लड़कियां माँ लक्ष्मी का रुप होती है। भारतीय संस्कृति तो यही सीखाती हैं, लेकिन फिर भी आए दिन अखबारों के पहले पन्ने पर छपती बलात्कार की खबरें इस बात को बखूबी बयान करती है कि हमारे समाज में आज भी लड़कियों को मां लक्ष्मी समझने वाले लोग कम ही है। शिवानी शिवाजी राय ऐसे ही अपराधियों का सामना करती हैं, जिन्हें औरतों का माँ दुर्गा का ही रुप समझ में आता हैं। यह फिल्म, साल 2014 में रिलीज़ हुई फिल्म मर्दानी की दूसरी कड़ी की फिल्म है। निर्भया, कठुआ या अब प्रियंका रेड्डी जैसी धटनाओं को पढ़ कर अखबार साइड में रख देते लोगों या फिर टीवी पर ऐसी खबरें देख, टीवी बंद कर देते दर्शकों के लिए यह फिल्म थोड़ी भारी हो सकती हैं, लेकिन यह फिल्म हर उस लड़की को देखनी चाहिए, जो शिवानी शिवाजी राय जैसी बनना चाहती हैं। गोपी पुथरन के निर्देशन में बनी यह फिल्म हमारे समाज में औरतों की स्थिति के कई पहलुओं से रुबरु कराती हैं।

फिल्म की कहानी

फिल्म के निर्देशक गोपी पुथरन ने ही इस फिल्म की कहानी लिखी हैं

Image Credit: Movie – Mardaani 2

राजस्थान का कोटा शहर, जहाँ देशभर से कई युवा पढने के लिए आते है, ऐसे शहर में युवा लड़कियों के साथ निर्मम बलात्कार की घटनाओं की जाँच एक फ़ीमेल एस-पी शिवानी शिवाजी राय को दी जाती हैं। औरत हो कर, मर्द (कुछ संकुचित मानसिकता वाले) साथियों की टीम को लीड करना, जहाँ उसकी काम की जगह पर उसके लिए चैलेंजिंग है, वहीं ऐसे अपराधी को ढूँढना, जो लड़कियों का निमर्म बलात्कार कर उन्हें मार डालता है, शिवानी की सबसे बड़ी चुनौती हैं। अपने ही थाने में ऐसी संकुचित मानसिकता वाले सहयोगी के साथ डील करना हो या फिर औरतों को मर्द से कम समझने वाले और उन्हें अपनी ही औकात में रहने का सबक सिखाने वाले अपराधी को ढूंढना, शिवानी हार मानने वालों मे नहीं। ऐसी धटनाओं को देखकर उसके आसूँ भले ही निकलते हो, लेकिन वो कभी अपने अपने इमोश्न को अपने दिमाग और फर्ज़ पर हावी नहीं होने देती और उसकी यही ताकत उसे अपराधी तक पहुँचने में कामयाब बना देती है। देश में 18 साल से भी कम उम्र के लड़कों द्वारा किए जाते बलात्कार के मामलों के पीछे की मानसिकता भी यह फिल्म साफ करती हैं। दरअसल, बचपन में अपनी ही आँखों के सामने, अपने ही घर में, अपनी माँ या बहन के साथ ऐसा व्यवहार किसी को भी सन्नी (फिल्म का विलेन विशाल) बना सकता है। फिल्म में सन्नी का किरदार इस बात की ओर इशारा करता हैं कि समाज में लड़कों की सही और अच्छी परवरिश कितनी ज़रुरी है।

फिल्म के किरदार

फिल्म 105 मिनट की हैं

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फिल्म दो किरदारों के ही इर्द गिर्द फिल्म घूम रही हैं। शिवानी शिवाजी राय यानि रानी मुखर्जी और सन्नी यानि विशाल जेठवा। अपने काम के प्रति ईमानदार, दिमाग से शातिर और हौसले बुलंद रखने वाली शिवानी की सबसे खास बात यह है कि वह खुद भले ही माँ दुर्गा और काली जैसा साहस रखती हो, लेकिन उसको देख कर हर लड़की खुद के लिए खड़े होने को प्रेरित हो जाती हैं। सन्नी यानी विशाल जेठवा फिल्म के विलेन है, उन्हें देखकर किसी भी लड़की को उनसे नफरत हो सकती हैं और यही उनके किरदार की सफलता है। मास्क लगाकर, लंगड़ा बनने की एक्टिंग करने वाला अस्थमा का मरीज़ सन्नी का, अपनी हवस पर काबू नहीं, उसे हर वो लड़की, जो लड़कों से खुद को ज़्यादा साबित करने की कोशिश करे, उससे दिक्कत हैं। वह शिवानी शिवाजी राय की बहादुरी का कायल ज़रुर है, लेकिन उसे भी अपना निशाना बनाना चाहता हैं। इस विलेन की खास बात है कि वो अपनी हर चाल पुलिस को बता कर चलता है और इतना चतुर है कि उन्हीं की नाक के नीचे और आँखों के सामने रहते हुए भी पुलिस उसे पहचान नहीं पाती। मर्दानी फिल्म के विलेन खास होते है। जहाँ पहली फिल्म का विलेन ताहिर राज भसीन खास था, वहीं इस फिल्म का विलेन भी आपको टक्कर का ही लगेगा। पहली फिल्म होते हुए भी विशाल ने जो काम किया है, वो काबिल-ए-तारीफ है।

फिल्म देखें या नहीं

फिल्म के कई दृश्य आपको विचलित कर सकते हैं

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फिल्म से आप मनोरंजन की उम्मीद नहीं कर सकते। फिल्म सच्ची ज़िंदगी की घटनाओं पर आधारित है। इस फिल्म की सफलता को बॉक्स ऑफ़िस पर की गई कमाई से नहीं मापा जा सकता, इस फिल्म की सफलता इसी में होगी कि लोग इस फिल्म को देखें और समाज में बदलाव के लिए, महिलाओं के प्रति अपनी सोच को बदलने के लिए प्रेरित हो।

ऐसी फिल्में हमारे समय की मांग है। भारत की कुल जनसंख्या में 48 प्रतिशत महिलाएँ होते हुए भी, संसद में महिलाओं का योगदान 12 प्रतिशत ही हैं। महिलाओं को सम्मान और बराबरी का स्थान देने में भारत 131वे स्थान पर है, फिल्म में दिए गए ऐसे कुछ तथ्य आपको यह बता देंगे कि क्यों किसी भी लड़की को अपनी रक्षा के लिए शिवानी शिवाजी राय का इंतज़ार नहीं करना, बल्कि खुद शिवानी शिवाजी राय बनना है।

आवाज़ डाट कॉम 3.5 स्टार देता हैं।

HFT हिन्दी की एडिटर, मनमौजी, हठी लेकिन मेहनती..उड़ नही सकती लेकिन मेरी कल्पनाशक्ति को उड़ने से कोई नहीं रोक सकता। अपने महिला होने पर मुझे सबसे ज्यादा गर्व है। लिखना मेरा शौक है। लिखने के अलावा बेटे के साथ गप्पे मारना और खेलना मुझे बेहद पसंद है।