवार होकर यात्रा पर निकलते हैं। कई सालों से मनाए जाने वाले इस उत्सव में लाखों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। इस उत्सव के दौरान भगवान जगन्नाथ को रथ पर बिठाकर पूरे नगर का भ्रमण कराया जाता है। आइए जानते हैं जगन्नाथ रथ यात्रा से जुड़ी कुछ खास बातें।

भक्तों द्वारा क्यों खींचा जाता है भगवान का रथ?

भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा

इस पवित्र रथयात्रा का आरंभ भगवान श्री जगन्नाथ जी के रथ के सामने सोने के झाडू से सफाई करने के बाद ही होता है। फिर ढोल-ताशे और नगाड़ों की ध्वनि और पावन मंत्रों के बीच सभी भक्तगण पूरे विधि-विधान के साथ इन विशाल रथों को मोटे-मोटे रस्सों से खींचते हैं। सबसे पहले श्री बलराम जी का रथ तालध्वज निकलता है, इसके बाद बहन सुभद्रा जी का रथ पद्म चलना शुरू होता है और आखिर में भगवान जगन्नाथ के रथ नंदी को खींचा जाता है। मान्यता है कि इस रथयात्रा में रथों को एक साथ मिलकर खींचने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

क्या है जगन्नाथ भगवान के रथ की खासियत?

बाकि दोनों रथों के मुकाबले भगवान जगन्नाथ का रथ सबसे बड़ा होता है

45 फ़ीट ऊंचा भगवान जगन्नाथ का रथ लाल और पीले रंग का होता है। यह रथ लकड़ी के 332 टुकड़ों से बनता है और उसके कुल 16 पहिए होते हैं। भगवान जगन्नाथ का यह रथ सबसे बड़ा होता है और इसमें हनुमान जी और नरसिंह भगवान का वास होता है। यह रथ सबसे आखिर में निकलता है।

सबसे पहले खींचा जाता है उनके बड़े भाई श्री बलराम का नीला रथ जो 44 फ़ीट ऊंचा होता है। फिर आता है छोटी बहन सुभद्रा जी का 43 फ़ीट ऊंचा रथ जो मुख्य रूप से काले रंग का होता है। तीनों ही रथों की सजावट बड़े शानदार ढंग से की जाती है। कहते हैं कि इन रथों को बनाने की शुरुआत अक्षय तृतीया के दिन से ही हो जाती है।

इन जगहों पर भी निकलती है जगन्नाथ यात्रा

रथ यात्रा का भव्य उत्सव

उड़ीसा के जगन्नाथ पुरी के अलावा कई और जगहों से भी भगवान जगन्नाथ की यात्रा निकाली जाती है। इन यात्राओं में भी भक्तगण बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं।

गुजरात के सरसपुर शहर में दर्शन देते हैं भगवान जगन्नाथ

गुजरात के सरसपुर शहर के रणछोड़दास मंदिर में भी भगवान जगन्नाथ की यात्रा का आयोजन किया जाता है। हर साल 2,500 से 3000 साधुओं का एक दल इस यात्रा में भाग लेने के लिए आता है। यह उत्सव इतना बड़ा और भव्य होता है कि सभी की सुरक्षा के लिए यहां कड़े इंतज़ाम किये जाते हैं।

असम में भी भगवान जगन्नाथ की यात्रा

असम में होनेवाली रथयात्रा में देश के हर कोने से लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। इस यात्रा में श्रद्धालु देवताओं पर फूलों की बारिश करते हैं। आपको जान कर हैरानी होगी कि यहां भगवान को फूलों का चढ़ावा चढ़ाया जाता है।

दिल्ली की भव्य रथयात्रा

दिल्ली में भी दूसरे राज्यों की तरह भक्तों का उत्साह सातवें आसमान पर होता है। हर कोई रथों को एक बार छूने और खींचने के लिए तत्पर रहता है। रथ के दौरान सभी लोग तरह-तरह के चढ़ावे अर्पित करते हैं।

विदेश में भी निकलती है यह रथयात्रा

विदेश में जगनाथ की रथयात्रा

अगर विदेशों की बात करें, तो लंदन, सैन फ्रांसिस्को और बांग्लादेश जैसी जगहों में भी भगवान् जगन्नाथ की रथयात्रा का आयोजन किया जाता है।

यदि आप भी पाना चाहते हैं भगवान जगन्नाथ के दर्शन, तो अब आपको जगन्नाथ पुरी तक जाने की ज़रूरत नहीं है। क्योंकि अब इन जगहों पर भी आप रथयात्रा में हिस्सा लेकर पुण्य कमा सकते हैं।

अपने सपनो को पूरा करने की ताक़त रखती हूँ। अभिलाषी हूं और नई चीज़ों को सीखने की इच्छुक भी। एक फ्रीलान्स एंकर। मेरी आवाज़ ही नहीं, बल्कि लेखनी भी आपके मन को छू लेगी। डांसिंग और एक्टिंग की शौक़ीन। माँ की लाड़ली और खाने की दीवानी।