दुनिया भर में कई ऐसे मंदिर हैं, जहां से जुड़े कई रहस्यों के बारे में आप जान सकेंगे। आज हम आपको चीन के एक ऐसे टैम्पल के बारे में बताने जा रहे हैं, जो कई सौ सालों से सिर्फ एक पिलर पर खड़ा हुआ है। इस मंदिर में जाना बेहद मुश्किल है, आपके लिए बेहद मुश्किल साबित हो सकता है और इसकी वजह है यहां के दुर्गम रास्ते। आइये जानते हैं इस मंदिर के बारे में खास बातें।

क्या ख़ास है इस मंदिर में?

यह मंदिर पहाड़ों से ऊंचे ऊंचे पहाड़ों के बीच सिर्फ एक लकड़ी के खंभे पर टिका हुआ है

चीन के इस मंदिर का नाम गंलु मंदिर है, जो भगवान बुद्ध का है। यह मंदिर चीन के दक्षिण-पश्चिम के पहाड़ी इलाके में बसा हुआ है। इस मंदिर की खासियत ये है कि यह 1667 में बनाया गया था। यह मंदिर 260 फीट की ऊंचाई पर बना हुआ है। इस मंदिर के नाम का भी एक खास महत्व रखता है, क्योंकि इस मंदिर के नाम का अर्थ होता है ओस की बूंद। ओस की बूंद यह नाम इस पर जंचता भी है, क्योंकि यह मंदिर पहाड़ों से ऊंचे ऊंचे पहाड़ों के बीच सिर्फ एक लकड़ी के खंभे पर इस तरह टिका हुआ है, जैसे किसी फूल पर ओस की बूंद जमी होती है।

क्या है इस मंदिर का महत्त्व?

इस मंदिर की बनावट देखने लोग दूर-दूर से आते हैं

एक लकड़ी के खम्बे पर खड़े इस मंदिर को देखना अपने आप में एक खास अनुभव साबित हो सकता है। इस मंदिर की खासियत यह है कि यहां वे दंपत्ति आते हैं, जो निसंतान होते हैं। कहा जाता है कि निसंतान दंपत्ति यदि पूरे मन से और सच्ची श्रद्धा से यहां मन्नत मांगते हैं, तो उन्हें जल्द ही संतान सुख की प्राप्ति होती है। इसके अलावा इस मंदिर की बनावट देखने लोग दूर-दूर से आते हैं। लोगों के लिए यह बेहद अचंभित करने वाली बात होती है कि एक लकड़ी के खंभे पर इतना बड़ा भारी भरकम मंदिर कैसे टिका हुआ है।

38 हज़ार स्कवेयर फ़ीट पर बने इस मंदिर में महावीर हॉल, बेल टावर, ड्रम टावर, रिंग रूम इत्यादि बनाए गए हैं। माउंट जियुहा पर बना ये ख़ूबसूरत मंदिर चारों ओर से पाइन ट्री से घिरा हुआ है। ये चाइनीज़ अर्किटेक्चर का एक ख़ूबसूरत नमूना है, जिसे हर साल हज़ारों टूरिस्ट देखने आते हैं।

इस मंदिर को ‘ये ज़किया’ ने बनवाया था, कहा जाता है कि ये गंलु मंदिर उनकी मां की याद में बनवाया गया है। चीन के अनुहा में कविंग्यं के जंगलों में इस मंदिर का निर्माण हुआ है। यदि आप भी चीन की यात्रा का प्लान बना रहे हैं, तो आपको इस मंदिर को ज़रूर देखना चाहिए।

मेरी आवाज़ ही पहचान है! संगीत मेरी कल्पना को पंख देता है.. किताबी कीड़ा, अडिग, जिद्दी, मां की दुलारी.. प्राणी प्रेम ऐसा कि लोग मुझे लगभग पागल समझते हैं! खाने के लिए जीनेवाली और हद दर्जे की बातूनी.. लेकिन मेरा लेखन आपको बोर नहीं करेगा..