जन्माष्टमी का पावन त्यौहार आ चुका है। इस साल यह त्योहार 24 अगस्त को मनाया जा रहा है। कान्हा के स्वागत की तैयारियां पूरी हो चुकी है और उनके जन्म की पलके बिछा कर राह देखी जा रही है। जन्माष्टमी का त्योहार हमारे देश में धूमधाम से मनाया जाता है। जहां एक और मथुरा, वृंदावन, गोकुल और द्वारका में इसकी धूम कई महीने पहले से दिखाई देती है, वहीं दूसरी ओर जगन्नाथ पुरी में इसकी अलग ही छटा लोगों को जन्माष्टमी के अवसर पर दिखाई देती है। आइये जानते हैं जगन्नाथ पूरी में किस तरह ये त्यौहार मनाया जाता है।

झांकियां ही झांकियां

यहां 17 दिन तक अलग-अलग कल्चरल प्रोग्राम्स का आयोजन किया जाता है

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जैसा कि आप जानते हैं जन्माष्टमी के त्योहार मनाने के लिए लोग विभिन्न मंदिरों में जाकर माथा टेकते हैं, लेकिन जगन्नाथ पुरी में इस त्यौहार को बिल्कुल अलग तरह से मनाया जाता है। उड़ीसा के फेमस जगन्नाथ पुरी में यह त्यौहार 2 सप्ताह पहले से ही शुरू हो जाता है। जगन्नाथ मंदिर के पास यहां 17 दिन तक अलग-अलग कल्चरल प्रोग्राम्स का आयोजन किया जाता है। साथ ही मध्य रात्रि में होने वाली आरती और रोज होने वाली प्रार्थना में भी सैकड़ों श्रद्धालु शामिल होता है। 2 सप्ताह तक लगातार पूरी में श्री कृष्ण और उनके बाल लीलाओं से संबंधित झांकियां निकाली जाती हैं और अलग-अलग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।

जन्माष्टमी का भोज होता है विशेष

लेकिन इस पूरे आयोजन में लोगों का ध्यान आकर्षित करता है यहां का विशेष प्रकार का भोग। दरअसल यहां एक विशेष प्रकार का भोग बनाया जाता है। माना जाता है कि यह भोग देवकी मां को प्रसव के दर्द में आराम देता है और इसके बाद भगवान श्री कृष्ण जन्म लेते हैं। जन्माष्टमी की रात जब श्री कृष्ण के जन्म की घड़ी आती है, तब भगवान कृष्ण के झूले को फूलों से सजाया जाता है।

भगवान के जन्म से रस्मों की शुरुआत

कृष्णा और राधा के लिबास में बच्चे रासलीला का खूबसूरत आयोजन भी करते हैं

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इस दिन के रस्म की शुरुआत कान्हा के जन्म से होती है। इसके बाद अलग-अलग समुदाय उनकी जन्म से लेकर बाल लीलाओं को अलग-अलग कार्यक्रमों के दौरान लोगों के सामने रखते हैं। यहां तक कि कृष्णा और राधा के लिबास में बच्चे रासलीला का खूबसूरत आयोजन भी करते हैं। यहां की खास बात यह है कि कान्हा का जन्म उत्सव जन्माष्टमी से लेकर अगले 17 दिनों तक चलता है। इस मौके पर दही हांडी का आयोजन भी बड़ी धूमधाम से किया जाता है।

इस तरह जगन्नाथ पूरी में जन्माष्टमी का ये त्यौहार बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाता है।

मेरी आवाज़ ही पहचान है! संगीत मेरी कल्पना को पंख देता है.. किताबी कीड़ा, अडिग, जिद्दी, मां की दुलारी.. प्राणी प्रेम ऐसा कि लोग मुझे लगभग पागल समझते हैं! खाने के लिए जीनेवाली और हद दर्जे की बातूनी.. लेकिन मेरा लेखन आपको बोर नहीं करेगा..