10 नहीं, 20 नहीं पूरे 1000 दरवाजों वाले महल के बारे में सुना है आपने? ये महल कोई आम महल नहीं, बल्कि इतिहास की ख़ास धरोहर है, जिसे देखने हर साल हज़ारों पर्यटक आते हैं। आइये बताते हैं कहां है ये महल और इसे किसने बनाया है। ये महल पश्चिम बंगाल में स्थित है, जिसे हजारद्वारी महल के नाम से जाना जाता है। भारत के ऐसे कई प्राचीन महल हैं, जो समय के थपेड़ों में टूट-फूट चुके हैं, लेकिन हजारद्वारी महल एक ऐसी धरोहर है, जिसे सरकार ने संभाल कर रखा है। आइये जानते हैं इस महल के बारे में कुछ खास बातें।

किसने करवाया इसका निर्माण?

इस महल का निर्माण 19वीं शताब्दी में नवाब निज़ाम हुमायूं ने करवाया था। इस दौरान पश्चिम बंगाल में उनका शासन काल चल रहा था। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में स्थित इस महल को पहले बड़ी कोठी के नाम से जाना जाता था। मुर्शिदाबाद उस वक्त बंगाल की राजधानी हुआ करती थी, इसी वजह से इस कोठी को बनाया गया था। इस महल को खास तौर पर जानेमाने वास्तुकार डंकन मैकलियोड ने यूरोपियन वास्तुशैली को ध्यान में रख कर बनाया था।

मुर्शिदाबाद उस वक्त बंगाल की राजधानी हुआ करती थी, इसी वजह से इस कोठी को बनाया गया था

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ये ख़ास बातें हैं महल की

यह महल तीन मंज़िलों में बांटा गया है, जो भागीरथी नदी के किनारे बसा है। इस महल में 114 कमरें हैं, जिनके कुल 100 दरवाज़े हैं। इसके अलावा 900 दरवाज़ों की प्रतिकृति बनाई गई है, जिसे देखकर कोई नहीं जान सकता कि ये वास्तविक दरवाज़ें नहीं है। यही वजह है कि इसे हजारद्वारी महल कहा जाता है।

क्यों बनाए गए थे ये दरवाज़े?

दरअसल इन दरवाज़ों को इसलिए बनवाया गया था, जिससे दुश्मनों को भ्रम हो और वह इसी महल में रास्ते ना ढूंढ पाएं। इससे दुश्मन आसानी से पकड़े जाते थे। यह महल कुल 41 एकड़ में फैला हुआ है, जिसका इस्तेमाल अंग्रेज़ों ने भी अपने शासन काल में किया है। 41 एकड़ में फैले इस महल में कई खास जगहें बनाई गई हैं, जिसमें मदीना मस्जिद, घड़ी घर, वासिफ मंज़िल, इमामबाड़ा के अलावा बच्चेवाली तोप भी मौजूद हैं, जिसमें एक साथ 18 किलो बारूद का इस्तेमाल किया जा सकता था। कहा जाता है कि इसका धमाका इतना दमदार था कि गर्भवती महिलाओं ने समय से पहले बच्चों को जन्म दे दिया था। इसलिए इसे बच्चेवाली तोप का नाम दिया गया था।

इसका धमाका इतना दमदार था कि गर्भवती महिलाओं ने समय से पहले बच्चों को जन्म दे दिया था

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संग्रहालय है ख़ास

पर्यटक इस महल की खूबसूरती के साथ-साथ यहां मौजूद संग्रहालय को भी देख सकते हैं। प्राचीन काल की अद्भुत और अनदेखी वस्तुएं इस संग्रहालय की शान बढ़ाती हैं। इस संग्रहालय में 27000 से भी ज़्यादा हथियार रखे गए हैं। इसके अलावा वहीं विंटेज कारों का काफिला भी आपका ध्यान आकर्षित करेगा। इस संग्रहालय के कई हिस्से हैं, जिसमें प्रमुख रूप से शस्त्रागार विंग, बिलबोर्ड विंग, दरबार हॉल, पश्चिमी ड्राइंग कक्ष इत्यादि बेहद सुन्दर हैं।

कैसे पहुंचे?

आप चाहें तो मुर्शिदाबाद पहुंचने के लिए ट्रेन का सफर कर सकते हैं। वहीं आप कोलकाता तक की फ्लाइट ले कर रोड के ज़रिये मुर्शिदाबाद पहुंच सकते हैं। यह महल साल के 12 महीने पर्यटकों के लिए खुला रहता है, इसलिए आप जब चाहें तब यहां की यात्रा कर सकते हैं।

मेरी आवाज़ ही पहचान है! संगीत मेरी कल्पना को पंख देता है.. किताबी कीड़ा, अडिग, जिद्दी, मां की दुलारी.. प्राणी प्रेम ऐसा कि लोग मुझे लगभग पागल समझते हैं! खाने के लिए जीनेवाली और हद दर्जे की बातूनी.. लेकिन मेरा लेखन आपको बोर नहीं करेगा..