महिलाओं में पीरियड्स का होना एक सामान्य अवस्था है। ख़ास कर यदि पीरियड्स का समय 3 -5 दिन है। एक्सपर्ट्स की मानें तो आपके पीरियड्स का ड्यूरेशन यदि 3 ही दिन है तो यह सर्वोत्तम है। लेकिन अधिकांश महिलाओं में पीरियड्स का समय 5 दिनों से भी ऊपर चला जाता है। ऐसे में यह देखना बेहद ज़रूरी है कि इसके पीछे की वजह क्या है। अधिकतम मामलों में यह एक सामान्य बात है, लेकिन फिर भी एक्सपर्ट्स के अनुसार इसके पीछे कुछ ऐसे संभावित कारण हो सकते हैं, जिनके प्रति आपको सचेत रहना चाहिए। आज के इस आर्टिकल के माध्यम से हम आपको ऐसे ही कारणों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनके चलते पीरियड्स का ड्यूरेशन 5 दिन या उससे अधिक हो जाता है। आइये जानते हैं।

डॉक्टर रेखा गांगुली के मुताबिक, पीरियड्स में बदलाव का एक सबसे बड़ा कारण हार्मोनल चेंज है। कभी-कभी कुछ दवाओं के चलते शरीर का हार्मोनल लेवल प्रभावित हो जाता है जिसके चलते पीरियड्स कुछ ज्यादा लंबा खिंच सकते हैं। पीरियड्स का समय लंबा खिंचने के पीछे एक अन्य वजह भी है जिसका नाम है ‘तनाव’। जी हां, तनाव के कारण भी हार्मोनल इम्बैलेंस की स्थिति निर्मित होती है जिसके चलते पीरियड्स का समय थोडा आगे सरक सकता है।

अगर लंबी हो रही पीरियड्स की अवधि तो हो सकते हैं ये कारण

थायराइडसे भी प्रभावित होते हैं पीरियड्स

Image Credit: cloudinary.com

थायराइड ग्लैंड में बदलाव

पीरियड्स का समय बदलने के पीछे छिपी अन्य वजहों में से एक है थायराइड ग्लैंड में बदलाव होना। क्या आप जानती हैं कि प्रति 3 में से 1 महिला जो उम्र के 30वें या 40वें साल में है थायराइड से जुड़ी समस्या से दो चार हो चुकी होती है। थायराइड ग्लैंड में परिवर्तन के चलते पीरियड्स का समय कुछ ज्यादा ही लंबा खिंच सकता है। थायराइड ग्लैंड में गड़बड़ी होने की मुख्य वजह है शरीर में आयोडीन की कमी होना, इसलिए यदि आप भी इस समस्या से पीड़ित हैं तो चिंतित ना हों बस अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

पोलिप (Polyp) की समस्या

शरीर में टिशु की बेतरतीब ग्रोथ को पोलिप (Polyp) कहते हैं। यह बॉडी के किसी भी ऑर्गन में हो सकती है। महिलाओं के साथ यह समस्या ज़्यादातर यूट्रस में आती है। इस समस्या का सीधा असर पीरियड्स की ड्यूरेशन पर पड़ता है। पोलिप (Polyp) की समस्या कैंसर का भी कारण बन सकती है, इसलिए यदि आपका ऐसा कुछ भी अनुभव कर रही हैं तो तत्काल अपने डॉक्टर से संपर्क करना आपके लिए अच्छा रहेगा।

बर्थ कंट्रोल के तरीकों में बदलाव

यदि आप किसी तरह की बर्थ कंट्रोल पिल्स का इस्तेमाल कर रही हैं तो यह भी पीरियड्स के समय को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए यदि बर्थ कंट्रोल के लिए आप किसी प्रकार की दवाई खा रही हैं, तो एक बार अपने डॉक्टर से इस सम्बन्ध में परामर्श अवश्य लें।

मोटापा

पीरियड्स के समय में बड़े बदलाव की एक मुख्य वजह ओवरवेट होना भी है। अक्सर मोटापा या ओवरवेट होने से शरीर का हार्मोन लेवल और इन्सुलिन लेवल असंतुलित हो जाता है। जिस वजह से पीरियड्स कुछ दिन ज्यादा खिंच जाता है।

ज़रुरत से ज्यादा वज़न कम कर लेना

यह एक ऐसी अवस्था है जिससे वह महिलाएं प्रभावित होती हैं जो कम समय में ज्यादा से ज्यादा वेट कम कर लेना चाहती हैं। ऐसा करने से शरीर में कैलोरीज की कमी होने लगती है और नतीजा यह होता है पीरियड्स या तो होते ही नहीं या इनके होना ना के बराबर हो जाता है।

ब्लीडिंग की समस्या

कई बार कुछ महिलाओं को ब्लड क्लोटिंग की समस्या रहती हैं। इस समस्या में ज़ख्म जल्दी नहीं भरते और ब्लीडिंग ज्यादा होती है। ऐसी अवस्था से पीड़ित महिलाओं में पीरियड्स की अवधि थोडा लंबी होती है। ऐसे में यदि आप भी ब्लड क्लोटिंग की समस्या से जूझ रहीं हैं तो अपने डॉक्टर से समय रहते संपर्क करना आपके लिए उचित रहेगा।

This is aawaz guest author account