भारत की पहचान उसके अलग-अलग गांव की वजह से होती है। ये गांव ही है जिन्होंने संस्कृति को आज भी संभाल कर रखा है। इन्ही गांवों से भारत की ताकत बनी हुई है। लेकिन जहां भारत को विविधता में एकता का देश कहा जाता है, वहीं यहां लोग अपनी अलग-अलग मान्यताओं के साथ ज़िंदगी जीते हैं। इसलिए भारत के कुछ ऐसे गांव हैं, जो अपनी अजीबो-गरीब मान्यताओं की वजह से लोगों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं। आज हम आपको भारत के कुछ ऐसे ही अनोखे गांवों के बारे में बताएंगे।

शनि शिंगणापुर (महाराष्ट्र)

यहां की दुकानें भी बगैर दरवाज़ों के बनी हुई है

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ये महाराष्ट्र का एक ऐसा गांव है, जिसके एक भी घर में दरवाज़ा नहीं बनाया गया है। यहां शनिदेव का प्राचीन मंदिर स्थित है। मान्यता के अनुसार यहां चोरी करनेवाला शनि देव के कोप से बच नहीं सकता। यहां तक कि यहां की दुकानें भी बगैर दरवाज़ों के बनी हुई है। यहां किसी प्रकार की चोरी की वारदातें नहीं होती।

शेतफल (महाराष्ट्र)

यहां लोग सांप की सबसे ज़हरीली प्रजाति कोबरा को भी पालते है

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ये महाराष्ट्र का गांव है, जहां पैर रखने से पहले लोग सौ बार सोचते हैं। इसकी वजह है यहां के सांपों की आबादी। यह एक छोटा सा गांव है, जहां अब तक पक्के घरों का निर्माण नहीं करवाया गया है। यहां के हर घर में एक छेद ज़रूर बनाया जाता है। ये सांप घर के अंदर ही लोगों के साथ रहते हैं। यहां हर घर में सांप पाले जाते हैं। आप जान कर हैरान रह जाएंगे कि यहां लोग सांप की सबसे ज़हरीली प्रजाति कोबरा को भी पालते है। हैरानी की बात तो ये है कि ये सांप न तो लोगों को काटते हैं और ना ही उन्हें नुकसान पहुंचाते हैं। इस स्थान को गांव के लोग देवस्थान मानते हैं। उनके अनुसार यहां देव आराम करते हैं।

जम्बुर (गुजरात)

इनके रीति-रिवाज आज भी अफ्रीकन रीति-रिवाज़ों से मिलते-जुलते हैं

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गुजरात का ये गांव अफ्रीकन विलेज के नाम से जाना जाता है। गुजरात के इस गांव में छोटा सा अफ्रिका बसता है। इसकी वजह ये है कि यहां रहनेवाले लोग बिल्कुल अफ्रीकन दिखाई देते हैं पर ये हैं असल में हिन्दुस्तानी। ये गांव गिर के जंगल में बसा हुआ है, जिसे जम्बुर नाम दिया गया है। ये सिद्दी नामक आदिवासी प्रजाति के लोग हैं, जो बिल्कुल विशुद्ध गुजराती बोलते हैं। लेकिन ये अफ्रीका के बनतु प्रजाति से जुड़े हुए हैं। इनके रीति-रिवाज आज भी अफ्रीकन रीति-रिवाज़ों से मिलते-जुलते हैं। इस लेकर गांव को लेकर एक कहानी प्रचलित है, जिसके अनुसार कई सालों पहले यहां के राजा अफ्रीकन शेरों को अपने राज्य की शान बढ़ाने के लिए ले तो आए थे, लेकिन इन शेरों को ज़िंदा रखना बेहद मुश्किल हो रहा था। इसकी वजह से राजा ने कुछ लोगों को अफ्रिका से बुला लिया और बाद में यही प्रजाति गुजरात के इस हिस्से में बस गई और इनकी संख्या धीरे धीरे बढ़ती गई।

कोडिन्ही (केरल)

यहां करींब 400 जोड़ी बच्चे ऐसे है, जो जुड़वा पैदा हुए थे

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यदि आपसे कोई ये कहे कि एक गांव में पैदा होनेवाले सभी बच्चे जुड़वा होते हैं, तो क्या आप विश्वास करेंगे? यदि आपको लगता है कि ये एक मज़ाक है, तो आप गलत हैं। क्योंकि केरल में एक गांव है, जहां जुड़वा बच्चे पैदा होते हैं। यह केरल के मल्लपुरम में बसा हुआ है, जहां रहने वाले को जुड़वा बच्चों का तोहफा मिलता है। यहां करींब 400 जोड़ी बच्चे ऐसे है, जो जुड़वा पैदा हुए थे। आज तक कोई भी डॉक्टर ये पता लगाने में कामयाब नहीं हुआ है कि ऐसा क्यों हो रहा है। अब तो ये हालात हैं कि यहां ट्रिप्लेट यानी तीन बच्चों के एक साथ होने की खबरें भी बढ़ती जा रही हैं। हालांकि गांव वालों को इससे परेशानी भी हो रही है। क्योंकि कक्षाओं में ना तो शिक्षक बच्चों में अंतर कर पाते हैं, ना ही नवविवाहित जोड़े ये समझ पाते हैं कि उनका साथी कौन सा है। इसे लोगों ने ‘लैंड ऑफ़ ट्विन्स’ का नाम दिया है।

इस तरह भारत के ये गांव अपने आप में किसी अनोखी मिसाल से कम नहीं है।

मेरी आवाज़ ही पहचान है! संगीत मेरी कल्पना को पंख देता है.. किताबी कीड़ा, अडिग, जिद्दी, मां की दुलारी.. प्राणी प्रेम ऐसा कि लोग मुझे लगभग पागल समझते हैं! खाने के लिए जीनेवाली और हद दर्जे की बातूनी.. लेकिन मेरा लेखन आपको बोर नहीं करेगा..