विजयदशमी कहें या फिर दशहरा, भारत में हिंदु धर्म में आस्था रखने वालों के लिये यह खास पर्व है। श्राद्ध पक्ष के समाप्त होते ही नवरात्र शुरु हो जाते हैं। 9 दिनों तक देवी की पूजा के बाद दसवें दिन विजयदशमी या कहें दशहरा पर्व मनाया जाता है। मुख्यत: इस त्यौहार को रावण दहन से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि भगवान श्री राम ने अपने धनुष से रावण को मार कर उस पर विजय हासिल की थी, यानी अच्छाई ने बुराई को हरा दिया था। इसी कारण इसे विजयदशमी कहा जाता है। ये बात हमेशा कही जाती है की अच्छाई हमेशा बुराई का पतन करती है। इसी को ध्यान में रख दशहरे का त्यौहार पूरे भारत वर्ष में बड़ी हर्षोल्लास और श्रद्दा के साथ मनाया जाता है। लेकिन जिस तरह से हर राज्य के समुदाय के अलग-अलग रिवाज होेते हैं। उसी तरह हर राज्य में इसे मानाने का तरीका भी एक दूसरे से एक दम जुदा होता है। अगर आप भी चाहते है दशहरा को नज़दीक से देखना तो जा सकते हैं इन राज्यों में। आइए जानते हैं उन राज्यों के बारे में जहां दशहरा को अलग अंदाज़ में मनाया जाता है।

मैसूर का दशहरा

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मैसूर महल के सामने एक प्रदर्शनी लगती है। दशहरा से शुरू होकर यह दिसंबर तक चलती है

मैसूर का दशहरा जिसे नाद हब्बा के नाम से भी जानते हैं, बड़ी शान और उत्साह के साथ मनाया जाता है। किसी और जगह आपको इतने रॉयल तरीके से दशहरा मनाया जाता नहीं दिखेगा। इस त्यौहार का हिस्सा बनने के लिए लोगों में भी जबरदस्त उत्साह दिखाई देता है। विजयदशमी के दिन मैसूर की सड़कों पर जुलूस निकलता है। इस जुलूस की खासियत यह होती है कि इसमें सजे-धजे हाथी के ऊपर एक हौदे में चामुंडेश्वरी माता की मूर्ति रखी जाती है। सबसे पहले इस मूर्ति की पूजा मैसूर के रॉयल कपल करते हैं उसके बाद इसका जुलूस निकाला जाता है। यह मूर्ति सोने की बनी होती है साथ ही इसका सिंहासन भी सोने का ही होता है। इस जुलूस के साथ म्यूजिक बैंड, डांस ग्रुप, आर्मड फोर्सेज, हाथी, घोड़े और ऊंट चलते हैं। यह जुलूस मैसूर महल से शुरू होकर बनीमन्टप पर खत्म होता है। वहां लोग बनी के पेड़ की पूजा करते हैं। माना जाता है कि पांडव अपने एक साल के गुप्तवास के दौरान अपने हथियार इस पेड़ के पीछे छुपाते थे और कोई भी युद्ध करने से पहले इस पेड़ की पूजा करते थे। अगर आप इन दिनों मैसूर में है तो यहां जाना ना भूले।

कुल्लू का दशहरा

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दशहरे के दिन का नजारा और भी शानदार होता है।

हिमचाल का प्रसिद्ध दशहरा जिसको बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है। जिन लोगो को बहुत अलग त्यौहार देखना पसंद है उन लोगो को एक बार कुल्लू का दशहरा जरूर देखना चाहिए । कुल्लू का दशहरा बाकि शहरों के दशहरे से बहुत अलग मनाया जाता है । जिस दिन सब जगह दशहरा ख़तम होने को होता है उस दिन से यहां ये त्यौहार शुरू होता है यह त्यौहार दशहरे वाले दिन शुरू होता है और पुरे एक सप्ताह चलता है। यहां के लोग भगवान रघुनाथ को मानते है और उन्हें ढालपुर मैदान ले के जाते है साथ वहां के जितने भी कुल देवता है उनको पालकी में बैठाकर नगर यात्राएं निकाली जाती हैं।हिमाचल राज्य ने इस दशहरे हो अंतर्राष्ट्रीय त्यौहार माना है जिसे देखने भारत के हर कोने से लोग आते है ।

बस्तर(छत्तीसगढ़) का दशहरा

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आदिवासी अपने लोक गीतों के साथ रथ यात्रा की शुरुआत करते है

बस्तर में दशहरे का पर्व 2 दिन, 4 दिन, या 10 दिन नहीं बल्कि पूरे 75 दिनों तक मनाया जाता है। छत्तीसगढ़ के आदिवासी लोग नवरात्रि के दौरान स्थानीय देवी मां दंतेश्वरी की आराधना करते है। दंतेश्वरी बस्तर के निवासियों की आराध्य देवी मानी जाती हैं और दूर्गा का ही एक रुप कही जाती हैं। इस दौरान भीतर रैनी (विजयदशमी), बाहर रैनी (रथ-यात्रा), मुरिया दरबार आदि इस उत्सव मुख्य आकर्षण का केंद्र माना जाता है। इसी रथ पर सभी देवीयों की मूर्ति को धूमधाम से जुलूस के साथ इनकी रथ यात्रा निकाली जाती है।

दिल्ली का दशहरा

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राम लीला की तैयारी २ महीने पहले से शुरू हो जाती है

दिल्ली के दशहरे के बारे में लगभग आप सभी लोग जानते है । दिल्ली का दशहरा बहुत प्रसिद्ध है और इस त्यौहार को दिल्ली के प्रसिद्ध राम लीला मैदान में आयोजित करते है । दशहरे के कुछ दिन पहले से इस त्यौहार की शुरुवात हो जाती है रामलीला मैदान में बहुत बड़ा राम लीला का आयोजन किया जाता है और कई बड़े- बड़े लोग इस राम लीला का हिस्सा बनते है। दशहरे के दिन रामलीला का अंतिम अध्याय दिखाया जाता है जहां रावण का वध कर श्री राम भगवान की विजय दिखाई जाती है। आपको बता दे इस राम लीला को देखने के लिए आम लोगों से लेकर खास लोग यानि कई बड़े बड़े मंत्री तक आते है । भारत के प्रधान मंत्री भी इस कर्यक्रम को देखने के साथ – साथ इसका समापन भी उन्ही के हाथों होता है।

कोटा का दशहरा

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शॉपिंग के लिए भी बहुत प्रसिद्ध है ये मेला

राजस्थान में वैसे तो बहुत सारे त्यौहार मनाये जाते है। परन्तु कोटा का दशहरा पूरे भारत में प्रसिद्ध है, यह त्यौहार मनाने हर राज्य के लोग आते है । यहां के त्यौहार की सबसे बड़ी खासियत है यहां होने वाला मेला। जो की नवरात्री के पहले दिन से शुरू होता है और लगभग एक महीने तक चलता है और कोटा का ये मेला भारत में प्रसिद्ध है । विजयदशमी के दिन 75 फुट लंबा रावण और मेघनाथ के पुतले को जलाया जाता है । इस मेले को देखने कई विदेशी पर्यटक भी आते है और राजस्थान की कई प्रसिद्ध हाथों की बनी चीज़ें की खरीदी करते है ।

अगर आपने दशहरा की छुट्टी ले रखी है और आप भारत में ही कही घूमने जाना चाहते हैं तो ज़रूर जाए इन राज्यों में और देखे उनकी संस्कृति को और भी करीब से। उनकी के साथ दशहरा का त्योहार उन्ही के अंदाज़ में मनाएं ।