हिन्दू मान्यता के अनुसार, देश में स्थित 12 ज्योतिर्लिंगों का विशेष महत्व है। भक्तगण इन सभी ज्योतिर्लिंगों के दर्शन की जीवन में कामना रखते हैं और जिसने भी अपने सम्पूर्ण जीवन काल में इन ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कर लिए उसे बेहद भाग्यशाली माना जाता है। इन ज्योतिर्लिंगों पर कई त्यौहारों पर रौनक बढ़ जाती है जैसे शिव की आराधना का महीना सावन हो या फिर महाशिवरात्रि। 3 मार्च को देशभर में शिवरात्रि मनाई जाएगी। इस मौके पर आइए हम आपको बताते हैं इन 12 ज्योतिर्लिंगों के बारे में कि आखिर क्यों पर्यटक यहां दर्शन को पहुंच जाते हैं।

12 ज्योतिर्लिंगों के विशेष महत्व को जानिए

सोमनाथ की भक्ति से मिलते हैं लाभ

Image Credit: cloudfront.net

सोमनाथ: पंडित नितिन उपाध्याय के अनुसार, 12 ज्योतिर्लिंगों में से सोमनाथ को प्रथम मानकर इसे पूजने का विशेष महत्त्व है। यह गुजरात के कठियावाड़ में स्थित है। मंदिर के पीछे मान्यता ये है कि चन्द्रमा ने दक्षिण प्रजापति की 27 बेटियों से शादी की थी लेकिन प्रजापति ने चन्द्रमा को श्राप दिया था कि वह अपनी सभी बीवियों को नज़रअंदाज़ करेगा सिवाए रोहिणी को छोड़कर। इस श्राप से पीछा छुड़ाने और अपना खोया हुआ सौन्दर्य पाने के लिए चन्द्रमा ने शिव की आराधना की। शिव ने उनकी इच्छा पूरी की और सोमनाथ के ज्योतिर्लिंग में बस गए।मंदिर हर दिन सुबह 6 बजे से 9 बजे तक खुलता है।

नागेश्वर: यह सौराष्ट्र, गुजरात के गोमती द्वारका और बेट द्वारका के बीच स्थित एक मशहूर ज्योतिर्लिंग है, हर साल यहां लाखों श्रद्धालु दर्शन का लाभ लेने आते हैं। यहां भगवान शिव की 25 मीटर मूर्ति स्थापित की गई है। मंदिर बेहद खूबसूरत है और यहां से अरब सागर का खूबसूरत नज़ारा भी देखने को मिलता है। मंदिर के खुलने का समय सुबह 5 से 9 बजे का है।

भीमाशंकर: यह पुणे,महाराष्ट्र में भीमा नदी के किनारे स्थित है। काले मार्बल से बना यह मंदिर नागारा आर्कीटेक्चर के मुताबिक बना है।इसे कुंभकरण के बेटे भीमा ने बनवाया था। इसके पास ही माता पार्वती का कामलाज मंदिर स्थित है जहां भी श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है।यहां सुबह 5 बजे से रात 9:30 बजे तक दर्शन किए जा सकते हैं।

त्र्यम्बकेश्वर दर्शन: यह नासिक,महाराष्ट्र में ब्रह्मगिरी पर्वत पर स्थित है जहां गोदावरी नदी का उद्गम है। शिव पुराण के मुताबिक गोदावरी नदी और गौतमी ऋषि ने भगवान शिव से यहां वास करने की विनती की थी तभी त्रिम्बकेश्वर के रूप में भगवान शिव बस गए। यहां पिंडी के स्थान पर तीन पिलर हैं जो कि ब्रह्मा,विष्णु और महेश को दर्शाते हैं। मंदिर सुबह 5:30 बजे से 9 बजे तक हर दिन खुलता है।

घृष्णेश्वर: यह औरंगाबाद, महाराष्ट्र में स्थित है जो कि अजंता, एलोरा गुफाओं के पास स्थित है। इसे अहिल्याबाई होलकर ने बनवाया था। यहां विष्णु का दशावतार लाल चट्टान पर उकेरा गया है, जो कि बेमिसाल नजर आता है।

वैद्यनाथ: यह भी 12 ज्योतिर्लिंगों में से सबसे ज्यादा पूजा जाने वाला ज्योतिर्लिंग है। इसकी गिनती 52 शक्तिपीठों में भी होती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार रावण ने कई साल तपस्या की और उनसे लंका में वास करने की गुहार लगाई। विष्णु ने उन्हें ऐसा करने से मना किया और शिवलिंग को कुछ समय के लिए शांत रखने की सलाह दी। रावण ने बात नहीं मानी और तभी से वह वैद्यनाथ,देवघर में बस गए।

महाकालेश्वर: यह उज्जैन, मध्य प्रदेश में स्थित है। माना जाता है कि इसकी स्थापना पांच साल के बच्चे श्रीकर द्वारा की गई थी जो कि उज्जैन के राजा चंद्रसेन की भक्ति से प्रभावित थे। मंदिर क्षिप्रा नदी के किनारे स्थित है।

ओमकारेश्वर: ओम को उच्चारित करता यह ज्योतिर्लिंग भी बेहद प्रसिद्ध है। यह नर्मदा के किनारे शिवपुरी पर स्थित है। मान्यता है कि यहां देव और दानवों का युद्ध हुआ था तब देवों ने शिव से जीत की प्रार्थना की थी। प्रार्थना से खुश होकर शिव ओमकारेश्वर में बस गए और दानवों से जीत दिलाने में उनकी मदद की।

काशी विश्वनाथ: यह वाराणसी, उत्तरप्रदेश में स्थित है जिसे 1780 में महारानी अहिल्या बाई से बनवाया था।इसे बेहद सिद्ध ज्योतिर्लिंग माना जाता है।

केदारनाथ: उत्तराखंड के रूद्र पर्वत पर 1200 फीट की ऊंचाई पर स्थित केदारनाथ ज्योतिर्लिंग को हिन्दू धर्म में चार धामों में से एक माना जाता है। बेहद बर्फ़बारी के चलते यह साल में 6 महीने बंद रहता है। केदारनाथ से पहले तीर्थयात्री गंगोत्री और यमनोत्री में डुबकी लगाते हैं ताकि उन्हें सारे पापों और दुखों से मुक्ति मिल जाए।

रामेश्वरम: रामेश्वरम,तमिलनाडु में स्थित इस ज्योतिर्लिंग की पूजा भगवान राम ने शुरू की थी जब उन्होंने रावण पर जीत हासिल की थी। यह बेहद लोकप्रिय तीर्थस्थान है।

मल्लिकाअर्जुन: यह श्रीशैलम,आंध्र प्रदेश में स्थित है।यह कृष्णा नदी के किनारे स्थित है।इसकी खूबसूरत वास्तुकला आपका मन मोह लेती है।इसे भी 52 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है।

This is aawaz guest author account