राजस्थान जहां सिर्फ रेगिस्तान हैं, वहां ख़ास मॉनसून के लिए एक महल बनाया गया है। इस महल का नाम है, ‘डीग पैलेस’। इस नाम का अर्थ है ‘प्लेस ऑफ़ मॉनसून’। यहां का आर्किटेक्चर और सजावट बरसात में छानेवाले काले बादलों और सुनहरे आसमान को दिखाता है।

दिल्ली और आगरा के बीच स्थित इस डीग पैलेस में 18 वीं शताब्दी की शुरुआत में जाट राजाओं की हुकूमत थी। इस महल को रॉयल फॅमिलीज़ के लिए एक समर रिज़ॉर्ट में बदल दिया गया था। इस महल के आर्किटेक्चर में मुग़लों और राजपूतों के दौर की झलक नज़र आती है।

अन्य राजस्थानी स्थलों से अलग डीग पैलेस की विशेष मूर्तियां इसे अलग बनाती है, जिसे खास मॉनसून के लिए बनाया गया है।

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अपना शासन पाने के बाद राजा बदन सिंह ने 1730 ईसवी में डीग पैलेस का निर्माण पुनः नए रूप में करवाया था। वह भरतपुर में जाट हाउस के फाउंडर बने और उनके राज में इस जगह ने बहुत विकास किया। उनके बेटे जाट वंश के राजकुमार सूरजमल ने बाद में इस महल के चारों ओर एक किले का निर्माण किया, ताकि इस महल को बाहरी हमलों से बचाया जा सकें।

डीग पैलेस की छत और दीवारों के फर्श पर मॉनसून से जुड़े अनोखे और खूबसूरत डिज़ाइन्स दिखते हैं।

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जैसे ही आप केशव भवन में प्रवेश करते हैं, आप आसपास की दीवारों पर छोटे छेद देख सकते हैं, जहां से आप पर पानी की बूंदे बरसती है और आपको मॉनसून का एहसास होता है। साथ ही, यहां एक पानी का फाउन्टन है, जिसके चारों ओर केनन बॉल्स से भरी एक चैनल है। जब ये केनन बॉल्स चैनल के पानी में बहते हैं, तो इनमे से गरजनेवाली आवाज़ आती है, जो बिलकुल बादलों के गरजने की आवाज़ से मिलती है।

कई सालों पहले, हर महीने महल के टैंक में कुल चार कुओं से पानी भरा जाता था। आज इस टैंक को ऐसी जगह पर रखा गया है, जहां से घुड़साल एकदम पास में है। ठन्डे पानी के इस टैंक के कारण पास के घुड़साल में भी ठंडक होती है और घोड़ों को राहत रहती है।

डीग पैलेस के पास ‘गोपाल सागर’ नाम का एक तालाब भी है। यह ‘गोपाल सागर’ तालाब ‘सावन’ और ‘भादो’ नामक जगहों से घिरा हुआ है, जिनके नाम भारतीय कैलेंडर में मॉनसून के महीनों के नाम पर रखे गए हैं।

महल की पौराणिक डिज़ाइन हमें पिछले ज़माने की याद दिलाती है

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यह महल ‘चारबाग गार्डन’ से घिरा हुआ है, जो मुगल स्टाइल में बनाया गया था। इस गार्डन को चौकोर आकर में बनाया गया था, जिसके कुछ हिस्सों में आपको पानी के चैनल्स और फाउंटेंस दिखाई देते हैं। यह एक शानदार बात है कि उस दौर की रॉयल फैमिलीज़ ने इस प्रकार के गार्डन्स का निर्माण किया था।

मॉनसून में डीग पैलेस जाना यानी उस दौर की रॉयल्टी को फिर एक बार जीने जैसा लगता है। बर्ड लवर्स के लिए यहां पास में भरतपुर बर्ड सैंक्चुरी भी है, जहां मॉनसून में जाने का मज़ा ही कुछ और होता है।

भरतपुर नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे के माध्यम से भारत के ज़्यादातर प्रमुख रेलवे स्टेशनों से जुड़ा हुआ है। भरतपुर जाने के लिए आप पहले आगरा या जयपुर की फ्लाइट से, फिर वहां से बाय रोड भी जा सकते हैं।

तो इस साल, ख़ास बारिश का आनंद के लिए बनाए गए राजस्थान के इस महल में ज़रूर जाएं।