अभिनेत्री, निर्देशक और लेखक के तौर पर अपनी पहचान इंडस्ट्री में बना चुकी कोंकणा सेन उन अभिनेत्रियों में से है, जिन्होनें अपने बलबूते पर अपनी पहचान बनाई है। कई महिला प्रधान और रियलिस्टिक किरदारों को निभाने वाली कोकणा, फिल्मकार अपर्णा सेन की बेटी है। सच्चाई के करीब किरदार करने में विश्वास रखती कोंकणा के मुताबिक इंडस्ट्री में आज भी पर्दे के पीछे काम करने वाली महिलाओं की तादाद बहुत कम है। हालांकि हमारे समाज में जहां कई औरतें शादी के बाद अपने नाम के पीछे पति का नाम लगा देती है, वहीं कोंकणा का मानना है कि उनको शादी के बाद अपनी पहचान बदल देने वाली महिलाओं पर उन्हें बहुत गुस्सा आता है।

आज भी इंडस्ट्री में निर्णय लेने वाली बड़ी जगहों पर मर्द ही बैठे हैं

हाल ही में कोंकणा ने ईरास नाव पर शॉर्ट फिल्म ‘मानसून डेट’ की है

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पिछले कुछ समय से इस बात की सराहना की जा रही है कि इंडस्ट्री में पहले की तुलना में बड़ी संख्या में महिलाएं आ रही हैं, चाहे वो निर्देशक की कुर्सी हो या फिर राइटर की। हालांकि कोंकणा इस बात से बिल्कुल इत्तेफाक नहीं रखती। फिल्मी परिवार और माहौल में पली-बड़ी कोंकणा के मुताबिक आज भी महिलाओं की स्थिति इंडस्ट्री में वैसी ही है, जो कई साल पहले तक थी। कोंकणा के अनुसार, “मुझे लगता है कि अभी भी महिलाओं के साथ अन्याय हो रहा है। हमें इतने कम से इतना खुश नहीं हो जाना चाहिए और यही कारण है कि हम आज भी बहुत कम ही है जो नहीं होना चाहिए। यही एटीट्यूड रखेंगे तो नहीं चलेगा। हमें जितना दूर जाना है वह तो हम देख ही नहीं रहे हैं। मुझे लगता है कि पॉवर तो अभी भी मर्दों के हाथों में ही है, जो डिसीजन लेता है इंडस्ट्री में वह पुरुष ही ले रहा है। महिलाएं चाहे वह एक्टर हो, राइटर हो या बिहाइंड द सीन हो, लेकिन पॉवर तो मर्दों के हाथों में ही है। मुझे लगता है कि हम अभी भी बहुत दूर हैं।”

शादी के बाद नाम बदलने वाली महिलाओं पर आता है गुस्सा

कोंकणा सेन ने पिछले साल ‘ए डेथ इन द गुंज’ नाम की फिल्म का निर्देशन किया था

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महिलाओं की इस स्थिति के लिए जहां एक तरफ कोंकणा महिलाओं को ही ज़िम्मेदार मानती है, वहीं उनका यह भी मानना है कि हमारे स्कूलों और परिवार में जेंडर हिस्ट्री की जानकारी बच्चों को शुरु से देना बेहद ज़रुरी है। शादी के बाद अपना नाम और पहचान बदल लेती महिलाओं पर कोंकणा को बहुत गुस्सा भी आता है। कोंकणा की मानें तो, “हमारे स्कूलों में जेंडर हिस्ट्री को सिखाया जाना बहुत जरूरी है। महिलाएं शादी के बाद अपना नाम बदल देती है और मुझे नहीं समझ में आता कि वह ऐसा क्यों करती है, क्या मर्द अपना नाम बदलते हैं? हम ऐसा क्यों करते हैं क्योंकि यह हमें कंफर्टेबल महसूस कराता है और यही हमारे संस्कारों में है और यही हमेशा से ऐसा चला रहा है क्योंकि हमारी मां ने ऐसा किया था, वह सब अच्छे लोग ही तो थे वह भी बुरे लोग तो नहीं थे। यह बात सोच कर मुझे बहुत गुस्सा आता है आप अपनी पहचान बदल रही हैं और यह बिल्कुल भी सही नहीं है।”

गौरतलब है कि लाइफ इन ए मेट्रो, तलवार, लिपस्टिक अंडर माई बुर्का उनकी कुछ ऐसी फिल्में है, जो उनके किरदारों की छाप लोगों पर छोड़ गई हैं। हाल ही में ईरोस नाव पर स्ट्रीम हो रही उनकी शॉर्ट फिल्म ‘मानसून डेट’ को भी काफी सराहना मिली है। कोंकणा बहुत ही जल्द एक नई वेब सीरीज भी लेकर आ रही हैं।

HFT हिन्दी की एडिटर, मनमौजी, हठी लेकिन मेहनती..उड़ नही सकती लेकिन मेरी कल्पनाशक्ति को उड़ने से कोई नहीं रोक सकता। अपने महिला होने पर मुझे सबसे ज्यादा गर्व है। लिखना मेरा शौक है। लिखने के अलावा बेटे के साथ गप्पे मारना और खेलना मुझे बेहद पसंद है।