इस तथ्य से कोई इनकार नहीं करता है कि हमारा शरीर अब युवा नहीं हैं। जो बीमारियां हमें 50 साल की उम्र के बाद घेरती थीं अब हमें 30 से 40 साल की उम्र में होने लगी है। अब 40 साल की उम्र में 50 साल की उम्र वाले शारीरिक बदलाव और बीमारियां होना आम बात हो गयी है। ऐसे में अगर हम समय रहते सचेत हो जाएं, तो हम कई स्वास्थ्य समस्याओं से बच सकते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में हमारी डाइट महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। डाइट में उन खाद्य पदार्थों का होना जरूरी है जो शरीर को पोषण प्रदान करते हैं। फैट और शुगर से भरे खाद्य पदार्थ ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और डायबिटीज की समस्या को ट्रिगर कर सकते हैं। लेकिन यदि आप अब अपनी डाइट को नियंत्रित करते हैं, तो आप आगे स्वस्थ और रोग मुक्त रहेंगे। यह आसान काम नहीं होता क्योंकि आजकल की बिजी लाइफस्टाइल में हम कई ऐसी चीज़ें भी मजबूरन खा लेते हैं, जो हम जानते हैं कि हमें नहीं खानी चाहिए। लेकिन हम चाहें तो धीरे-धीरे अपनी आदत बदलकर कई समस्याओं से बच सकते हैं। लेकिन ध्यान रखें बहुत ही ज्यादा हेल्दी डाइट खाने के चक्कर में अपनी डाइट में कार्बोहायड्रेट की मात्रा एकदम कम न कर दें, वरना इससे कई नुकसान झेलने पड़ सकते हैं। आइये आपको बताते हैं उनके बारे में..

लो-ब्लड शुगर: डायटीशियन मंजरी ताम्रकार के मुताबिक, यदि आप इंसुलिन पर हैं या अपनी ब्लड शुगर के लेवल को नियंत्रित करने के लिए कुछ अन्य दवाइयां लेते हैं, तो अपने डॉक्टर से जरुर बात करें और बताएं कि आप लो- कार्ब की डाइट ले रहे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि जब कार्बोहाइड्रेट का सेवन काफी कम हो जाता है, तो कम ब्लड शुगर को होने से रोकने के लिए आपकी दवा की खुराक को बदलना पड़ता है। इसलिए, लो कार्ब डाइट शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श ज़रूर लें।

पोषक तत्वों की कमी: हालांकि कई लोग जो लो-कार्ब डाइट लेते हैं, वे आमतौर पर खुद को स्वस्थ महसूस करते हैं, लेकिन हमेशा ऐसा नहीं होता है। लो-कार्ब डाइट से पोषक तत्वों की कमी हो सकती है,इसलिए एकदम से कार्बोहायड्रेट खाना बंद न करें।

लो-कार्ब फ्लू: जो लोग बहुत सारे कार्ब खाने की आदत के बाद बहुत कम कार्ब डाइट खाना शुरू देते हैं, वे लो कार्ब फ्लू से पीड़ित हो सकते हैं। लो-कार्ब फ्लू में थकान और सिरदर्द शामिल हैं। यह सुनिश्चित करके स्थिति को कम से कम किया जा सकता है कि आप अपने आप को हाइड्रेटेड रखें और पर्याप्त नमक खाएं। ऐसा इसलिए है क्योंकि आहार के शुरुआती हफ्तों के दौरान लो कार्ब फ्लू आमतौर पर शरीर से तरल पदार्थ और नमक को बाहर निकालने का काम करता है। एक बार में सभी कार्ब्स को डाइट से कम करने के बजाय कार्बोहाइड्रेट का सेवन धीरे-धीरे कम किया जा सकता है।

क्रेम्प्स की भी होती है समस्या

Image Credit: std-gov.org

ऐंठन: जब आप लो कार्ब डाइट लेते हैं तो आपका शरीर पोटेशियम, मैग्नीशियम या सोडियम सहित आवश्यक पोषक तत्व खो देता है। यदि आपको ऐंठन हो रही है तो ऐसे में आप पर्याप्त मात्रा में नमक का सेवन करें। पोटेशियम के कुछ अच्छे स्रोत जैसे अंडे, बादाम, मशरूम और दही शामिल हैं।

कब्ज: लो-कार्ब डाइट से शुरू में कब्ज हो सकता है। इसलिए यदि कब्ज आपको बहुत परेशान कर रहा हैं तो आप इसबगोल की भूसी का सेवन कर सकते हैं।इससे आपको राहत मिलेगी।

This is aawaz guest author account