आज हम आपको बताने जा रहे हैं भारत के सबसे गहरे कुएं या कहें सीढ़ी नुमा बावड़ी के बारे में, जो जयपुर के निकट दौसा जिले के आभानेरी नामक ग्राम में स्थित है। यह बावड़ी चांद बावड़ी के नाम से जानी जाती है और इसे हर्षद माता मंदिर के सामने बनाया गया है। इतिहासकारों की माने तो यह बावड़ी राजा चांद ने बनाई थी। यह बावड़ी भारत की नहीं, बल्कि विश्व की सबसे बड़ी सीढ़ीदार और गहरी बावड़ी है।

इसका निर्माण करीब 12 सौ साल पहले 9 वीं शताब्दी में किया गया था। इस बावड़ी के साथ एक कथा प्रचलित है, जिसमें कहा गया है कि इससे भूतों ने बनाया था। आइए जानते हैं चांद बावड़ी के बारे में कुछ खास बातें।

ऐसी है चांद बावड़ी

इसका निर्माण करीब 12 सौ साल पहले 9 वीं शताब्दी में किया गया था

यह बावड़ी 13 मंजिल ऊंची और सौ फुट गहरी है, जिसमें 3500 सीढ़ियां बनी हुई है। इस बावड़ी में सुरंग भी है, जो 17 किलोमीटर लंबी है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इस बावड़ी का निर्माण भूतों के आशीर्वाद से हुआ है। यहां तक कि इस स्थान को कई बार फिल्मों में भी दिखाया गया है।

इस बावड़ी का निर्माण राजा मिहिर भोज ने करवाया था, जिसे चांद राजा के नाम से जाना जाता था। यही वजह है कि इस बावड़ी का नाम चांद बावड़ी पड़ा। यह बावड़ी बहुत सुंदर और कलात्मक है और पुरातत्व कला का उत्तम नमूना है। चांदनी रात में यह बावड़ी सफेद दूधिया रंग की तरह दिखाई देती है, इसीलिए इसे अंधेरे-उजाले की बावड़ी के नाम से भी जाना जाता है। यह क्षेत्र सूखे की मार झेलता है, लेकिन साल भर इस बावड़ी में जमा हुआ पानी लोगों को ज़रूरत के वक्त काम आता है। ऐसी खूबसूरत बावड़ी के साथ एक पुराना किस्सा जुड़ा हुआ है, जो भूतों की कहानी बताता है।

क्या है यह कहानी?

इसे अंधेरे-उजाले की बावड़ी के नाम से भी जाना जाता है

इस बावड़ी के बनने की एक कथा प्रचलित है। सदियों पहले गांव के ठाकुर जयसिंह घोड़े पर बैठकर जोधपुर से रणसी गांव की ओर जा रहे थे। रास्ते में सेवकों के घोड़े आगे निकल गए और ठाकुर पीछे रह गए। राजा का घोड़ा थक गया और राजा ने तालाब को देखकर घोड़े को रोका और नीचे उतर गए। इस वक्त अर्द्धरात्रि हो चुकी थी। जयसिंह ने तालाब के किनारे एक आकृति देखी, जो तुरंत आदमी के रूप में बदल गई। उस आदमी ने कहा कि वह बहुत प्यासा है और वह इस तालाब को छू नहीं सकता। ठाकुर जयसिंह ने निडरता पूर्वक उस आत्मा को पानी पिला दिया। ठाकुर की निडरता और दयालुता देख कर भूत उनके अधीन हो गया और उसने कोई भी एक काम पूरा करने का उसे वरदान दिया।

इस पर ठाकुर ने अपने लिए एक गढ़, महल और पानी की बावड़ी मांगी। भूत ने कहा वह जो भी काम शुरु करेगा वह सौ गुना जल्दी पूरा होगा। लेकिन यदि राजा ने किसी को इस वरदान के बारे में बता दिया, तो काम वहीं रुक जाएगा। अगले ही दिन से ठाकुर ने बावड़ी का काम शुरू करवा दिया और यह सौ गुना जल्दी बनने लगी। लेकिन एक रात रानी ने इस बावड़ी की कहानी पूछी। राजा ने उससे कहानी बताने से इंकार कर दिया और इसी वजह से रूठकर रानी ने अनशन शुरु कर दिया। रानी की तबीयत दिन पर दिन बिगड़ती गई और इसी वजह से उस रात की कहानी जयसिंह ने अपनी पत्नी को बता दी।

यही वजह है कि बावड़ी का निर्माण कार्य रुक गया और इसका अंतिम हिस्सा नहीं बन पाया। वह आज भी ज्यों का त्यों अधूरा ही है। बावड़ी से जुड़ी इस कहानी को गांव के लोग बहुत चाव से लोगों को सुनाते हैं।

यदि आप भी चांद बावड़ी को देखना चाहते हैं और जयपुर के निकट ठहरे हैं, तो ज़रूर इस खूबसूरत ऐतिहासिक जगह को देखने जाएं।

मेरी आवाज़ ही पहचान है! संगीत मेरी कल्पना को पंख देता है.. किताबी कीड़ा, अडिग, जिद्दी, मां की दुलारी.. प्राणी प्रेम ऐसा कि लोग मुझे लगभग पागल समझते हैं! खाने के लिए जीनेवाली और हद दर्जे की बातूनी.. लेकिन मेरा लेखन आपको बोर नहीं करेगा..