भारत के नॉर्थ-ईस्ट हिस्से में घूमनेवाले ज़्यादातर लोग असम के नेशनल पार्क्स, तवांग के मठों और बारिश से भीगे हुए शहर चेरापूंजी जैसी लोकप्रिय जगहों पर घूमने जाना पसंद करते हैं। साथ ही, बहुत से यात्री मेघालय में केविंग भी करते हैं। इसके अलावा मणिपुर में खांगखुई मंगसोर नामक एक पुरानी गुफा भी है, जिसके बारे में ज़्यादा लोग नहीं जानते हैं। दरअसल, यह गुफा मणिपुर का असली खज़ाना है।

उखरुल के मणिपुरी जिले से लगभग 16 किलोमीटर दूर स्थित, यह जगह घूमने के लिए बहुत ही खुबसुरत डेस्टिनेशन है। खांगखुई भारत के तांगखुल नागा ट्राइब का एक गांव है। यह गांव मुख्य रूप अपने लाइमस्टोन केव्स के लिए जाना जाता है।

मंगसोर में अब बहुत कम लाइमस्टोन फोर्मेशन्स बचे हैं

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खांगखुई मंगसोर की गुफाएं क्रेटेशियस लाइमस्टोन से बनी हैं। पैलियोलिथिक दौर में बनी खांगखुई मंगसोर गुफा भारत की सबसे पुरानी गुफाओं में से हैं।

यहां पर घूमना एक रोमांचक अनुभव होता है। यह गुफाएं गहरी होती हैं और अक्सर रात के अंधेरे में इसके लाइमस्टोन से बने खंभे चमकते हैं। यह एक जादुई दृश्य होता है।

चौंका देनेवाली बात यह है कि इस गुफा के अंदर मांगसरवुंग (Mangsorwung) नामक एक राजा ने अपनी दो पत्नियों और पुत्रों के लिए महल बनवाया था। खांगखुई मंगसोर का मुख्य आकर्षण गुफा के बीच में स्थित विशाल हॉल है, जिसे उस राजा का दरबार, या थ्रोन रूम कहा जाता था। राजा ने गुफा में अपनी दोनों पत्नियों और पुत्रों के आराम के लिए कक्ष भी बनवाया था। इस अंधेरे गहरी गुफा का उत्तरी हिस्सा राजा और उनकी पत्नियों का शाही बेडरूम हुआ करता था, जहां वह उनके साथ आराम करते थे।

पौराणिक राजाओं ने इस गुफा के कक्षों का इस्तेमाल किया है

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स्थानीय लोककथाओं के अनुसार इस गुफा से एक गुप्त सुरंग निकलती है जो कि वहां स्थित लोकतक झील तक जाती हैं। एक और रहस्य की बात यह है कि यहां पर चीनी सभ्यता के समान ही केतली और कटलरी की खुदाई की जाती थी।

गुफाओं के बाहर का नज़ारा बेहद खूबसूरत है

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यहां केविंग के लिए किसी स्पेशल ट्रेनिंग की ज़रूरत नहीं होती है। यदि आप यहां केविंग करना चाहते हैं, तो आपको यहां के ट्राइबल लोगों से मदद लेनी चाहिए क्योंकि वह इस स्थान से जुड़े सभी रास्तों और लोककथाओं सबसे अच्छी तरह से जानते हैं और उसे समझने में आपकी सहायता कर सकते हैं।

तो इस मॉनसून में भारत की गहराईयों को और भी करीब से देखने के लिए पहुंच जाएं खांगखुई मंगसोर।