भारतीय हिंदू कैलेंडर के अनुसार सावन के महीने की शुरुआत हो चुकी है। सावन का यह महीना हिंदू संस्कृति में काफी शुभ माना जाता है। यह पूरा महीना भगवान शिव को समर्पित किया गया है। इस दौरान देश के जगह जगह पर अलग-अलग मंदिरों में शिवभक्त शिवलिंग के दर्शन करने पहुंचते हैं। इसी महीने में कांवड़ यात्रा की शुरुआत भी की जाती है, जिसमें कांवड़ में जल और दूध लेकर कई किलोमीटर की यात्रा की जाती है और इस अभिषेक के जल को शिवलिंग पर चढ़ाया जाता है।

सावन के इसी महीने में शिव जी के कुछ खास मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती जाती है। हिंदुस्तान में कई ऐसे शिव मंदिर हैं, जो अपनी ऐतिहासिक मान्यता और पौराणिक कथाओं की वजह से लोगों के बीच चर्चित है। ऐसे ही कुछ प्रमुख शिव मंदिरों के बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं। साथ ही हम आपको यह भी बताएंगे कि इन मंदिरों तक कैसे पहुंचा जाए।

काशी विश्वनाथ

बनारस के इस विश्वनाथ मंदिर में बना शिवलिंग 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है

बनारस का काशी विश्वनाथ मंदिर लोगों के बीच एक श्रद्धा की जीती जागती मिसाल है। महादेव की इस नगरी में सावन के महीने में भीड़ देखने लायक होती है। यहां दूर-दूर से श्रद्धालु अपने मन में मुराद लेकर शिव जी के दर्शन करते हैं। इस महीने में उपवास रखकर भक्त शिव जी कीआराधना करते हैं और गंगा में डुबकी लगाने के बाद बाबा विश्वनाथ पर जल का अभिषेक भी करते हैं। बनारस के इस विश्वनाथ मंदिर में बना शिवलिंग 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यही वजह है कि यहां की महत्ता लोगों के बीच काफी बड़ी है। इसके अलावा बनारस एक खूबसूरत शहर है, जिसे देखने का मोह लोग छोड़ नहीं पाते।

कैसे पहुंचे मंदिर तक?

बनारस पहुंचने के लिए रेल का सफर आसान साबित होता है। रेल के सफर में आप बनारस रेलवे स्टेशन तक अलग-अलग शहरों से आने वाली गाड़ियों से आ सकते हैं। यह देश के कई प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। वहीं यदि आप सड़क से यात्रा करना चाहते हैं, तो टैक्सी और बस से शहर में पहुंचना बेहद आसान है। आप चाहें तो इलाहाबाद, कानपुर और लखनऊ जैसे शहरों से आसानी से बस की मदद से पहुंच सकते हैं। यदि आप हवाई जहाज़ से आना चाहें, तो बनारस का बाबतपुर हवाई अड्डा फेमस है।

महाकालेश्वर मंदिर

उज्जैन का मौसम श्रद्धालुओं को बेहद पसंद आता है

उज्जैन का चर्चित महाकालेश्वर मंदिर श्रद्धालुओं का पसंदीदा मंदिर है। शिप्रा नदी के पास बसा यह शहर सावन के महीने में शिव भक्तों का गढ़ बन जाता है। उज्जैन का मौसम श्रद्धालुओं को बेहद पसंद आता है। यहां का तापमान सुगम बना रहता है, जिससे आप आसानी से महाकालेश्वर के दर्शन कर सकते हैं। इसके अलावा उज्जैन जैसे ख़ूबसूरत शहर में घूमना आपके लिए एक बेहतरीन अनुभव हो सकता है।

कैसे पहुंचे उज्जैन?

उज्जैन तक पहुंचने के लिए आपको वायु मार्ग, सड़क मार्ग और रेल मार्ग तीनों सुगम महसूस होंगे। उज्जैन का कोई अपना एयरपोर्ट नहीं है, इसका सबसे करीबी एयरपोर्ट इंदौर है। जहां से आप को करीब 58 किलोमीटर की सड़क यात्रा करनी होगी। इसके लिए आप बस या टैक्सी का इस्तेमाल कर सकते हैं। वहीं उज्जैन का स्टेशन कई बड़े शहरों के स्टेशनों से जुड़ा हुआ है, इसीलिए यहां सीधी ट्रेन सेवा आपके लिए उपलब्ध होगी। यदि आप सड़क मार्ग का इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो यह हर शहर से अच्छी तरह से कनेक्टेड है। नेशनल हाईवे 48 और नेशनल हाईवे 52 का इस्तेमाल आप उज्जैन पहुंचने के लिए कर सकते हैं।

