सिक्किम की पहाड़ियों की बर्फीली हवाएं, जिसमें खुद को बचाए रखना किसी के लिये भी असम्भव है, ऐसे में कोई है जो भारत चीन की इस दुर्गम सीमा को एक क्षण के लिए भी नहीं छोड़ता। बाबा हरभजन सिंह, जिसे शायद अब आंखों से कोई नहीं देख पाता, लेकिन उनकी रूह को आज भी लोग महसूस कर लेते हैं। एक शहीद हो चुका सैनिक कैसे आज भी देश के बॉर्डर पर पहरा दे रहा है? भारतीय सेना के इस सिपाही से क्या है सिक्किम की इन सीमाओं का रिश्ता? कौन है बाबा हरभजन सिंह और क्या है ये रहस्य? इन सभी सवालों का जवाब देता है सिक्किम की सीमा पर मौजूद बाबा हरभजन का मंदिर। इसमें बंद है एक ऐसी कहानी में, जिसे सुन कर लोग अविश्वास से भले ही इसे नकार दें, लेकिन ना सिर्फ भारतीय सेना, बल्कि चीनी सेना भी इस कहानी को पूरी तरह सच मानती हैं। आइये जानते हैं इस मंदिर और बाबा हरभजन से जुड़ी कुछ ख़ास बातें।

कौन हैं बाबा हरभजन?

कौन है बाबा हरभजन सिंह और क्या है ये रहस्य?

30 अगस्त 1946 के दिन जन्मे बाबा हरभजन, 9 फरवरी 1966 को भारतीय सेना के पंजाब रेजिमेंट में भर्ती हुए थे। 4 अक्टूबर 1968 का वो दिन था, जब सिक्किम की नाथू ला पास की एक घाटी को पार करने के दौरान उनका पैर फिसल गया और वो नीचे घाटी में जा गिरे। घाटी के नीचे नदी का बहाव इतना तेज़ था कि उनका शरीर 2 किलोमीटर तक बहता चला गया। इस घटना के कुछ महीनों बाद भारतीय सेना में अपने एक दोस्त के सपने में आकर उन्होंने अपने शरीर के मौजूद होने की जानकारी दी। तीन दिन की खोजबीन के बाद उनके शरीर को उसी जगह से प्राप्त किया गया, जिसकी जानकारी उन्होंने सपने में दी थी।

क्यों बना मंदिर?

यहां चढ़ाई गई पानी की बोतल से यदि 21 दिनों तक पानी पिया जाए, तो रोगों से छुटकारा मिल जाता है

दरअसल, उन्होंने एक सिपाही के सपने में आकर ये इच्छा ज़ाहिर की थी कि उनकी समाधि बनाई जाए। श्रद्धालुओं की इच्छा का ध्यान रखते हुए साल 1982 में बाबा हरभजन की समाधि सिक्किम पोस्ट से करीब 9 किलोमीटर नीचे बनाई गई। यह समाधि अब बाबा हरभजन मंदिर के नाम से जानी जाती है। यहां हर साल हज़ारों श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। इस मंदिर को लेकर मान्यता प्रचलित है कि यहां चढ़ाई गई पानी की बोतल से यदि 21 दिनों तक पानी पिया जाए, तो रोगों से छुटकारा मिल जाता है।

क्यों है बाबा हरभजन की मान्यता?

चीनी सैनिकों ने कई बार बाबा हरभजन सिंह को घोड़े पर बैठकर जाते हुए देखा है

बाबा हरभजन को यहां के लोग क्यों ईश्वर मान कर पूजते हैं, इसका जवाब आपको खुद यहां के सैनिक देंगे। बाबा हरभजन आज भी सैनिकों को चीन की गतिविधियों और मौसम के खतरनाक बदलावों से जुड़ी जानकारी सपने में आकर देते हैं। यहां तक कि कई बार उन्होंने ड्यूटी पर सोते हुए सैनिकों को थप्पड़ मार कर जगाया है। इसके बाद से कोई भी सैनिक ड्यूटी के दौरान सोने की हिमाकत नहीं करता। बाबा हरभजन द्वारा दी गई जानकारियां इतनी सटीक बैठती हैं कि खुद इंडियन आर्मी इस बात पर भरोसा करती है। यहां तक कि चीनी सैनिकों ने कई बार बाबा हरभजन सिंह को घोड़े पर बैठकर जाते हुए देखा है। यही वजह है कि आज भी भारत और चीन की बातचीत के दौरान उनकी कुर्सी भी बैठक में लगाई जाती है। इस तरह आज भी बाबा हरभजन यहां बतौर सैनिक कार्यरत है। उन्हें बाकायदा छुट्टी दी जाती है और उनका प्रमोशन भी होता है।

कैसे पहुंचे बाबा हरभजन के मंदिर तक?

गैंगटॉक से करीब 52 किलोमीटर दूर बना बाबा हर भजन सिंह का मंदिर, 13 हज़ार 123 फ़ीट की ऊंचाई पर बसा हुआ है। ये नाथुला और जेलेप्ला पास के बीचोंबीच बना हुआ है, जहां तक रोड ट्रिप के ज़रिये पहुंचा जा सकता है।