आपने दुनिया के ख़ास और अजीबो-गरीब गांव के बारे में सुना होगा, कोई संस्कृत में बात करता है, तो कहीं सिर्फ जुड़वा बच्चे पैदा होते हैं। कहीं हर घर में सांप रहते हैं, तो कहीं किसी घर में सुरक्षा के लिए दरवाज़े नहीं लगाए जाते। ऐसे गांव हमें हमेशा अचंभित कर देते हैं। पर क्या आपने कभी ऐसे गांव के बारे में सुना है, जहां लोग शतरंज खेलने के लिए जाने जाते हैं? आज हम आपको ऐसे ही एक गांव की कहानी सुनाएंगे, जहां एक हज़ार लोगों ने एक साथ शतरंज खेल कर एशिया रिकॉर्ड बनाया है।

कौन सा है ये गांव?

एक हज़ार लोगों ने एक साथ शतरंज खेल कर एशिया रिकॉर्ड बनाया है

 

केरल का त्रिशूर जिला, जहां स्थित है मारोत्तीचल गांव। जहां पहले लोग पैर रखने से डरते थे। इसका कारण था गांव के लोगों की नशे की लत। इसी वजह से यहां के लोग अपनी ज़िन्दगी बर्बाद करने पर उतारू हो चुके थे। लेकिन फिर एकाएक एक व्यक्ति ने उनकी ज़िन्दगी में कदम रखा और लोगों ने ऐसी बुरी लत का साथ छोड़ दिया।

कैसे बदला ये गांव?

उन्नीकृष्णन खुद स्टेट लेवल पर मैच जीत चुके हैं

 

मारोत्तीचल जहां अपनी कुख्याति की वजह से बर्बाद हो रहा था, वहीं सी उन्नीकृष्णन ने इसके रहवासियों की ज़िन्दगी बदल दी। उन्होंने देख कि नशे की लत की वजह से कैसे लोग अपनी ज़िन्दगी बर्बाद कर रहे हैं, तो उन्होंने अमेरिका के चेस खिलाड़ी बौबी फिशर के प्रभाव में आकर चेस सीखने की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे गांव जाकर लोगों को इसे सिखाने की शुरुआत की। लोगों ने धीरे-धीरे इसमें मन लगाया और नशे की लत छोड़ दी। यह बात थी 70 से 80 के दशक की, इसके बाद यहां के लोगों की दिनचर्या में चेस शामिल हो गया। उन्नीकृष्णन खुद स्टेट लेवल पर मैच जीत चुके हैं। साल 2016 में यहां के 1000 लोग एक साथ चेस खेलकर एशिया अवार्ड में भी अपना नाम दर्ज करवा चुके हैं। इस गांव का नाम तब से चेस गांव भी पड़ चुका है।

क्यों पसंद है पर्यटकों को ये स्थल

शतरंज पसंद करनेवाले यहां के गांव वालों के साथ अपने हुनर को आज़माते हैं

 

पर्यटकों को अब ये स्थल बेहद पसंद आने लगा है। यह जगह न सिर्फ अपनी खूबसूरत पहाड़ियों की वजह से लोगों के बीच जाना जाता है। बल्कि यहां आकर पर्यटक शतरंज खेलने की भी इच्छा रखते हैं। शतरंज पसंद करनेवाले यहां के गांव वालों के साथ अपने हुनर को आज़माते हैं।

कैसे पहुंचे यहां?

इस गांव तक पहुंचने के लिए आपको केरल तक रेल या हवाई यात्रा के ज़रिये पहुंचना होगा। इसके बाद आप सड़क मार्ग से इस गांव में पहुंच सकते हैं। तो देर किस बात की, शतरंज की बाज़ी लगानी हो, तो चेस गांव की यात्रा का प्लान बना ही डालिये।

मेरी आवाज़ ही पहचान है! संगीत मेरी कल्पना को पंख देता है.. किताबी कीड़ा, अडिग, जिद्दी, मां की दुलारी.. प्राणी प्रेम ऐसा कि लोग मुझे लगभग पागल समझते हैं! खाने के लिए जीनेवाली और हद दर्जे की बातूनी.. लेकिन मेरा लेखन आपको बोर नहीं करेगा..