मध्यप्रदेश का ग्वालियर किला अपनी भव्यता के लिए लोगों के बीच प्रचलित है। इसे देखने हर साल लाखों की संख्या में पर्यटक आते हैं। यहां की खूबसूरती सबका मन मोह लेती है। इस किले का निर्माण आठवीं शताब्दी में किया गया था। इस किले की ऊंचाई 350 फीट है। यह किला मध्यकालीन स्थापत्य के नमूनों से भरा हुआ है। देखा जाए तो ग्वालियर किला शहर का प्रमुख स्मारक है, जो गोपांचल नामक छोटी सी पहाड़ी पर बसा हुआ है।

आइए जानते हैं इस किले के बारे में ऐसी ही कुछ और खास बातें।

किले पर पहुंचने के दो रास्ते हैं

ग्वालियर किला को खास तौर पर इसकी चारदीवारी के लिए जाना जाता है। इसमें कई ऐतिहासिक स्मारक बुद्ध और जैन मंदिर बनाए गए हैं। इसके अलावा यहां गुज़री महल, मानसिंह महल, जहांगीर महल, करण महल, शाहजहां महल आदि मौजूद है।

किले पर पहुंचने के दो रास्ते हैं। एक को ग्वालियर दरवाज़ा कहा जाता है, जिस पर सिर्फ पैदल यात्रा की जा सकती है। जबकि दूसरे रास्ते को उरवाई गेट कहा जाता है, जहां गाड़ी से भी आप अंदर जा सकते हैं। यह किला 350 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।

किले का मुख्य प्रवेश द्वार हाथी पुल के नाम से जाना जाता है, जो सीधा मान मंदिर महल की ओर आपको ले जाएगा।

किले के बारे में ज़रूरी बातें

यह दुर्ग एक पुरातात्विक संग्रहालय के रूप में आज मौजूद है

ग्वालियर का किला करीब 1000 वर्ष पुराना है। भारत के सर्वाधिक दुर्लभ्य 100 किलों में से यह किला एक है। इसे बलुआ पत्थर की पहाड़ी पर निर्मित किया गया है।

खास तौर पर यह दुर्ग एक पुरातात्विक संग्रहालय के रूप में आज मौजूद है। इस दुर्ग में एक छोटे से मंदिर की दीवार पर आपको शून्य उकेरा हुआ दिखाई देगा। यह शून्य का दूसरा सबसे पुराना उदाहरण है। यह शून्य आज से लगभग 15 वर्ष पहले उकेरा गया था।

यदि आप ऐसे ही किसी ऐतिहासिक जगह जाने का मन बना रहे हैं, तो ग्वालियर का किला घूमने जाना आपके लिए सबसे अच्छा विकल्प होगा।

मेरी आवाज़ ही पहचान है! संगीत मेरी कल्पना को पंख देता है.. किताबी कीड़ा, अडिग, जिद्दी, मां की दुलारी.. प्राणी प्रेम ऐसा कि लोग मुझे लगभग पागल समझते हैं! खाने के लिए जीनेवाली और हद दर्जे की बातूनी.. लेकिन मेरा लेखन आपको बोर नहीं करेगा..