दुनिया में हर सेकंड आबादी बढ़ रही है। हमारे देश की भी यही समस्या है कि यहां रहने वाले दिन पर दिन बढ़ते चले जा रहे हैं। ऐसे में सरकार लोगों नियोजन की ओर ले जाने की कोशिश कर रही हैं। लेकिन दुनिया का एक गांव ऐसा है, जिसे इन सब की कोई ज़रूरत नहीं हैं। इस गांव का नाम है कलाच, जो अपनी आबादी को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है। यह गांव सिर्फ यहां रहने वालों की जनसंख्या की वजह से जाना जाता है। ऐसा क्यों है, यह हम आपको बताते हैं।

क्यों है ये गांव फेमस?

यह रूस का आखिरी गांव है, जहां की आबादी सिर्फ और सिर्फ 12 लोगों की है

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इस गांव को इसीलिए लोगों का आकर्षण मिला है, क्योंकि यहां की जनसंख्या बेहद कम है। यूक्रेन के बॉर्डर से लगे रूस देश के इस गांव को इसी वजह से दुनिया भर में जाना जाता है। यह रूस का आखिरी गांव है, जहां की आबादी सिर्फ और सिर्फ 12 लोगों की है। यहां रहने वाले सभी लोग नौजवान हैं और नौकरी करते हैं। यदि आप सोच रहे हैं कि आखिर इस गांव की आबादी इतनी कम क्यों है, तो इसका कारण हम आपको बताते हैं।

क्यों इतनी कम है इस गांव की आबादी?

यह यूक्रेन की सीमा से सटा हुआ रूस का आखिरी गांव बन गया

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कहा जाता कि रूस के सोवियत यूनियन के अंतर्गत आने वाला यह गांव पहले 3000 से भी ज़्यादा लोगों से भरा हुआ था। उस समय यह यूक्रेन का हिस्सा था। लेकिन जब 1992 में सोवियत यूनियन का बंटवारा हुआ, तो यूक्रेन एक अलग देश के रूप में सामने आया। यही वजह है कि यह यूक्रेन की सीमा से सटा हुआ रूस का आखिरी गांव बन गया।

कैसा है यह गांव?

यहां सुबह और शाम को रेलवे का सिर्फ एक डब्बा आता है और लोगों के लिए परिवहन का यही एक रास्ता बचा हुआ है

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आपको जान कर हैरानी होगी कि रूस की रेलवे लाइन इस गांव पर आकर खत्म हो जाती है, इसीलिए यह रूस का आखिरी गांव ही नहीं, बल्कि आखरी स्टेशन भी है। यहां सुबह और शाम को रेलवे का सिर्फ एक डब्बा आता है और लोगों के लिए परिवहन का यही एक रास्ता बचा हुआ है। यह गांव चारों ओर से बर्फ से ढका हुआ होता है, इसीलिए नए लोगों को यहां रहने की हिम्मत नहीं होती। यदि आप भी इस गांव को देखना चाहते हैं, तो आपको सुबह और शाम को गांव के रहवासियों के साथ गांव तक जाना होगा।

ऐसी थी पहले गांव की स्थिति

लोग किसानी और पशु पालन करते थे, जिससे इनका गुजर-बसर होता था

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इस गांव में कुछ सालों पहले तक 600 लोग रहते थे, लेकिन अब गांव के कुछ लोग रूस को छोड़कर दूसरे देशों में जा चुके हैं। बाद में यहां के बचे हुए लोग किसानी और पशु पालन करते थे, जिससे इनका गुजर-बसर होता था। लेकिन धीरे-धीरे यह सभी लोग अपने-अपने परिवारों के साथ दूसरे शहरों में चले गए और अंत में इस गांव में सिर्फ 12 लोग बच कर रह गए। ये लोग अब काम के लिए इस गांव से बाहर जाते हैं। इन लोगों को अपने गांव से काफी लगाव है, यही वजह है कि वे अपने गांव को छोड़कर जाना नहीं चाहते हैं।

अपनी मिट्टी से जुड़े हुए यह लोग दुनिया भर में सिर्फ इसलिए मशहूर है, क्योंकि इन्हीं की वजह से बना है दुनिया की सबसे कम आबादी वाला गांव।

मेरी आवाज़ ही पहचान है! संगीत मेरी कल्पना को पंख देता है.. किताबी कीड़ा, अडिग, जिद्दी, मां की दुलारी.. प्राणी प्रेम ऐसा कि लोग मुझे लगभग पागल समझते हैं! खाने के लिए जीनेवाली और हद दर्जे की बातूनी.. लेकिन मेरा लेखन आपको बोर नहीं करेगा..