क्या आपने कभी रंग बदलने वाली चट्टान के बारे में सुना है? नहीं ना? तो आपको ये नज़ारा दिखाई देगा ऑस्ट्रेलिया में। अक्सर लोग अपनी छुट्टियां ऐसी जगह बिताना चाहते हैं, जहां के नज़ारे वह अपने जीवन भर याद रख सकें। प्राकृतिक खूबसूरती के साथ-साथ अजोबो-गरीब महत्त्व रखने वाली ऐसी जगहें आपको दुनिया भर में मिलेंगी। इन्ही जगहों में से एक है उरुल रॉक, जो ऑस्ट्रेलिया के उत्तरी क्षेत्र में आयर्स रॉक पर स्थित है। आज हम इसी अजीबो-गरीब चट्टान के बारे में बात करेंगे, जो अपने आप दिन में कई बार रंग बदलती है।

क्या है उलुरु की कहानी?

उलुरु का निर्माण 300 लाख साल पहले जलवायु की एक अलग स्थिति बन जाने की वजह से हुआ था

कहा जाता है कि लाखों साल पहले इस चट्टान की जगह पर एक द्वीप हुआ करता था, जहां आज इस चट्टान ने जगह ले ली है। अपनी ऊंचाई के लिए पहचाने जाने वाली इस चट्टान को ऑस्ट्रेलिया की दूसरी सबसे बड़ी चट्टान के रूप में जाना जाता है। इस चट्टान को आयर्स रॉक के नाम से भी जाना जाता है। यह जगह ऑस्ट्रेलिया के उत्तरी क्षेत्र में स्थित है। वैज्ञानिकों की मानें तो दिन में कई बार रंग बदलने वाले इस उलुरु का निर्माण 300 लाख साल पहले जलवायु की एक अलग स्थिति बन जाने की वजह से हुआ था। इसी दौरान पृथ्वी में भी कई बदलाव हुए थे, जिसकी वजह से उलुरु रॉक का निर्माण हुआ।

कितना बड़ा है उलुरु?

असल में यह एक बहुत बड़ी चट्टान का हिस्सा है, जिसका क्षेत्रफल लगभग 5.8 किलोमीटर में फैला हुआ है। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस चट्टान की ऊंचाई 348 मीटर है और इस चट्टान ने 9.4 किलोमीटर जगह को अपनी परिधि में घेर रखा है। ऑस्ट्रेलिया में सबसे बड़ी एकल चट्टान माउंट ऑगस्टस है, जिसके बाद उलुरु दूसरी सबसे बड़ी चट्टान मानी जाती है।

की जाती थी इस चट्टान की पूजा

यह स्थान पर्यटकों के लिए खास माना जाता है। यहां हर साल लाखों पर्यटक घूमने आते हैं। कहा जाता है कि यह सूरज की किरणों के साथ ही यह चट्टान अपने रंगों में बदलाव करती है। कभी बैंगनी, तो कभी लाल, कभी नारंगी और कभी भूरे रंग में यह चट्टान बदल जाती है। लोग उस वक्त इस चट्टान को देखकर भौंचक्के रह जाते हैं, जब यह चमकीले रंगों में परिवर्तित होती है। कहा जाता है कि प्राचीन समय में रंग बदलने वाली इस चट्टान को देख कर लोग चकित रह गए थे और इसके बाद लोग इसकी पूजा करने लगे थे।

क्यों रंग बदलती है ये चट्टान?

प्रधानमंत्री रहे हेनरी आयर्स के नाम पर इस चट्टान का नाम आयर्स रॉक रख दिया गया

इस चट्टान की खोज 1873 में डब्ल्यू जी गोसे नामक यात्री ने की, जिसके बाद ऑस्ट्रेलिया के उस वक्त प्रधानमंत्री रहे हेनरी आयर्स के नाम पर इस चट्टान का नाम आयर्स रॉक रख दिया गया। कहा जाता है कि यह चट्टान अपने अंदर अलग-अलग तरह की धातु, मिट्टी, रेत के कण समेटे हुए हैं, जिसकी वजह से इसमें प्रतिक्रिया होती है और ये रंग बदलती है।

पर्यटकों के लिए ख़ास है उलुरु

लोग सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक यहां का नज़ारा देखते हैं और पल पल बदलते चट्टान के रंगों को कैमरा में कैद कर लेते हैं। यह आंखों को लुभाने वाला बेहद सुंदर दृश्य माना जाता है। यह ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। यदि आप भी ऑस्ट्रेलिया हॉलिडे पर जाने का प्लान बना रहे हैं, तो उलुरु की सैर करना ना भूलें।

क्या पता आप भी जिंदगी भर के लिए अपनी यादों में एक खूबसूरत नज़ारा समेट कर वापस आएं।

मेरी आवाज़ ही पहचान है! संगीत मेरी कल्पना को पंख देता है.. किताबी कीड़ा, अडिग, जिद्दी, मां की दुलारी.. प्राणी प्रेम ऐसा कि लोग मुझे लगभग पागल समझते हैं! खाने के लिए जीनेवाली और हद दर्जे की बातूनी.. लेकिन मेरा लेखन आपको बोर नहीं करेगा..