सोमनाथ मंदिर

यह एक ऐसा प्राचीन मंदिर है, जो इतिहास में ख़ास जगह रखता है

गुजरात का सोमनाथ मंदिर लोगों के बीच काफी चर्चित है। उत्तर भारत के मुकाबले गुजरात में सावन का मेला अलग तरह से मनाया जाता है। यहां पूजा पाठ के अलावा सुवासित पकवानों का प्रसाद भी चखने लायक होता है। यह एक ऐसा प्राचीन मंदिर है, जो इतिहास में ख़ास जगह रखता है। यही वजह है कि लोग यहां हर साल दर्शन के लिए आते हैं।

कैसे पहुंचे सोमनाथ?

सोमनाथ से मात्र 50 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद है केशोद हवाई अड्डा, जहां से आप सड़क यात्रा के ज़रिये सोमनाथ पहुंच सकते हैं। इसके अलावा वेरावल सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन है, 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। वहीं सोमनाथ के लिए कई बड़े शहरों से सीधी बस यात्रा भी की जा सकती है।

त्रम्बकेश्वर मंदिर

इस क्षेत्र में आपको कई बड़े महात्माओं के तपस्या स्थान दिखाई देंगे

महाराष्ट्र के नासिक के पास बसे त्रम्बकेश्वर मंदिर की सुंदरता की बात ही निराली है। महाराष्ट्र के नासिक क्षेत्र में चारों ओर हरियाली दिखाई देती है। यह भगवान् शिव का ऐसा मंदिर है, जो ऐतिहासिक महत्त्व रखता है। इस क्षेत्र में आपको कई बड़े महात्माओं के तपस्या स्थान दिखाई देंगे, जहां आज बह भक्त जाकर श्रद्धा से शीश नवाते हैं। साथ ही यह स्थान बेहद खूबसूरत है, जहां आपको घूमने-फिरने की कई जगहें मिलेंगी।

कैसे पहुंचे त्रम्बकेश्वर?

त्रम्बकेश्वर पहुंचने के लिए आपको सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन मिलेगा नासिक, जहां लगभग हर बड़े शहर से ट्रेनें आकर रूकती है। यहां से आप बस या टैक्सी की मदद से त्रम्बकेश्वर तक पहुंच सकते हैं। वहीं बस से अभी यहां की कनेक्टिविटी बेहद अच्छी है। यदि आप हवाई मार्ग का इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो त्रम्बकेश्वर से सबसे नज़दीकी एयरपोर्ट मुंबई है, जहां से आप बस या ट्रेन की मदद से त्रम्बकेश्वर पहुंच सकते हैं।

बैजनाथ धाम मंदिर

यह मंदिर भी बारह ज्योतिर्लिंगों मन से एक माना जाता है

झारखंड के देवघर शहर में बसा बाबा बैजनाथ का ये मंदिर शिव भक्तों का गढ़ माना आता है। यहां भी कांवड़ियों का जमावड़ा हर साल लगा रहता है। बैजनाथ धाम के नाम से प्रचलित ये मंदिर सावन के महीने में श्रद्धालुओं से भरा रहता है। यह मंदिर भी बारह ज्योतिर्लिंगों मन से एक माना जाता है। इस स्थान का पौराणिक महत्त्व भी है। कहा जाता है कि इस स्थान सती का हृदय गिरा था, इसलिए इस जगह को तपोभूमि का नाम दिया गया है।

कैसे पहुंचे देवघर?

देवघर पहुंचने के लिए आपको रेलमार्ग का इस्तेमाल करना चाहिए। यहां लगभग हर बड़े शहर से आनेवाली गाड़ियां रुकती हैं। इसके अलावा आप सड़क मार्ग से भी यहां पहुंच सकते हैं। सड़क मार्ग से भी यहां की कनेक्टिविटी अच्छी मानी जाती है। यदि आप हवाई मार्ग से आना चाहते हैं, तो यहां से सबसे नज़दीकी एयरपोर्ट पटना है। यहां से आप रोड ट्रिप के ज़रिये देवघर तक पहुंच सकते हैं।

इस तरह भगवान शिव के इन मंदिरों तक पहुंचना आपके लिए बेहद आसान है।

मेरी आवाज़ ही पहचान है! संगीत मेरी कल्पना को पंख देता है.. किताबी कीड़ा, अडिग, जिद्दी, मां की दुलारी.. प्राणी प्रेम ऐसा कि लोग मुझे लगभग पागल समझते हैं! खाने के लिए जीनेवाली और हद दर्जे की बातूनी.. लेकिन मेरा लेखन आपको बोर नहीं करेगा..