साल 2019 का अर्ध कुंभ अब अपने अंतिम चरण की ओर की बढ़ चला है। सोमवार को कुंभ का आखिरी स्नान होगा, जिसे महाशिवरात्रि का पवित्र स्नान कहा जाता है। शिवरात्रि के इस पवन अवसर पूरे देश से लोगों का हुजूम कुंभ मेले में पहुंचेगा। शिवरात्रि का आखिरी स्नान करने के लिए लोग कई महीनों का इंतज़ार करते हैं। इस दिन कुंभ में स्नान करने की बड़ी मान्यता है, लेकिन ऐसा क्यों है क्या आप जानते हैं? यदि आप शिवरात्रि के पावन अवसर पर कुंभ स्नान के लिए जा रहे हैं, तो ज़रा इस दिन स्नान करने के पीछे क्या महत्त्व है, ये भी जान लीजिये।

क्यों है शिवरात्रि के स्नान का इतना महत्त्व?

इस दिन पूरी धूम के साथ शिव जी के मंदिर से बारात निकाली जाती है

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ये तो सभी जानते हैं कि सोमवार को अर्ध कुंभ का आखिरी स्नान होगा। फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी, जो हिन्दू पंचांग के मुताबिक़ शिव जी का दिन माना जाता है। इस दिन को शिवरात्रि के नाम से जाना जाता है। शिवरात्रि के ही दिन माता पार्वती और शिव जी का ब्याह हुआ था, इसलिए हिन्दू धर्म के मुताबिक इस दिन को सभी देवता उत्सव की तरह मनाते हैं। इसलिए इस दिन पूरी धूम के साथ शिव जी के मंदिर से बारात निकाली जाती है और माता पार्वती को ब्याहने लोग चल देते हैं। कुंभ का यह स्नान लोगों के लिए दुगुना फल लेकर आता है, क्योंकि मान्यता है कि इस दिन कुंभ में स्नान करने से भक्तों को माता पार्वती और भगवान शिव की विशेष कृपा मिलती है। इस दिन जो भक्त गण शिव जी का अभिषेक कर उनकी आराधना करते हैं, उन्हें शिव जी की असीम कृपा मिलती है।

क्या है शिवरात्रि के स्नान का फायदा

कहते हैं कि इस दिन के स्नान के लिए साधु-संत कई महीनों की राह देखते हैं। इस दिन संगम में डुबकी लगाने से आपके सारे पाप और शारीरिक विकार दूर हो जाते हैं और आपको दीर्घायु मिलती है। कुछ लोगों की यह भी मान्यता है कि इस दिन संगम स्नान से आपको अमरत्व की प्राप्ति होती है। वहीं कल्पवास करने वालों के लिए भी आज का दिन खास महत्त्व रखता है। चार महीनों से कल्पवास के दौरान ईश ध्यान में मग्न लोगों को अपनी पूजा का पुण्य इसी दिन मिलता है।

कैसा रहेगा कुंभ के आखिरी स्नान का इंतज़ाम

प्रशासन ने मार्च की 10 तारीख तक मेले को लगे रहने की व्यवस्था की है

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यदि आप कुंभ के आखिरी स्नान के लिए जा रहे हैं, तो प्रशासन की ओर से आपको सारी सुख-सुविधाएं मिलेंगी। हर साल की तरह इस साल भी सभी महत्वपूर्ण अखाड़ों को पहले स्नान का मौका दिया जाएगा, जिसके बाद सभी श्रद्धालु अलग-अलग संगम स्थानों पर डुबकी लगा सकेंगे। इस दिन के बाद भी यहां लगे मेले को नहीं हटाया जाएगा। प्रशासन ने मार्च की 10 तारीख तक मेले को लगे रहने की व्यवस्था की है। इस दौरान सभी श्रद्धालुओं को सभी सुविधाएं पहले की तरह मिलती रहेंगी। कहा जा रहा है कि भगदड़ और अफरा-तफरी से बचने के लिए ये नियम लागू किये गए हैं।

यदि आप भी इस साल के अर्ध कुंभ के आखरी स्नान का लाभ उठाना चाहते हैं, तो इन बातों का ज़रूर ख़याल रखें।

मेरी आवाज़ ही पहचान है! संगीत मेरी कल्पना को पंख देता है.. किताबी कीड़ा, अडिग, जिद्दी, मां की दुलारी.. प्राणी प्रेम ऐसा कि लोग मुझे लगभग पागल समझते हैं! खाने के लिए जीनेवाली और हद दर्जे की बातूनी.. लेकिन मेरा लेखन आपको बोर नहीं करेगा..