दुनिया में कई ऐसे शहर और कई ऐसे छोटे-छोटे गांव हैं, जो अपनी बोली और अपनी संस्कृति को लेकर पहचाने जाते हैं। ये संस्कृति, ये बोली ही क्षेत्र को ख़ास बनाती है। जहां एक ओर भारत में संस्कृत और अफ्रीकन भाषा की वजह से लोग जाने जाते हैं, वहीं तुर्की के एक छोटे गांव में लोग एक अजीबो-गरीब भाषा की वजह से जाने जाते हैं। ये लोग बर्ड लैंग्वेज यानी कि पक्षियों की भाषा में बात करते हैं, जो अपने आप में किसी अजूबे से कम नहीं है।

टर्की के गिरेसुन गांव की ये ख़ास भाषा कानों में शहद घोलती है। मात्र 10 हज़ार लोगों की आबादीवाला ये पहाड़ी गांव अपने अंदर एक ऐसी धरोहर को छिपाए बैठा है, जिसे यूनेस्को ने अपनी कल्चरल हैरिटेज की श्रेणी में सहेजा है। आइये जानते हैं इस गांव और पक्षियोंवाली इस अनोखी भाषा के बारे में कुछ ख़ास बातें।

किसे कहते हैं बर्ड लैंग्वेज?

बर्ड लैंग्वेज ऐसी भाषा है, जिसमें लोग अलग-अलग तरह की आवाज़वाली सिटी बजाकर एक दूसरे से बात करते हैं। ये आज से नहीं, बल्कि 500 सालों से लोगों के बातचीत का तरीका बना हुआ है। पुराने ज़माने में जब पहाड़ी इलाकों में बातचीत का कोई साधन नहीं होता था, तब लोग बर्ड लैंग्वेज के ज़रिये एक-दूसरे से बात करते थे। इस भाषा की प्रेरणा यहां के लोगों को पक्षियों से मिली। इस भाषा में तरह-तरह की हाई पिच सिटी का उपयोग किया जाता है, जो दूर बैठा कोई भी व्यक्ति सुन सकता है। साथ ही यहां की हर सिटी का एक अलग मतलब होता है।

क्या है आज की स्थिति?

जहां इस भाषा को जाननेवाले लोग अब धीरे-धीरे बूढ़े होते जा रहे हैं, वहीं आनेवाली पीढ़ी इसे सिखने में दिलचस्पी नहीं दिखा रही। मोबाइल फोन के बढ़ते चलन के कारण ये बर्ड लैंग्वेज अब सीमित इलाकों में सिमट कर रह गई है। ये भाषा टर्की के ब्लैक सी इलाके की देन है, जहां लोग सालों से जीभ और उंगलियों का इस्तेमाल कर इस भाषा में बातचीत कर रहे हैं, लेकिन हाल की स्थिति में ये भाषा अपनी पहचान खो रही है। हालात ये हैं कि एक समय में ये भाषा कैनेरी आयलैंड से मैक्सिको और ग्रीस के गांवों तक बोली जाती थी, लेकिन अब इसे जाननेवाले लोगों की संख्या मात्र 10 हज़ार रह गई है। हालांकि इस भाषा को बचाने के लिए टर्की सरकार ने साल 2014 से इसे पाठशाला में कोर्स के रूप में सिखाना शुरू किया है, जिससे आनेवाली पीढ़ी इसे समझ सके और इसे ज़िंदा रख सके।

यदि आप भी बर्ड लैंग्वेज सुनना चाहते हैं, तो टर्की के गिरेसुन गांव जा सकते हैं।

मेरी आवाज़ ही पहचान है! संगीत मेरी कल्पना को पंख देता है.. किताबी कीड़ा, अडिग, जिद्दी, मां की दुलारी.. प्राणी प्रेम ऐसा कि लोग मुझे लगभग पागल समझते हैं! खाने के लिए जीनेवाली और हद दर्जे की बातूनी.. लेकिन मेरा लेखन आपको बोर नहीं करेगा..